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कर्नाटक में हिंदू से कन्वर्टेड लोगों को ईसाई जातियों में दिखाने का खेल कर रही कॉन्ग्रेस सरकार, राज्यपाल ने जताई आपत्ति: दिल्ली हाईकमान के पास दौड़े DK शिवकुमार

कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप है कि वह सर्वे के जरिए हिंदू समाज को तोड़ रही है। सर्वे में धर्मांतरित ईसाइयों को उनकी मूल हिंदू जाति जैसे 'ईसाई लिंगायत' या 'ईसाई वोक्कालिगा' के नाम से दर्ज किया जा रहा है।

कर्नाटक में प्रस्तावित जाति जनगणना को लेकर बवाल मचा हुआ है। कॉन्ग्रेस सरकार का सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण 22 सितंबर से शुरू होकर 7 अक्टूबर तक चलेगा। इसके लिए 1.75 लाख शिक्षकों को काम पर लगाया गया है और करीब 420 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। लेकिन जैसे-जैसे सर्वे की तारीख नजदीक आ रही है, विवाद बढ़ता जा रहा है। कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह इस सर्वे के जरिए हिंदू समाज को तोड़ने की कोशिश कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्वे में जातियों को लेकर बनाए गए कॉलम पर कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि कॉन्ग्रेस ने ऐसी व्यवस्था की है कि जिन हिंदुओं ने ईसाई धर्म अपना लिया है, उन्हें उनके मूल हिंदू जाति के नाम के साथ ‘क्रिश्चियन’ जोड़ा जा रहा है। जैसे, अगर कोई लिंगायत या वोक्कालिगा हिंदू ने ईसाई धर्म अपनाया है, तो उसे ‘ईसाई लिंगायत’ या ‘ईसाई वोक्कालिगा’ लिखा जा रहा है।

दरअसल कैबिनेट के कई मंत्रियों ने पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा तैयार किए गए जाति कॉलमों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह सूची जटिल है और समुदायों को समझाने में समय लगेगा कि किस कॉलम में सही जानकारी भरनी है।

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि सरकार ने 47 नई जातियाँ बना दी हैं, जिससे समाज में भ्रम फैल रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे सर्वे में अपने धर्म के कॉलम में सिर्फ ‘हिंदू’ ही लिखें। उनका मानना है कि इस तरह के नए नाम समाज को कमजोर करेंगे और आपसी एकता को तोड़ेंगे।

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी इस मामले में अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने 16 सितंबर को मुख्यमंत्री सिद्धरामैया को पत्र लिखकर कहा कि हिंदू जातियों के आगे ‘क्रिश्चियन’ जोड़ना गलत है, क्योंकि ईसाई धर्म में जातियाँ नहीं होतीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम समाज में अशांति पैदा कर सकता है और सामाजिक ढाँचे को नुकसान पहुँचा सकता है। उन्होंने सरकार से इस पर दोबारा विचार करने को कहा है।

उधर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सर्वे का बचाव किया है। उनका कहना है कि यह सर्वे लोगों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति जानने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि क्रिश्चियन और मुस्लिम भी भारतीय नागरिक हैं, और अगर किसी ने धर्म बदल लिया है, तो उनकी वर्तमान जाति ही दर्ज होगी। सिद्धरामैया ने भाजपा पर इस मुद्दे को राजनीति का हथियार बनाने का आरोप लगाया।

इस बीच, उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार दिल्ली जा रहे हैं, जहाँ वे कॉन्ग्रेस हाईकमान से मिलकर सर्वे को कुछ समय के लिए टालने की बात करेंगे। कुछ मंत्रियों का कहना है कि सर्वे की जाति सूची बहुत जटिल है और लोगों को समझाने में वक्त लगेगा।

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विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

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