Sunday, June 16, 2024
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लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन ने DMK को दिया ₹509 करोड़ का इलेक्टोरल बॉन्ड, मेगा इन्फ्रा ने दिए ₹105 करोड़: कुल रकम मिली ₹656.5 करोड़, बाकी सिर्फ ₹42.5 करोड़ में सिमटे?

इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए डीएमके को कुल 656.5 करोड़ का चंदा मिला है, जिसमें अकेले 509 करोड़ रुपए लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन ने दिया है।

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK को क्या लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन ही चलाता है? उसने DMK को मिले कुल चंदे का 77 प्रतिशत से ज्यादा अकेले ही दिया है। इलेक्टोरल बॉन्ड के सार्वजनिक किए जाने के बाद ये जानकारी सामने आई है। इस जानकारी के मुताबिक, इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए डीएमके को कुल 656.5 करोड़ का चंदा मिला है, जिसमें अकेले 509 करोड़ रुपए लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन ने दिया है। हैरानी की बात है कि 1368 करोड़ रुपए का चंदा देने वाली सैंटियागो मार्टिन की कंपनी फ्यूचर गेमिंग ने अपना 37 प्रतिशत चंदा सिर्फ डीएमके को ही दे दिया है।

डीएमके उन पार्टियों में से एक है, जिसने चुनाव आयोग को अपने डोनर्स की भी जानकारी दी है। साल 2019 से 2023 तक डीएमके को कुल 656.5 करोड़ रुपए इलेक्टोरल बॉन्ड किए जरिए मिले है। इसमें से दो ग्रुपों ने सबसे ज्यादा चंदा दिया है। एक है लॉटरी किंग कहे जाने वाले सैंटियागो मार्टिन की कंपनी फ्यूचर गेमिंग ने 509 करोड़ का चंदा दिया है। ये कंपनी मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर की ही है। वहीं मेगा इन्फ्रा ने 105 करोड़ रुपए के इलेक्टोरल बॉन्ड डीएमके को दिए हैं। ध्यान रहे कि ये आँकड़े साल 2023 तक के ही हैं, जो चुनाव आयोग ने सार्वजनिक किए हैं।

चेन्नई सीमेंट्स ने भी दिया चंदा

डीएमके को चंदा देने वालों में इंडिया सीमेंट्स ने भी चंदा दिया है। इंडिया सीमेंट्स ने डीएमके को 2019-20 में 10 करोड़ का चंदा दिया। तो 2021-22 में 4 करोड़ का चंदा दिया। इंडिया सीमेंट्स वही कंपनी है, जो आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स टीम की मालिक है। इंडिया सीमेंट्स द्वारा दी गई 14 करोड़ की राशि उसी 42.5 करोड़ रुपए में से हैं, जो बाकी की कंपनियों ने डीएमके को दिए हैं। इन तीनों कंपनियों के दिए चंदे को जोड़ दिया जाए तो 628 करोड़ की राशि इन्हीं कंपनियों ने दी है, जबकि बाकी की कंपनियों ने कुल मिलाकर 28.5 करोड़ की ही फंडिंग की। इसमें भी 10 करोड़ रुपए सन नेटवर्क ने दिए हैं, जो डीएमके से ही जुड़ी मानी जाती है।

डीएमके कोषाध्यक्ष टीआर बालू ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड योजना में दानदाताओं की जानकारी गुप्त रखे जाने का प्रावधान है, फिर भी डीएमके अपने दानदाताओं की जानकारी सार्वजनिक कर रही है। इस जानकारी के मुताबिक, डीएमके को अप्रैल 2019 और मार्च 2020 के बीच इंडिया सीमेंट्स, MEIL, रैमको सीमेंट्स, अपोलो ग्रुप, LMW कंपनी, बिड़ला ग्रुप, त्रिवेणी ग्रुप और IRB जैसे कॉरपोरेट्स से 45.50 करोड़ रुपये मिले।

अक्टूबर 2020 में पार्टी को दो कंपनियों- फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और MEIL से 80 करोड़ रुपये मिले। अप्रैल 2021 और जनवरी 2022 के बीच डीएमके को ईबी के माध्यम से सबसे अधिक दान प्राप्त हुआ – 306 करोड़ रुपये। अप्रैल 2023 से नवंबर 2023 तक पार्टी को 65 करोड़ रुपये और मिले। इस तरह से फ्यूचर गेमिंग ने 1368 करोड़ में से 509 करोड़ रुपए डीएमके को दिए हैं, जबकि 859 करोड़ रुपए अन्य को दिए हैं। अभी ये जानकारी सामने नहीं आ पाई है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चला है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कुल 6,986.5 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बांड भुनाए , जो 2019-20 में प्राप्त अधिकतम 2,555 करोड़ रुपए है। कॉन्ग्रेस को इलेक्टोरल बॉन्ड से 1,334.35 करोड़ रुपए मिले हैं लेकिन वो टीएमसी से पीछे है। बीजेपी के बाद सबसे ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड टीएमसी को मिला है, जिसकी कुल कीमत ​​1,397 करोड़ रुपए है। भारतीय राष्ट्र समिति (बीआरएस) चुनावी बांड के माध्यम से चौथे सबसे बड़े प्राप्तकर्ता के रूप में उभरी है, जिसने 1,322 करोड़ रुपए के बांड भुनाए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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