Sunday, August 1, 2021
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‘शर्म आनी चाहिए 370 पर इतना बड़ा झूठ बोलते हुए…’: दिग्विजय सिंह को कश्मीरी एक्टिविस्ट डॉ अग्निशेखर ने लताड़ा

“दिग्विजय सिंह, मैं आपको चुनौती देता हूँ। आप मेरी किसी बात का खंडन करके दिखाइए। क्या कह रहे हैं आप! कितना मूर्ख बनाएँगे आप...पहले हमारी नजर में खुद को, देश की नजर में खुद को... आप एक भ्रामक प्रचारक हैं। एक कारखाना खोला हुआ है क्या आपने झूठ फैलाने का? आप झूठ के कारखानेदार हैं।”

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का क्लबहाउस चैट रूम में अनुच्छेद 370 पर दिया गया बयान अब सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है। इसमें उन्होंने एक जगह कहा है कि अनुच्छेद 370 में कश्मीरी पंडितों को आरक्षण दिया गया था।

अब कॉन्ग्रेसी नेता की इस बात को सुनकर कश्मीरी पंडितों के हक की लड़ाई लड़ने वाले डॉ अग्निशेखर ने प्रतिक्रिया दी है। अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने सिंह की आरक्षण वाली बात को निराधार बताया। साथ ही उन्हें एक भ्रामक प्रचारक भी कहा।

पिछले 32 साल से कश्मीरी पंडितों के हक में अपनी आवाज बुलंद करने वाले डॉ अग्निशेखर का ये बयान ‘youth 4 panunkashmir’ नाम के ट्विटर अकॉउंट से ट्वीट किया गया। ‘पनुन कश्मीर’ संयोजक, डॉ अग्निशेखर की वीडियो में वह दिग्विजय सिंह को करारा जवाब देते हुए कहते हैं,

दिग्विजय सिंह ने हालिया बयान में अनुच्छेद 370 (वीडियो में यहाँ गलती से ‘अनुच्छेद 370’ को ‘धारा 370’ कहा गया है, लेकिन वास्तविकता में जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा संविधान के अनुच्छेद-370 और 35-A से मिलता था, जिसको मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को निरस्त किया था) के हटाए जाने पर अपनी बात रखते हुए गलत बयानी की कि अनुच्छेद 370 के तहत कश्मीरी पंडितों को आरक्षण की सुविधा थी। यानी कश्मीरी पंडितों के लिए नौकरियों में एक रिजर्वेशन था जो अनुच्छेद 370 उनको देता था। उनका यह बयान बिना सिर पैर का है। गलत है, निराधार और भ्रामक है।”

वह आगे दिग्विजय सिंह को चुनौती देते हुए कहते हैं, “दिग्विजय सिंह, मैं आपको चुनौती देता हूँ। आप मेरी किसी बात का खंडन करके दिखाइए। क्या कह रहे हैं आप! कितना मूर्ख बनाएँगे आप…पहले हमारी नजर में खुद को, देश की नजर में खुद को… आप एक भ्रामक प्रचारक हैं। एक कारखाना खोला हुआ है क्या आपने झूठ फैलाने का? आप झूठ के कारखानेदार हैं

डॉ अग्रिशेखर अपनी बात रखते हुए दिग्विजय सिंह को कहते हैं, “इसी अनुच्छेद 370 के पीछे जो मुस्लिम सांप्रदायिकता की राजनीति थी जिसने अलगाववाद को जन्म दिया और जिसकी वजह से हमारा विस्थापन है, निर्वासन है। कौन सी स्थिति की रक्षा करती थी अनुच्छेद 370? किस कश्मीरियत की आप बात कर रहे हैं? कश्मीरियत जिनकी असली धरोहर है वह बाहर क्यों हैं? लाखों कश्मीर पंडितों को बेदखल किया गया। तब अनुच्छेद 370 हटी नहीं थी।”

सिंह के बयान पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट दिग्विजय सिंह से अपील करते हैं, “भ्रामक प्रचार मत करिए। अपने को मूर्ख और हास्यासपद मत बनाइए। मैं आपको चुनौतीपूर्ण ढंग से ये कहता हूँ कि कोई रिजर्वेशन नहीं था। हिम्मत है तो मेरी बात को काटिए। आपको जो राजनीति करनी है करिए। लेकिन आपको शर्म भी आनी चाहिए इतना भयंकर झूठ कहते हुए। ”

अपनी बात खत्म करते हुए डॉ अग्रनिशेखर ने दिग्विजय सिंह की निंदा की। साथ ही अपनी व तमाम कश्मीरी पंडितों की ओर कॉन्ग्रेसी नेता के बयान का खंडन कर इसे बिलकुल गलत बताया।

बता दें कि डॉ अग्निशेखर एक लेखक हैं, एक कवि हैं और सक्रिय कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट हैं। उन्होंने पिछले 32 सालों में निष्पक्ष तरह से कश्मीरी पंडितों के मुद्दों को उठाया। फिर चाहे कोई भी सरकार हो उन्होंने एक एक्टिविस्ट के तौर पर हमेशा अपने लोगों की घर वापसी का प्रयास किया।

दिग्विजय सिंह ने दिए कॉन्ग्रेस के साथ आर्टिकल 370 लौटने के संकेत

गौरतलब है कि पाकिस्तानी पत्रकार शाहजेब जिल्लानी से दिग्विजय सिंह की बातचीत की ऑडियो वायरल होने के बाद यह पता चल रहा है कि वह केंद्र से मोदी सरकार के जाने का इंतजार क्यों कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता ने ऑडियो में कहा है,

“जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाया गया, तब कश्मीर में लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं किया गया था। इस दौरान इंसानियत को ताक पर रखा गया और इसमें कश्मीरियत भी नहीं थी। सभी को काल कोठरी में बंद कर दिया गया था, क्योंकि मुस्लिम बहुल राज्य में एक हिंदू राजा था।” 

सिंह ने कहा, “दोनों ने साथ काम किया था। दरअसल, कश्मीर में सरकारी सेवाओं में कश्मीरी पंडितों को आरक्षण दिया गया था। इसलिए अनुच्छेद-370 को रद्द करना और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा कम करना अत्यंत दुखद निर्णय है। हमें निश्चित रूप से इस मुद्दे पर फिर से विचार करना होगा।”

दिग्विजय सिंह ने पाकिस्तानी पत्रकार से मोदी सरकार के अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के फैसले पर विचार करने का वादा किया। अनुच्छेद-370, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर को स्वतंत्रता के बाद भी शेष भारत से अलग रखा गया, जिसके दम पर कॉन्ग्रेस या अन्य सरकारों ने वहाँ तनावपूर्ण माहौल पैदा किया। घाटी में हिंदुओं का नरसंहार हुआ।

दिग्विजय सिंह कहते हैं कि वे कश्मीरी पंडित ही थे, जिन्हें नौकरियों में आरक्षण मिला। यानी इससे उनका मतलब था कि राज्य के मुसलमानों द्वारा घाटी के हिंदुओं के साथ अच्छा व्यवहार किया गया था? जबकि सच्चाई यह है कि मुस्लिम कट्टरपंथी और जिहादियों ने हिंदु महिलाओं के साथ बलात्कार, हत्या और कश्मीर में नरसंहार कर उन्हें भगा दिया ​था।

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