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8 साल में 3000 किमी+ के एक्सप्रेस-वे, 7 चालू और दर्जन भर निर्माणाधीन: योगी सरकार ने UP को रफ्तार की पटरी पर दौड़ाया

यूपी की सड़कें विकास को रफ्तार दे रही हैं। एसपी और बीएसपी के 15 साल के शासन काल में डेढ़ एक्सप्रेस-वे का निर्माण हुआ, जबकि योगी सरकार में 7 एक्सप्रेस वे चालू हैं और कुल 22 का खाका सीएम खीच चुके हैं। इसका सीधा संबंध आर्थिक तरक्की और रोजगार से है। उद्योगों, व्यवसाय और विकास को दूर दराज गाँव और कस्बों तक पहुँचाना, ताकि राज्य आगे बढ़े

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से जुड़ा किस्सा सुनाते हुए बताया है कि किस तरह अखिलेश यादव की सरकार के दौरान बिना जमीन अधिग्रहण के ही टेंडर दे दिए गए थे। इस एक्सप्रेस वे के लिए अखिलेश सरकार में ₹15,200 करोड़ का DPR बनाया गया। वहीं, योगी सरकार आने के बाद एक्सप्रेस वे की चौड़ाई बढ़ी और टेंडर की कीमत भी घटकर ₹11,800 करोड़ रह गई।

सीएम योगी द्वारा बताई गई यह कहानी सिर्फ एक एक्सप्रेस वे बनने की नहीं है बल्कि उस कड़ी का एक हिस्सा है जिसके तहत एक्सप्रेस वे का एक नेटवर्क बनाकर पूरे UP को जोड़ा जा रहा है। योगी सरकार ने मात्र 8 साल में 3000 किमी से अधिक एक्सप्रेस-वे बनाए हैं और UP सबसे अधिक एक्सप्रेस वे वाला राज्य बन गया है। UP में 7 एक्सप्रेस-वे बन गए हैं और करीब एक दर्जन पर काम चल रहा है कुछ में करीब-करीब आखिरी चरण में पहुँच गया है। इतना ही नहीं 7 एक्सप्रेस वे जोड़ने की परियोजना भी शुरू की गई है ताकि उत्तर से दक्षिण तक सीधी कनेक्टिविटी हो।

देश में सबसे ज्यादा एक्सप्रेस-वे वाला राज्य

उत्तर प्रदेश जल्द ही भारत का ऐसा पहला राज्य बन जाएगा, जहाँ 22 एक्सप्रेस वे होंगे। फिलहाल राज्य में 7 एक्सप्रेस वे चल रहे हैं। इनमें आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे और ग्रेटर नोएडा-आगरा एक्सप्रेस वे को छोड़कर बाकी सबका निर्माण योगी काल में हुआ है या हो रहा है। गंगा एक्सप्रेस वे मेरठ से प्रयागराज को जोड़ रहा है, जो सबसे लंबा है। यमुना एक्सप्रेस वे का विस्तार अभी जारी है। यह जेवर को जोड़ता है, जहाँ इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है।

3 एक्सप्रेस वे का शिलान्यास हो चुका है, जिस पर काम चल रहा है। इसके अलावा 12 नए एक्सप्रेस वे विकसित करने की योजना है, यानी राज्य में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। 12 नए एक्सप्रेस वे में जो चालू होने हैं उनमें गंगा एक्सप्रेस वे , नोएडा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, विंध्य एक्सप्रेस वे और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस वे शामिल हैं।

इनके माध्यम से छोटे कस्बों और दूर दराज के इलाकों को जोड़ा जा रहा है ताकि विकास को रफ्तार के साथ आखिरी छोर तक पहुँचाया जा सके और राज्य को आर्थिक प्रगति को ‘रास्ता’ दिखाया जा सके। उद्योग-व्यापार और सप्लाई चेन को बढ़ावा मिल सके। इससे राज्य में निवेश आए और रोजगार के नए अवसर पैदा हों।

गंगा एक्सप्रेस वे समेत 12 के निर्माण का प्रस्ताव

12 नए एक्सप्रेस वे में जो प्रस्तावित हैं उनमें गंगा एक्सप्रेस वे, नोएडा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, विंध्य एक्सप्रेस वे, और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस वे शामिल हैं, जो प्रदेश को 22 एक्सप्रेस वे वाला देश का प्रमुख राज्य बना देंगे।

  • गंगा एक्सप्रेस वे राज्य में निर्माणाधीन सबसे लंबा हाईवे है। मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाली 6 लेन वाली सड़क का काम करीब करीब पूरा हो गया है। 594 किमी का ये हाईवे 2026 में औपचारिक तौर पर शुरू हो जाएगा। पूर्वी यूपी से पश्चिम को इसके माध्यम से जोड़ा जा रहा है, ताकि आवाजाही आसान हो सके।
  • लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस वे लखनऊ और कानपुर को जोड़ेगा। यब 63 किलोमीटर का होगा, जिसे पूरा करने में मात्र 45 मिनट लगेंगे। व्यावसायिक दृष्टिकोण से ये फायदेमंद होगा।
  • अलीगढ़ संभल हाईवे का निर्माण अलीगढ़ से संभल को जोड़ने के लिए किया जा रहा है। ये सड़क एनएच 32 और एनएच 509 को जोड़ेगी।
  • गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे 91 किलोमीटर का लंबा लिंक रोड़ बन रहा है जो फिलहाल 4 लेन का है लेकिन भविष्य में इसे 6 लेन का बनाया जाएगा। इससे गोरखपुर आजमगढ़, अंबेडकर नगर और संत कबीर नगर जैसे जिले कनेक्ट होंगे। विंध्य एक्सप्रेस वे का निर्माण वाराणसी से सोनभद्र को जोड़ने के लिए किया गया है यह गंगा एक्सप्रेस वे से भी जुड़ेगी।

7 एक्सप्रेस-वे को जोड़ने वाला प्रोजेक्ट

राज्य में बरेली से आगरा, झाँसी, ललितपुर कॉरिडोर बनाने को योगी सरकार ने मंजूरी दी है। 547 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर से 7 एक्सप्रेस-वे जुड़ेंगे। इस पर 7000 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। प्रस्तावित कॉरिडोर सिर्फ एक नई सड़क परियोजना नहीं बल्कि प्रदेश के एक्सप्रेस वे नेटवर्क को ‘ग्रिड मॉडल’ में जोड़ने की रणनीति का केंद्र है। ये 6 सड़कों वाला एक्सप्रेस वे होगा, जो नेपाल के बॉर्डर के पास तक जाएगा।

ये प्रोजेक्ट इसलिए भी अहम है क्योंकि राज्य के ज्यादातर एक्सप्रेस-वे और हाईवे पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में हैं। ये तराई क्षेत्रों को कवर नहीं करते और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे छोड़ कर यहाँ हाई स्पीड रोड नहीं है। ऐसे में नॉर्थ साउथ कॉरिडोर पूरा होने से राज्य की तस्वीर बदल जाएगी। नेपाल से मध्यप्रदेश तक और पूर्वांचल से बुंदेलखंड तक इससे जुड़ जाएगा।

यूपी में जो 7 एक्सप्रेस वे चल रहे हैं उनमें यमुना एक्सप्रेस वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे शामिल हैं।

यमुना एक्सप्रेस वे– यह एक्सप्रेस वे ग्रेटर नोएडा से आगरा तक जाता है। यह 165.5 किमी लंबा है। यह 8 लेन वाले कंक्रीट निर्मित हाई-स्पीड कॉरिडोर है। यह नोएडा-आगरा के बीच यात्रा समय को 2-3 घंटे कम करता है।

आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे– यह देश का पहला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे है। इसकी लंबाई 302 किलोमीटर है। 2016-2017 में बनकर तैयार हुआ था। यह 6-लेन का एक्सप्रेस वे आगरा और लखनऊ को जोड़ता है और इसका उद्देश्य यात्रा समय को कम करना है।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे– 96 किमी लंबा, 14-लेन वाला दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे भारत के सबसे चौड़े मार्ग में से एक है। यह दिल्ली के निजामुद्दीन पुल को मेरठ के परतापुर को जोड़ता है। यह यात्रा के समय को 2-3 घंटे से घटाकर मात्र 45-60 मिनट कर देता है।

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे- ये लखनऊ से गाजीपुर तक 341 किलोमीटर तक लंबा है। 6 लेन वाले इस एक्सप्रेस वे पर सुल्तानपुर में 3.2 किलोमीटर की हवाई पट्टी भी है, इससे 3.5-4 घंटे में गाजीपुर से लखनऊ तक की दूरी पूरी की जा सकती है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे– यह चित्रकूट से इटावा तक जाता है, जिसकी लंबाई 296 किलोमीटर है। यह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे से भी जुड़ा हुआ है।

नोएडा- ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे- नोएडा के महामाया फ्लाईओवर को ग्रेटर नोएडा के परी चौक से जोड़ने वाला एक 6-लेन हाईवे है। यह बेहतर कनेक्टिविटी के लिए जाना जाता है।

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे– गोरखपुर से आजमगढ़ तक 4-लेन एक्सप्रेस वे है, जो गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के माध्यम से लखनऊ और दिल्ली से जोड़ता है। यह ₹7283 करोड़ से अधिक की लागत से बना है।

अखिलेश यादव के शासनकाल में खर्च ज्यादा, काम कम

अखिलेश यादव कहते रहे हैं कि उनके द्वारा शुरू किए गए योजनाओं से ‘समाजवादी’ शब्द हटाकर योगी सरकार ने इसे अपना नाम दे दिया। उनकी सरकार में 22 दिसंबर 2016 को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का शिलान्यास हुआ था। अखिलेश यादव का कहना है कि योगी सरकार ने इसे लटकाया, बल्कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निरस्त कर दिया। उनके झूठ की पोल उस वक्त खुल गई जब विधानसभा में सीएम योगी ने तथ्यों के साथ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की जानकारी दी।

इस आधी-अधूरी परियोजना में जमीन का अधिग्रहण किए बगैर टेंडर जारी कर दिए गए थे। जबकि नियम है कि जब तक एक्सप्रेस-वे के लिए 80 फीसदी जमीन का अधिग्रहण नहीं हो जाता, टेंडर जारी नहीं किए जाते हैं। 2016 में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की चौड़ाई 110 मीटर और 390 किमी लंबा बनना था।

प्रोजेक्ट की लागत ₹15,200 करोड़ बताई गई। लेकिन जब 2019 में योगी सरकार ने इस प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाया तो इसकी चौड़ाई 120 मीटर हो गई और प्रोजेक्ट का खर्च भी घट कर ₹11,800 करोड़ हो गया। यानी राज्य को ₹3400 करोड़ रुपए की बचत हुई। इतना ही नहीं सड़क की चौड़ाई भी 10 मीटर बढ़ाई गई। सीएम योगी कहते हैं कि कोई भी प्रोजेक्ट किसी भी सरकार ने शुरू किया हो, इससे फर्क नहीं पड़ता। जो राज्य के हित में है, उसे पूरा किया जाना चाहिए।

लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे बनने के दौरान हुए करप्शन- बीजेपी

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे, जिसका फोटो सोशल मीडिया पर डालकर अखिलेश यादव अपने शासन के दौरान ‘विकास’ को दर्शाते हैं, उस प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। एक्सप्रेस- वे के बनने से पहले किसानों से जमीन कौड़ियों के भाव खरीदकर एसपी नेताओं और उनके परिजनों ने सरकार को प्रोजेक्ट के लिए ये जमीनें बेची। इस दौरान जमकर मुनाफा कमाया गया। यहाँ तक कि आगरा के तत्कालीन डीएम जुहैर बिन सगीर पर आरोप लगा कि उन्होंने एक्सप्रेस वे बनने से पहले अपने रिश्तेदारों को एक्सप्रेस वे वाली जमीन खरीदवाई और फिर मुनाफा कमा कर सरकार को बेच दिया। डीएम जुहैर को अखिलेश यादव का चहेता कहा जाता था। एक्सप्रेस-वे के लिए न केवल जमीन अधिक दाम पर खरीदी गई बल्कि चहेतों को अलग-अलग ठेके भी दिए गए।

अखिलेश यादव ने फैलाया झूठ

अखिलेश यादव एक्सप्रेस वे को लेकर बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे की ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर कहा था कि ‘व्यवस्था’ किसी एडवांस मैनेजमेंट सिस्टम से नहीं, सही नीयत से शासन-प्रशासन चलाने से सुधरती है। अखिलेश यादव मात्र डेढ़ एक्सप्रेस वे बना पाए, उसको लेकर भी कई आरोप लगे। पूर्वांचल का आधा काम भी पूरा नहीं हुआ और योगी सरकार ने कम खर्च पर उससे अच्छा और चौड़ा एक्सप्रेस वे बना कर उनको जवाब भी दे दिया।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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