Sunday, January 17, 2021
Home बड़ी ख़बर आतंकियों को मानवीय बनाने की कोशिश करने वालो, बेहयाई थोड़ी कम कर लो

आतंकियों को मानवीय बनाने की कोशिश करने वालो, बेहयाई थोड़ी कम कर लो

क्या कुछ न्यूनतम स्तर है राष्ट्रवादी होने का? या देश की चिंता करना, उसके जवानों के बलिदान पर आहत महसूस करना, देश के समर्थन में नारे लगाना अपराध है, और कथित तौर पर आर्मी द्वारा बच्चे को मामूली सजा देने पर आरडीएक्स से भरी गाड़ी लेकर 40 जवानों की हत्या करना उचित कार्य?

ओसामा एक अच्छा पिता था, बुरहान वनी का बाप हेडमास्टर था, अफ़ज़ल गुरू का बेटा बारहवीं में इतने नंबर लाया, अहमद डार को आर्मी वाले ने पीटा था, आर्मी के लोगों के कारण आतंकी बनते हैं… ऐसे हेडलाइन आपको पत्रकारिता के समुदाय विशेष से लगातार मिलते रहेंगे। हमेशा इनकी लाइन यही रहती है कि जिसने इतनी जानें ले लीं, वो कितना अच्छा आदमी था, और उसकी बुराई की ज़िम्मेदारी भी पीड़ितों पर ही है। 

ये यहीं तक नहीं रुकता, क्योंकि ये वो लोग हैं जो पाकिस्तान का अजेंडा भारत में चलाते हैं जिसे पाकिस्तान अपने बचाव में इस्तेमाल करता है। देखा जाए तो इस तरह की बातें, ऐसे मौक़ों पर करना यह बताता है कि ये लोग उन आतंकियों की विचारधारा के लिए मस्जिद के ऊपर लगे लाउडस्पीकर हैं जो इसे एम्प्लिफाय करते हैं। इनके लेखों से यही निकल कर आता है जैसे कि जवानों की नृशंस हत्या के पीछे उन्हीं का हाथ था, और आतंकियों का नहीं।

ऐसी घटनाओं के बाद भी ‘दूसरा एंगल’ तलाश लेना, या हमेशा ही ऐसे ही एंगल तलाशने की कोशिश करना बताता है कि इनकी संवेदना कहाँ है। अपने हेडलाइन में बलिदान के लिए ‘मरे’, आतंकियों के लिए ‘लोकल यूथ’, पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराने के लिए ‘ब्लेम’ और ‘अक्यूज’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं तो पता चलता है कि आपको पाकिस्तानी तथा आतंकी विचारधारा भी बेचनी है, और अपने आप को भारतीयता का मुखौटा भी पहनना है। 

इनमें से कुछ तो आदत से लाचार और लगातार एक ही तरह की बेहूदगी करने वाले लोग हैं। चाहे वो बरखा दत्त का ‘हेडमास्टर बाप’ हो, क्विंट का ‘अच्छा पिता ओसामा’ हो, या स्क्रॉल का ‘मौलवी बनने की चाह रखने वाला’ पुलवामा आतंकी अहमद डार हो, ये लोग हमेशा बताने में रहते हैं कि ऐसे घातक आतंकवादी कितने अच्छे और सुशील लोग थे।  

ऐसी ही मानसिक विक्षिप्तता का परिचय कोर्ट से कई बार डाँट सुन चुके वकील प्रशांत भूषण ने लिखा कि आर्मी ने कभी अहमद डार को किसी कारण से पीटा था, इसलिए वो आतंकी बन गया। साथ ही, भूषण ने यह भी लिखा कि इसी तरह की हरकतों के कारण लोग आतंकी बन जाते हैं। ये अपने आप में एक अलग लेवल की नग्नता है। अगर आर्मी वाले ने उसे पीटा भी हो, तो क्या राह चलते उसे बिना कारण के पीट दिया? क्या प्रशांत भूषण ने ये पता करने की कोशिश की कि क्या अहमद डार आर्मी पर पत्थर चला रहा था, या उनके काम में बाधा पहुँचा रहा था, या राष्ट्रविरोधी आंदोलन में साथ दे रहा था? इस पर चुप्पी है क्योंकि ट्वीट में 280 कैरेक्टर ही होते हैं, और प्रशांत भूषण जैसे वकील तो तो साँस लेने के भी पैसे माँग लेते हैं! 

पिछले दिनों में आपको अधिकांश मीडिया हाउस जवानों के परिवारों से मिल कर, उनकी कहानियाँ दिखा रहा है कि अकारण हुए इस बलिदान से कितने लोग आहत हैं। लोगों तक ऐसे हृदयविदारक कहानियाँ लाई जा रहीं हैं जिसे सुनकर हमारे शरीर में सिहरन होने लगती है। टीवी पर एंकर तक अपने आप को इस भावुक क्षण में रोक नहीं पातीं, उनके आँसू छलक जाते हैं। जवानों के परिवारों के लोग बता रहे हैं कि किसी की शादी होने वाली थी, कोई फोन पर बात कर रहा था जब धमाका हुआ, किसी ने कहा था कि छुट्टी पर आते ही वो घर बनवाएगा…

ये वो लोग हैं जिनके परिवार आर्थिक रूप से उतने सक्षम नहीं हैं, उनके लिए घर का चिराग़ एक ही था। ग़ौरतलब यह भी है कि यही क्विंट, स्क्रॉल, एनडीटीवी और भूषण अपनी ज़रूरत के हिसाब से दलितों, वंचितों और पिछड़ों की बात करते हुए रुआँसे हो जाते हैं, और ये वही लोग हैं जिन्हें उसी सामाजिक स्तर के लोगों के बलिदान पर यह याद आता है कि जिस आतंकी ने 44 लोगों की जान ले ली, उसके पास एक ज़ायज कारण था! 

आप कहने को स्वतंत्र हैं कि पत्रकार ने वही लिखा जो उसके माँ-बाप ने कहा। लेकिन, ऐसी बातें छापना यह नहीं बताता कि आप उस आतंकी की विचारधारा को हवा दे रहे हैं? आप कहीं न कहीं जस्टिफाय करने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर किसी स्कूली बच्चे को कोई पीटे, डाँटे, मुर्गा बना दे, तो वो तीन सौ किलो विस्फोटक लेकर सेना की गाड़ियों से टकरा दे? 

या, आपको लगता है कि ख़बर पढ़ने वाले इतने मूर्ख हैं कि उन्हें लगेगा कि ये महज़ रिपोर्टिंग है? ये रिपोर्टिंग छोड़कर सब कुछ है। ये बताता है कि पत्रकारिता में संवेदनहीनता का चरम स्तर क्या है। जैसे कि संसद पर हुए हमले की बात सुनकर राजदीप जैसों की बाँछें खिल जाती हैं। जैसे कि बुरहान वनी जैसे आतंकियों के परिवार की कहानी बताकर बरखा दत्त दुनिया को यह बताना चाहती हैं कि उसका बाप हेडमास्टर था, और उसके आतंकी बनने के पीछे भारत सरकार की ट्रेनिंग शामिल थी! 

चौबीसों घंटे टीवी और मीडिया साइट्स के दौर में हिट्स और क्लिक्स के लिए पत्रकार हमेशा नया एंगल ढूँढते रहते हैं, इसमें कोई बुराई नहीं। लेकिन नया एंगल पाने की चाहत में विशुद्ध नीचता पर उतर आना और देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने वाली शक्तियों को ‘मानवता का पक्षधर’ बताने की कोशिश आखिर क्या कहती है? 

राष्ट्रवाद को ज़हर बताने तक की कोशिश करने वाले आखिर अपनी लाइन कब खींचेंगे? क्या कुछ न्यूनतम स्तर है राष्ट्रवादी होने का? या देश की चिंता करना, उसके जवानों के बलिदान पर आहत महसूस करना, देश के समर्थन में नारे लगाना अपराध है, और कथित तौर पर आर्मी द्वारा बच्चे को डाँटने पर, मामूली सजा देने पर आरडीएक्स से भरी गाड़ी लेकर 40 जवानों की हत्या करना उचित कार्य? 

ये बेहूदगी है कि उनके परिवार का भी बच्चा मर गया। शर्म आनी चाहिए ऐसे माँ और बाप को जो इस कुकृत्य को किसी भी तरीके से सही ठहराने की कोशिश कर रहा है। कम से कम इतनी हया तो रहनी चाहिए कि सीधा कह दो कि तुम और तुम्हारा परिवार भारत के ख़िलाफ़ है, न कि यह कि उसे आर्मी वाले ने एक दिन पीटा था तो उसने ऐसा कर दिया! ये किस तरह की परवरिश है?

क्या एक बलात्कारी का पिता और ये मीडिया वाले उसके पक्ष में यह कह कर खड़े हो जाएँगे कि उसे उस लड़की ने ठुकरा दिया था? क्या लड़की पर एसिड फेंकने वाले के माँ-बाप यह कह देंगे कि उनके बेटे के गुलाब को लड़की ने फेंक दिया था? बलात्कारी एक फ़्रस्ट्रेटेड व्यक्ति था, और उसके हेडमास्टर बाप ने कहा है कि उसे भी उसके बेटे से अलग रहने का गम है क्योंकि वो जेल में है? क्या ये भी ख़बर का नया एंगल है?

ऐसी हर बेहयाई के केन्द्र में ये यूजूअल सस्पैक्ट्स आते हैं, भारतीय पत्रकारिता के समुदाय विशेष, गिद्धों का गिरोह जिसे जवानों के बलिदान की चिंता नहीं, उन्हें नया और अलग एंगल चाहिए कि बाकी लोग जवानों के परिवार से मिल रहे हैं, हम आतंकियों के घरवालों से मिल लेते हैं! उसके बाद क्या? उसके बाद यह कहना कि दोनों के माँ-बाप एक ही तरह के दुःख से गुजर रहे हैं? 

ऐसे संवेदनहीन रिपोर्ट और इस तरह की सोच बताती है कि ये लोग सिर्फ पत्रकारिता नहीं कर रहे, ये आतंकियों की विचारधारा के लिए मल्टीप्लायर हैं, ये उनकी बातों को, उनके जिहादी विचारों को सूक्ष्म स्तर पर, सहज तरीके से वैसे लोगों तक पहुँचाते हैं जो इन्हें पढ़ने के बाद धीरे-धीरे अपने देश की उसी सेना पर सवाल करने लगते हैं जिनकी वजह से जिहाद का ज़हर उनकी सोसायटी और शहर तक नहीं पहुँचा है। 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारतीhttp://www.ajeetbharti.com
सम्पादक (ऑपइंडिया) | लेखक (बकर पुराण, घर वापसी, There Will Be No Love)

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

शिवलिंग पर कंडोम: अभिनेत्री सायानी घोष को नेटिजन्स ने लताड़ा, ‘अकाउंट हैक’ थ्योरी का कर दिया पर्दाफाश

अभिनेत्री सायानी घोष ने एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें एक महिला पवित्र हिंदू प्रतीक शिवलिंग के ऊपर कंडोम डालते हुए दिख रही थी।

‘आइए, हम सब वानर और गिलहरी बन अयोध्या के राम मंदिर के लिए योगदान दें, मैंने कर दी शुरुआत’: अक्षय कुमार की अपील

अक्षय कुमार ने बड़ी जानकारी दी कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए अपना योगदान दे दिया है और उम्मीद जताई कि और लोग इससे जुड़ेंगे।

निधि राजदान के ‘प्रोफेसरी’ वाले दावे से 2 महीने पहले ही हार्वर्ड ने नियुक्तियों पर लगा दी थी रोक

हार्वर्ड प्रकरण में निधि राजदान ने ब्लॉग लिखकर कई सारे सवालों के जवाब दिए हैं। इनसे कई सारे सवाल खड़े हो गए हैं।

कटवा विधायक ने लगवाया टीका, भतार MLA भी उसी लाइन पर: TMC नेताओं में वैक्सीन के लिए मची होड़

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेताओं में कोरोना वायरस की वैक्सीन लेने की होड़ सी मच गई है। पार्टी के दो विधायकों ने लगवाया टीका।

एक साथ 8 ट्रेनें, सब से पहुँच सकेंगे सरदार पटेल की सबसे ऊँची मूर्ति तक: केवड़िया होगा देश का पहला ‘ग्रीन बिल्डिंग’ स्टेशन

इस रेल कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ स्टेचू ऑफ़ यूनिटी देखने के लिए आने वाले पर्यटकों को मिलेगा। इसके अलावा इस कनेक्टिविटी से केवड़िया में...

फहद अहमद अब बना ‘किसान नेता’, पहले था CAA विरोधी छात्र नेता: स्वरा-मंडली संग करता है काम, AMU में मिली थी ‘ट्रेनिंग’

मुंबई के TISS में Ph.D कर रहा एक छात्र नेता है फहद अहमद, जो CAA विरोधी प्रदर्शनकारी हुआ करता था, अब वो 'किसान नेता' बन गया है।

प्रचलित ख़बरें

निधि राजदान की ‘प्रोफेसरी’ से संस्थानों ने भी झाड़ा पल्ला, हार्वर्ड ने कहा- हमारे यहाँ जर्नलिज्म डिपार्टमेंट नहीं

निधि राजदान द्वारा खुद को 'फिशिंग अटैक' का शिकार बताने के बाद हार्वर्ड ने कहा है कि उसके कैम्पस में न तो पत्रकारिता का कोई विभाग और न ही कोई कॉलेज है।

‘अगर तलोजा वापस गए तो मुझे मार डालेंगे, अर्नब का नाम लेने तक वे कर रहे हैं किसी को टॉर्चर के लिए भुगतान’: पूर्व...

पत्नी समरजनी कहती हैं कि पार्थो ने पुकारा, "मुझे छोड़कर मत जाओ... अगर वे मुझे तलोजा जेल वापस ले जाते हैं, तो वे मुझे मार डालेंगे। वे कहेंगे कि सब कुछ ठीक है और मुझे वापस ले जाएँगे और मार डालेंगे।”

प्राइवेट वीडियो, किसी और से शादी तक नहीं करने दी… सदमे से माँ की मौत: महाराष्ट्र के मंत्री पर गंभीर आरोप

“धनंजय मुंडे की वजह से मेरी ज़िंदगी और करियर दोनों बर्बाद हो गए। उसने मुझे किसी और से शादी तक नहीं करने दी। जब मेरी माँ को..."

अब्बू करते हैं गंदा काम… मना करने पर चुभाते हैं सेफ्टी पिन: बच्चियों ने रो-रोकर माँ को सुनाई आपबीती, शिकायत दर्ज

माँ कहती हैं कि उन्होंने इस संबंध में अपने शौहर से बात की थी लेकिन जवाब में उसने कहा कि अगर ये सब किसी को पता चली तो वह जान से मार देगा।

मारपीट से रोका तो शाहबाज अंसारी ने भीम आर्मी के नेता रंजीत पासवान को चाकुओं से गोदा, मौत

शाहबाज अंसारी ने भीम आर्मी नेता रंजीत पासवान की चाकू घोंप कर हत्या कर दी, जिसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपित के घर को जला दिया।

मंच पर माँ सरस्वती की तस्वीर से भड़का मराठी कवि, हटाई नहीं तो ठुकराया अवॉर्ड

मराठी कवि यशवंत मनोहर का कहना था कि उन्होंने सम्मान समारोह के मंच पर रखी गई सरस्वती की तस्वीर पर आपत्ति जताई थी। फिर भी तस्वीर नहीं हटाई गई थी इसलिए उन्होंने पुरस्कार लेने से मना कर दिया।

आतंकियों की तलाश में दिल्ली पुलिस ने लगाए पोस्टर: 26 जनवरी पर हमले की फिराक में खालिस्तानी-अलकायदा आतंकी

26 जनवरी पर हमले के अलर्ट के बीच दिल्ली पुलिस ने खालिस्तानी आतंकियों की तलाश में पोस्टर लगाए हैं।

‘मैं सभी को मार दूँगा, अल्लाहु अकबर’: जर्मन एयरपोर्ट पर मचाई अफरातफरी

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर मास्क न पहनने की वजह से टोके जाने पर एक शख्स ने 'अल्लाहु अकबर' का नारा लगाते हुए जान से मारने की धमकी दी।

शिवलिंग पर कंडोम: अभिनेत्री सायानी घोष को नेटिजन्स ने लताड़ा, ‘अकाउंट हैक’ थ्योरी का कर दिया पर्दाफाश

अभिनेत्री सायानी घोष ने एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें एक महिला पवित्र हिंदू प्रतीक शिवलिंग के ऊपर कंडोम डालते हुए दिख रही थी।

‘भूखमरी वाले देश में राम मंदिर 10 साल बाद नहीं बन सकता?’: अक्षय पर पिल पड़े लिबरल्स

आनंद कोयारी नामक यूजर ने उन्हें अस्पतालों और स्कूलों के लिए चंदा इकट्ठा करने की सलाह दे दी और दावा किया कि कोरोना काल में एक भी मंदिर काम नहीं आया।

Coca-Cola ने लॉन्च किए ‘किसान एकता’ लिखे बोतल: सोशल मीडिया पर वायरल दावे का फैक्टचेक

'किसान आंदोलन' के समर्थन में स्वदेशी कंपनियों को बदनाम किया जा रहा है और विदेशी कंपनियों को देवता बताया जा रहा है। इसी क्रम में ये दावा भी वायरल हुआ।

‘आइए, हम सब वानर और गिलहरी बन अयोध्या के राम मंदिर के लिए योगदान दें, मैंने कर दी शुरुआत’: अक्षय कुमार की अपील

अक्षय कुमार ने बड़ी जानकारी दी कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए अपना योगदान दे दिया है और उम्मीद जताई कि और लोग इससे जुड़ेंगे।

निधि राजदान के ‘प्रोफेसरी’ वाले दावे से 2 महीने पहले ही हार्वर्ड ने नियुक्तियों पर लगा दी थी रोक

हार्वर्ड प्रकरण में निधि राजदान ने ब्लॉग लिखकर कई सारे सवालों के जवाब दिए हैं। इनसे कई सारे सवाल खड़े हो गए हैं।

लड़कियों के नंबर चुरा कर उन्हें अश्लील फोटो-वीडियो भेजता था मिस्त्री तस्लीम, UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

तस्लीम पर आरोप है कि वह व्हाट्सएप ग्रुप में लड़कियों के अश्लील वीडियो और तस्वीरें भेजता था, जिसके चलते पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर...

आजम खान को तगड़ा झटका, जौहर यूनिवर्सिटी की 70 हेक्टेयर जमीन यूपी सरकार के नाम होगी

जौहर यूनिवर्सिटी की 70.05 हेक्टेयर जमीन उत्‍तर प्रदेश सरकार के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया है। आजम खान यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं।

‘अडानी सभी बैंकों को खरीद सकता है’ – सुब्रमण्यम स्वामी के आरोपों पर कंपनी ने बता डाला 30 साल का रिकॉर्ड

सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर के ज़रिए अडानी ग्रुप पर आरोप लगाते हुए कहा था कि ग्रुप ने 4.5 लाख करोड़ का लोन नहीं चुकाया है जो...

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
381,000SubscribersSubscribe