Wednesday, July 24, 2024
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दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा से भी पास, बोले अमित शाह- नागपुर तो भारत में ही है, आप चीन से इशारा लेते हैं

"कॉन्ग्रेस को लोकतंत्र पर बोलने का अधिकार नहीं है। आपने देश को इमरजेंसी दी थी। AAP का जन्म कॉन्ग्रेस को गाली देकर हुआ। खड़गे साहब आप जिस गठबंधन को बचाने के लिए इस बिल का विरोध कर रहे हैं, सदन के बाद केजरीवाल साहब आप से मुँह मोड़ लेंगे।"

दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा से भी पास हो गया है। सोमवार (7 अगस्त 2023) की रात संसद के उच्च सदन में 131 मत केंद्र सरकार के इस बिल के पक्ष में पड़े। वहीं विरोध में 102 वोट पड़े। लोकसभा में यह बिल पहले ही पास हो चुका है। अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही कानून बन जाएगा।

इससे पहले सदन में बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक व्यवस्था ठीक करने लिए लाया गया है। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि इस बिल से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हम पर नागपुर से इशारा लेने का आरोप लगता है। मैं आपकी बात मान लेता हूं। लेकिन नागपुर तो भारत का हिस्सा है। रूस या चीन नहीं है। आप रूस और चीन से इशारा लेते हैं।

बता दें कि राज्यसभा में सोमवार को केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली सर्विस बिल पेश किया। दिनभर के बहस के बाद गृह मंत्री जवाब देने आए तो उन्होंने विपक्ष को चैलेंज दिया कि इस बिल को गिराकर दिखाओ। उन्होंने कहा- 8 से 10 अगस्त तक लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी है, इसलिए विपक्ष मणिपुर पर 11 अगस्त को चर्चा करे।

उन्होंने कहा कि यह बिल पूर्व की तरह प्रधानमंत्रियों की सदस्यता बचाने नहीं लाए। इमरजेंसी लगाने के लिए नहीं लाया गया है। गृहमंत्री शाह के यह कहते ही कॉन्ग्रेस के सांसद भड़क गए। इस पर अमित शाह ने कहा, “कॉन्ग्रेस को लोकतंत्र पर बोलने का अधिकार नहीं है। आपने देश को इमरजेंसी दी थी। AAP का जन्म कॉन्ग्रेस को गाली देकर हुआ। खड़गे साहब आप जिस गठबंधन को बचाने के लिए इस बिल का विरोध कर रहे हैं, सदन के बाद केजरीवाल साहब आप से मुँह मोड़ लेंगे।”

दिल्ली अध्यादेश से जुड़े बिल पर अमित शाह का जवाब

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ”आज जो बिल लेकर मैं इस महान सदन के सामने उपस्थित हुआ हूँ, उस बिल की चर्चा में डॉक्टर अभिषेक मनु सिंघवी से लेकर अठावले जी तक 34 सम्माननीय सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे। इसकी चर्चा के समय सभी ने अपनी-अपनी समझ के हिसाब से पक्ष और विपक्ष दोनों ने विचार रखे। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से पूरे सदन को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि बिल का उद्देश्य केवल और केवल दिल्ली में सुचारू रूप से भ्रष्टाचार विहीन और लोकाभिमुख शासन हो, वो है।”

उन्होंने कहा, ”अब किसी को भ्रष्टाचार विहीन और लोकाभिमुख शासन में विरोध है तो इसका तो मेरे पास कोई जवाब नहीं है, मगर मैं इतना जरूर आश्वस्त करना चाहता हूँ कि बिल के एक भी प्रावधान से पहले जो व्यवस्था थी, जब इस देश में कॉन्ग्रेस की सरकार थी, उस व्यवस्था में किंचित मात्र भी परिवर्तन नहीं हो रहा है।”

क्यों लाया गया बिल

गृह मंत्री ने कहा, ”मैं जो बिल लेकर आज उपस्थित हुआ हूँ वो महामहिम राष्ट्रपति जी के 19 मई 2023 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सेवाओं के प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े अध्यादेश, जो उन्होंने प्रख्यापित किया था, उस अध्यादेश से बनी हुई व्यवस्था के स्थान पर विधि द्वारा बनी हुई व्यवस्था को प्रस्थापित करने के लिए बिल लाया हूँ. ये इसका मूल उद्देश्य है।” 

गृह मंत्री शाह ने आगे कहा, ”मैं दिल्ली की स्थिति को थोड़े शब्दों में जरूर सदन के सामने रखना चाहूँगा। दिल्ली कई मायनों में सभी राज्यों से अलग प्रदेश है क्योंकि यहाँ संसद भवन भी है, कई सारे इंस्टीट्यूशन का स्टेटस एंजॉय करने वाली संवैधानिक हस्तियाँ यहाँ विराजमान होती हैं, सुप्रीम कोर्ट, एंबेसीज यहाँ हैं और बार-बार दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष यहाँ पर चर्चा करने के लिए आते हैं. इसीलिए दिल्ली को यूनियन टेरिटरी बनाया गया है। स्टेट लिस्ट के मुद्दों पर यहाँ की सरकार को सीमित मात्रा में अधिकार दिए गए हैं।  दिल्ली एक असेंबली के साथ मगर सीमित अधिकारों के साथ यूनियन टेरिटरी है।  तो आगे जिसको भी दिल्ली में चुनाव लड़ना है, दिल्ली के एक कैरेक्टर को समझना चाहिए।”

‘देश का प्रधानमंत्री बनना है तो संसद का चुनाव लड़ना पड़ता है’

उन्होंने कहा, ”मैं जब पंचायत का चुनाव लड़ता हूँ और पार्लियामेंट के अधिकारों की माँग करता हूँ तो ये संवैधानिक रूप से पूरे नहीं हो सकते हैं। हम जब चुनाव लड़ते हैं दिल्ली के एमएलए का या चीफ मिनिस्टर की दावेदारी करते हैं तब हमको मालूम होना चाहिए कि यूनियन टेरिटरीज, और सपना तो मुझे कोई भी आ सकता है, मगर चुनाव मैं जो लड़ता हूँ। इसके हिसाब से भी हो सकता है, स्वप्न पूरे हो सकते हैं। अगर देश का प्रधानमंत्री बनना है तो संसद का चुनाव लड़ना पड़ता है दिल्ली के एमएलए का चुनाव नहीं लड़ना पड़ता है।”

अमित शाह ने बताया दिल्ली का इतिहास

केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा, ”दिल्ली के शासन का इतिहास भी मैं जरा बताना चाहता हूँ। स्वतंत्रता पूर्व भी दिल्ली कई सालों से किसी न किसी प्रकार से देश की सत्ता का केंद्र रहा, राजधानी रहा। 1911 में दिल्ली तहसील और महरौली थाना इन दोनों को अलग करके राजधानी बनाया गया। बाद में वर्ष 1919 और 1935 के अधिनियमों में उस वक्त की ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली को चीफ कमिश्नर प्रोविंस माना. .स्वतंत्रता के समय जब संविधान बनने की प्रक्रिया हुई, उस वक्त दिल्ली के स्टेटस के बारे में पट्टाभि सीतारमैया और बाबा साहेब अंबेडकर की एक कमेटी बनी और ड्राफ्टिंग कमेटी ने दिल्ली की स्थिति को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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