Tuesday, September 21, 2021
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सरकारी संपत्तियों को बेचने की योजना नहीं है NMP, ₹6 लाख करोड़ का आएगा निवेश: सुधरेंगे रेल से रोड तक के इंफ्रास्ट्रक्चर

सड़क और रेलवे सहित कई संस्थानों में सरकार के पास ऐसी संपत्तियाँ हैं, जिनका भरपूर उपयोग कर के कमाई नहीं की जा रही है। ऐसा आज से नहीं, दशकों से हो रहा है। अगर इन्हीं संपत्तियों पर निवेश जुटाए जाएँ और प्राइवेट सेक्टर के माध्यम से इन्हें कमाई का जरिया बनाया जाए तो जनता का भी फायदा होगा और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास भी।

केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline)’ को लॉन्च किया। ये केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण पाइपलाइन’ है। इस पाइपलाइन को नीति आयोग द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श से विकसित की गई है। ये केंद्रीय बजट 2021-22 के तहत ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण (Aggregate Monetisation)’ से जुड़े फैसले पर आधारित है।

इसका अर्थ ये हुआ कि सड़क और रेलवे सहित कई संस्थानों में सरकार के पास ऐसी संपत्तियाँ हैं, जिनका भरपूर उपयोग कर के कमाई नहीं की जा रही है। ऐसा आज से नहीं, दशकों से हो रहा है। अगर इन्हीं संपत्तियों पर निवेश जुटाए जाएँ और प्राइवेट सेक्टर के माध्यम से इन्हें कमाई का जरिया बनाया जाए तो जनता का भी फायदा होगा और सरकार की कमाई भी बढ़ेगी। इसीलिए, NMP सरकारी संपत्तियों का पूरा उपयोग कर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, जनता के फायदे और कमाई के लिए लाया गया है।

क्या है NMP?

NMP के तहत वित्तीय वर्ष 2022 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025 तक की चार साल की अवधि में केंद्र सरकार की मुख्‍य परिसंपत्तियों के जरिए 6 लाख करोड़ रुपए की कुल मुद्रीकरण (Monetisation) क्षमता का अनुमान लगाया गया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने पाइपलाइन को लॉन्च करते हुए कहा, “परिसंपत्ति मुद्रीकरण कार्यक्रम पीएम मोदी के विजन से ही सटीक स्वरूप ले पाया है, जो सदैव भारत के समस्‍त आम नागरिकों के लिए बेहतरीन और किफायती बुनियादी ढाँचागत सुविधाओं तक पहुँच में विश्वास करते हैं। मुद्रीकरण के माध्यम से सृजन के दर्शन पर आधारित परिसंपत्ति मुद्रीकरण का उद्देश्य नई बुनियादी ढाँचागत सुविधाओं या अवसंरचना के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र के निवेश का उपयोग करना है।”

यह रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए अत्‍यंत आवश्यक है जिससे आर्थिक विकास की गति को तेज करने के साथ-साथ जनहित के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को निर्बाध रूप से एकीकृत करना भी संभव हो सकेगा।” केंद्रीय वित्त मंत्री ने वर्तमान सरकार द्वारा बुनियादी ढाँचागत सुविधाओं के त्वरित विकास और निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लागू किए गए कई सुधारों और पहलों के बारे में भी जानकारी दी।

मुद्रीकरण का मतलब बेचना नहीं

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संस्थागत और दीर्घकालिक पूँजी का उपयोग करके सार्वजनिक क्षेत्र की मौजूदा (Brownfield) इंफ्रास्ट्रक्चर में निहित निवेश (Investment) के मूल्य को हासिल करना है, जिसे आगे सार्वजनिक निवेश के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे फायदा ये होगा कि निजीकरण (Privatisation) या औने-पौने मूल्‍यों पर परिसंपत्तियों को बेचने के बजाय व्‍यवस्थित अनुबंधात्‍मक साझेदारी के जरिए वित्त प्राप्त करने की योजना तैयार की गई है।

इसीलिए, ये आरोप गलत है कि सरकार इन सम्पत्तियों को बेच रही है। ‘Brownfield Infrastructure’ का अर्थ हुआ कि वो संपत्तियाँ, जो कई वर्षों से सरकार के हाथ में तो हैं लेकिन उसका भरपूर उपयोग नहीं हो पा रहा है। उपयोग हो भी रहा है तो उससे वित्त नहीं आ रहा। इसीलिए, इस इन्फ़्रास्ट्रक्टर के सही मूल्यों को हासिल करने के लिए प्राइवेट सेक्टर के साथ भागीदारी की जाएगी।

निजी निवेश हासिल करने के लिए चेन्नई, भोपाल, वाराणसी एंव वडोदरा सहित भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI) के करीब 25 हवाई अड्डे, 40 रेलवे स्टेशनों, 15 रेलवे स्टेडियम और कई रेलवे कॉलोनी की पहचान की गई है। इन्हें निजी क्षेत्र के निवेश से विकसित किया जाएगा।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन: क्या है ये?

एनएमपी का उद्देश्य सार्वजनिक परिसंपत्ति के मालिकों के लिए इस कार्यक्रम के सन्दर्भ में एक मध्यम-अवधि रोडमैप प्रदान करना है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र की परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग के लिए उनकी वर्तमान स्थिति तथा संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी गयी है। एनएमपी पर रिपोर्ट को दो खंडों में बाँटा गया है। खंड-I एक मार्गदर्शन पुस्तिका के रूप में है, जिसमें परिसंपत्ति मुद्रीकरण के वैचारिक दृष्टिकोण और संभावित मॉडल का विवरण दिया गया है। खंड-II में मुद्रीकरण के लिए वास्तविक रोडमैप दिया गया है, जिसमें केंद्र सरकार के तहत मुख्य अवसंरचना परिसंपत्तियों की पाइपलाइन शामिल है।

कैसा होगा इसका ढाँचा

पाइपलाइन को संबंधित मंत्रालयों और विभागों से इनपुट और परामर्श के आधार पर तैयार किया गया है, साथ ही उपलब्ध कुल परिसंपत्ति का आकलन भी किया गया है। विनिवेश के माध्यम से मुद्रीकरण और गैर-प्रमुख संपत्तियों के मुद्रीकरण को एनएमपी में शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा, वर्तमान में, केवल केंद्र सरकार के मंत्रालयों और अवसंरचना से जुड़े केन्द्रीय उपक्रमों (सीपीएसई) की परिसंपत्तियों को शामिल किया गया है। अभी राज्यों की परिसंपत्तियों के समन्वय और आकलन की प्रक्रिया चल रही है और इन्हें उचित समय पर  शामिल करने की परिकल्पना की गई है।

प्रमुख परिसंपत्ति के मुद्रीकरण के लिए तीन प्रमुख शर्तें हैं। इसमें जोखिम-रहित और ब्राउनफील्ड परिसंपत्तियों, जिनके पास आय के स्थाई स्रोत हैं और कारोबार राजस्व अधिकारों पर निर्भर है, का चयन शामिल है। इसीलिए, इन संरचनाओं के तहत परिसंपत्तियों का प्राथमिक स्वामित्व सरकार के पास बना रहता है तथा इसमें कारोबार समाप्ति के समय परिसंपत्तियों को सार्वजनिक प्राधिकरण को वापस सौंपने की परिकल्पना की गई है।

अनुमानित क्षमता

चार साल की अवधि यानी वित्त वर्ष 2022-25 के दौरान एनएमपी के अंतर्गत कुल संपत्ति का अनुमानित मूल्य 6 लाख करोड़ रुपये है। यह अनुमानित मूल्य केंद्र द्वारा एनआईपी के अंतर्गत प्रस्तावित परिव्यय (43 लाख करोड़ रुपये) का 14 प्रतिशत है। इसमें 12 से ज्यादा संबंधित मंत्रालय और 22 से ज्यादा संपत्ति श्रेणियां शामिल हैं। सेक्टरों में सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे, रेलवे, वेयरहाउसिंग, गैस और उत्पाद पाइपलाइन, बिजली उत्पादन व खनन, दूरसंचार, स्टेडियम, हॉस्पिटैलिटी और आवास शामिल हैं।

एनएमपी के अंतर्गत चिह्नित संपत्तियाँ और लेनदेन कई साधनों के माध्यम से कार्यान्वित होने का अनुमान है। इनमें सार्वजनिक निजी भागीदारी छूट जैसे प्रत्यक्ष अनुबंधित साधन और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इन्विट) जैसे पूंजी बाजार साधन आदि शामिल हैं। साधन का चयन सेक्टर, संपत्ति की प्रकृति, लेनदेन के समय (बाजार स्थितियों सहित), लक्षित निवेशक विवरण और परिचालन के स्तर/ संपत्ति के स्वामी द्वारा रखे जाने वाले निवेश नियंत्रण आदि के द्वारा तय किया जाएगा।

संपत्ति मुद्रीकरण प्रक्रिया के माध्यम से सार्वजनिक संपत्ति के स्वामी को अनुमानित रूप से मिलने वाला मूल्य, या तो अग्रिम स्रोत के रूप में हो सकता है या निजी क्षेत्र निवेश के रूप में मिल सकता है। एनएमपी के अंतर्गत तय संभावित मूल्य सामान्य नियमों पर आधारित सिर्फ एक उच्च स्तरीय अनुमान है। यह संबंधित क्षेत्र के लिए लागू और उपलब्ध बाजार या लागत या बहीखाते या उपक्रम मूल्य आदि जैसे विभिन्न दृष्टिकोणों पर आधारित हैं।

कार्यान्वयन और निगरानी व्यवस्था

एनएमपी के अंतर्गत चिह्नित संपत्तियां और लेनदेन कई साधनों के माध्यम से कार्यान्वित होने का अनुमान है। इनमें सार्वजनिक निजी भागीदारी छूट जैसे प्रत्यक्ष अनुबंधित साधन और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इन्विट) जैसे पूंजी बाजार साधन आदि शामिल हैं। साधन का चयन सेक्टर, संपत्ति की प्रकृति, लेनदेन के समय (बाजार स्थितियों सहित), लक्षित निवेशक विवरण और परिचालन के स्तर/ संपत्ति के स्वामी द्वारा रखे जाने वाले निवेश नियंत्रण आदि के द्वारा तय किया जाएगा।

संपत्ति मुद्रीकरण प्रक्रिया के माध्यम से सार्वजनिक संपत्ति के स्वामी को अनुमानित रूप से मिलने वाला मूल्य, या तो अग्रिम स्रोत के रूप में हो सकता है या निजी क्षेत्र निवेश के रूप में मिल सकता है। एनएमपी के अंतर्गत तय संभावित मूल्य सामान्य नियमों पर आधारित सिर्फ एक उच्च स्तरीय अनुमान है।

कार्यान्वयन और निगरानी व्यवस्था रणनीति के रूप में, संपत्ति आधार का बड़ा हिस्सा सरकार के पास रहेगा। इसीलिए, इसे ‘बेचना’ नहीं कहा जा सकता क्योंकि संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा तो अब भी सरकार के पास ही रहेगा। मुद्रीकरण को कुशलता के साथ और प्रभावी प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित करने के क्रम में सरकार द्वारा आवश्यक नीति और हस्तक्षेप के माध्यम से इस कार्यक्रम को समर्थन दिया जाएगा। इसमें संचालन के तौर-तरीकों को व्यवस्थित करना, निवेशक भागीदारी को प्रोत्साहन और व्यावसायिक क्षमता को सुगम बनाना आदि शामिल है।

संपत्ति मुद्रीकरण डैशबोर्ड के माध्यम से वास्तविक समय पर निगरानी को जल्द ही लागू कर दिया जाएगा, जैसा आम बजट 2021-22 में बताया गया था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ‘मुद्रीकरण के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण’ को संभव बनाना है, जिसमें क्षमता के लिहाज से अपने-अपने क्षेत्रों के बड़े सार्वजनिक और निजी क्षेत्र सहयोग करें। साथ ही इससे सामाजिक व आर्थिक विकास को भी संभव बनाया जा सकेगा और देश के नागरिकों की जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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