अलीगढ़ नहीं हरिगढ़ कहिए जनाब! योगी सरकार से की गई नाम बदलने की माँग

2015 में विश्व हिन्दू परिषद ने अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ करने की माँग की थी। बीते साल जब आजमगढ़ का नाम आर्यमगढ़ करने का प्रस्ताव योगी सरकार तैयार कर रही थी, तब सांसद सतीश गौतम और शहर विधायक संजीव राजा ने अलीगढ़ को हरिगढ़ करने की माँग की थी।

बीते दिनों खबर आई थी कि उत्तर प्रदेश की सरकार आगरा का नाम बदलकर अग्रवन करना चाहती है। इस संबंध में सरकार की ओर से ऐतिहासिक प्रमाण मॉंगे गए हैं। अब अलीगढ़ का नाम बदलने की भी मॉंग उठने लगी है। योगी सरकार से अलीगढ़ का नाम बदलकर ‘हरिगढ़’ करने की मॉंग भाजपा के स्थानीय नेताओं ने किया है। अलीगढ़ का नाम बदलने की पहल तब भी हुई थी जब कल्याण सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। लेकिन, उस समय केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार होने के कारण यह मुमकिन नहीं हो पाया था।

भाजपा की महानगर उपाध्यक्ष सुबोध स्वीटी ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह ने 1992 में मुख्यमंत्री रहते हुए शहर का नाम हरिगढ़ करने कोशिश की थी लेकिन उस वक्त केंद्र में कॉन्ग्रेस सरकार थी, इसलिए उनकी कोशिशें कामयाब नहीं हुईं।

उल्लेखनीय है कि साल 2015 में विश्व हिन्दू परिषद ने अलीगढ़ में एक प्रदेशव्यापी बैठक में प्रस्ताव पास कर शहर का नाम हरिगढ़ करने की माँग की थी। बीते साल जब आजमगढ़ का नाम आर्यमगढ़ करने का प्रस्ताव योगी सरकार तैयार कर रही थी, तब सांसद सतीश गौतम और शहर विधायक संजीव राजा ने शासन स्तर पर अलीगढ़ को हरिगढ़ करने की माँग की थी।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

सांसद सतीश गौतम ने बताया कि पूर्व में भी अलीगढ़ को उसका प्राचीन नाम हरिगढ़ दिलाने की माँग अरसे से उठाई जा रही है। शासन स्तर पर भी इससे अवगत कराया गया है। वहीं, विधायक संजीव राजा ने कहा, पुरातन समय से हरिगढ़ नाम से ही शहर को जाना जाता था, लेकिन मुगलकाल में इसे अलीगढ़ कर दिया गया। पुराना स्वरुप वापिस लौटने का समय आ गया है।

बीते दिनों आम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरविंद कुमार दीक्षित ने बताया था कि उन्हें शासन की ओर से आगरा का नाम अग्रवन करने के संबंध में पत्र मिला है। पत्र में उससे जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्य के बारे में पूछा गया है। विश्वविद्यालय ने इस संबंध में शोध के लिए टीम बना दी है।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

बरखा दत्त
मीडिया गिरोह ऐसे आंदोलनों की तलाश में रहता है, जहाँ अपना कुछ दाँव पर न लगे और मलाई काटने को खूब मिले। बरखा दत्त का ट्वीट इसकी प्रतिध्वनि है। यूॅं ही नहीं कहते- तू चल मैं आता हूँ, चुपड़ी रोटी खाता हूँ, ठण्डा पानी पीता हूँ, हरी डाल पर बैठा हूँ।

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

118,018फैंसलाइक करें
26,176फॉलोवर्सफॉलो करें
126,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: