Homeराजनीतिनेहरू BJP के थे और जिन्ना RSS के, यही कह रहे हैं राहुल गाँधी

नेहरू BJP के थे और जिन्ना RSS के, यही कह रहे हैं राहुल गाँधी

इससे पहले राहुल गाँधी कुख्यात आतंकी मसूद अज़हर को, 'मसूद अज़हर जी' कहकर सेल्फ गोल कर चुके हैं।

राहुल गाँधी को जो रटा जाए, उसे ही रिपीट मोड में हर जगह दोहराते रहें हैं। फिर चाहे कोई कितना भी तथ्य दे या पूरा का पूरा सच ही सामने क्यों न आ जाए। एक तरफ राहुल का रा-फेल राग अभी भी जहाँ-तहाँ सुनने को मिल ही जाता है। पर अब जब उन्हें लगने लगा है कि इससे मामला बन नहीं रहा तो उन्होंने एक नया राग छेड़ा कि बीजेपी और RSS ने देश को बाँटा।

तो लगे हाथ भाजपा सांसद परेश रावल ने उनसे पूछ ही लिया कि ठीक है बीजेपी और RSS ने देश को बाँटा तो ये तो बता दीजिए कि नेहरू और जिन्ना में से कौन बीजेपी का था और कौन RSS का?

इससे पहले राहुल गाँधी कुख्यात आतंकी मसूद अज़हर को, ‘मसूद अज़हर जी’ कहकर सेल्फ गोल कर चुके हैं। यही राहुल गाँधी प्रधानमंत्री के प्रति अवसाद की हद तक जाकर एक से एक अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर चुके हैं। उनके कल के ‘मसूद अज़हर जी’ वाले बयान पर भी परेश रावल ने चुटकी लेते हुए इसे ‘संस्कार’ की संज्ञा दी है।

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ‘हाफिज सईद साहब’ तो वहीं ख़ुद सोनिया गाँधी नरेंद्र मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कह चुकी हैं।

अभी तो बस चुनाव अभियान शुरू ही हुए हैं, अब देखना ये है कि राहुल गाँधी या कॉन्ग्रेस के अन्य नेता भाषाई मर्यादा का कितना उल्लंघन करते हैं, तथा चुनाव प्रचार के स्तर को और कितना नीचे ले जाते हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -