Saturday, September 18, 2021
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अगर BJP सत्ता में लौटी, तो अल्पसंख्यकों को जला दिया जाएगा: गोवा के पादरी ने उगला ‘जहर’

“मोदी ने गुजरात में हज़ारों मुस्लिमों को ज़िंदा जला दिया है, जिसमें संसद सदस्य भी शामिल हैं। उसने घर में आग लगा दी। पाँच महिलाओं सहित सभी को ज़िंदा जला दिया गया। यह मोदी और भाजपा है।”

धर्म की आड़ में राजनीति के माध्यम से चुनावों को प्रभावित करने का एक और मामला सामने आया है। गोवा के एक पादरी ने अपने अनुयायियों को सांप्रदायिक और घृणास्पद उपदेश जारी किया है। इसमें यह दावा किया गया है कि अगर भाजपा वापस सत्ता में आती है, तो गोवा में ईसाइयों को जला दिया जाएगा।

गोवा के एक चर्च में कोंकणी भाषा में पादरी द्वारा दिए गए एक उपदेश में, उसे भाजपा के ख़िलाफ़ लोगों को उकसाते हुए पाया गया। उसे यह कहते हुए सुना जा सकता है कि भाजपा के लोगों ने बच्चों पर पेट्रोल डाला और उन्हें ज़िंदा जला दिया।

पादरी ने डर के माध्यम से लोगों को भड़काते हुए दावा किया कि भविष्य में बच्चे और पोते भाजपा का समर्थन करने की भारी क़ीमत चुकाएँगे। “ईसाई बच्चों पर पेट्रोल डाला गया था और उन्हें जला दिया गया था। उनसे कहा गया कि वे यीशु का नाम लेना बंद करें। लेकिन बच्चे यीशु का नाम लेते रहे, तब भी जब उनकी त्वचा आग से पिघल गई। यह भाजपा है।”

पादरी ने अपनी भड़ास को जारी रखते हुए स्वतंत्र मीडिया को यह कहकर डरा दिया कि अधिकांश मीडिया ने भाजपा से पैसा लिया है। पादरी ने अमित शाह को ‘शैतान’ कहते हुए कहा, “जब वह गृह मंत्री थे, एक पादरी आए थे, उन्होंने बताया कि अमित शाह मुस्लिम नौजवानों को गिरफ़्तार करते थे और उन्हें गोली मार देते थे, और वे कहते थे, उन्हें गोली मार दी गई क्योंकि वे भाग रहे थे।”

पादरी ने कहा, “मोदी ने गुजरात में हज़ारों मुस्लिमों को ज़िंदा जला दिया है, जिसमें संसद सदस्य भी शामिल हैं। उसने घर में आग लगा दी। पाँच महिलाओं सहित सभी को ज़िंदा जला दिया गया। यह मोदी और भाजपा है।”

पादरी ने एक कथा का मंचन करते हुए झूठे प्रचार का सहारा लिया, जब उन्होंने कहा, “पुर्तगाली शासन के तहत 500 वर्षों के लिए, हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई शांति से रहते थे। बीजेपी ने इसे 5 वर्षों में नष्ट कर दिया।

इसके अलावा, उन्होंने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को बुरा-भला भी कहा, जिनका हाल ही में कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया।

उन्होंने कहा कि पर्रिकर ने फ्रांसिस जेवियर की छुट्टी को लेकर क़ानून में बदलाव किया और इसी दर्द से उनकी मौत हो गई।

कॉन्ग्रेस जैसे राजनीतिक दलों के माध्यम से ईसाई धार्मिक निकाय गोवा की राजनीति पर एक बड़ा प्रभाव डालते हैं। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने धर्म, जाति या भाषा के नाम पर वोट माँगने पर रोक लगा दी थी। हालाँकि, लगता है कि चर्च ने चुनावों में हस्तक्षेप करने के लिए एक आसान रास्ता खोजा है, जिसका ख़ूब लाभ उठाया जा रहा है। किसी विशेष उम्मीदवार या पार्टी के लिए ‘वोट’ माँगने के बजाय, चर्च ने लोगों को यह बताया कि किसे वोट नहीं देना है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब धार्मिक निकायों विशेषकर ईसाई निकायों ने ‘धर्मनिरपेक्ष’ राजनीतिक दलों की सहायता के लिए घृणा का सहारा लिया हो। पिछले साल, दिल्ली के आर्कडीओसीज़ के आर्कबिशप अनिल कॉटो ने भारत में कैथोलिकों को एक पत्र जारी किया था। पत्र, जिसे दिल्ली आर्कडीओसीज़ के तहत सभी पादरी इलाकों में पढ़ा गया था। इस पत्र में भारत के कैथोलिकों द्वारा 2019 में आगामी आम चुनावों के लिए उपवास और प्रार्थनाओं का अभियान शुरू करने का आह्वान किया गया था।

सिर्फ़ आम चुनाव ही नहीं बल्कि चर्च कई राज्यों के चुनावों के बारे में भी चिंतित रहा है। नागालैंड विधानसभा चुनाव से पहले, नागालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल ने विश्वासियों से त्रिशूल और क्रॉस के बीच चयन करने का आग्रह किया गया था। इसके अलावा आपको बता दें कि केवल त्रिशूल ही उनकी एकमात्र चिंता नहीं थी बल्कि योग को भी उन्होंने एक गहन हिन्दू अभ्यास कहा था और अपने विश्वासियों को इससे दूर रहने का आदेश दिया था। गोवा चुनावों से पहले, एक कैथोलिक पत्रिका ने राज्य में मतदाताओं से भाजपा को वोट न देने के लिए कहा और दावा किया कि देश संवैधानिक प्रलय का सामना कर रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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