Sunday, July 21, 2024
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जहाँ से हुआ वंदे मातरम का जयघोष, वहाँ तक पहुँची वंदे भारत: माँ के अंतिम संस्कार के तुरंत बाद PM मोदी ने बंगाल को दी ₹7800 करोड़ की सौगात, जनता से माफी भी माँगी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है, "बंगाल की पुण्य धरती को नमन। निजी कारणों से आपके बीच नहीं बंगाल नहीं आ पाया। इसके लिए क्षमा माँगता हूँ। रेलवे और मेट्रो प्रोजेक्ट्स के साथ कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन हुआ है। वंदे भारत ट्रेन के लिए आप सबको बधाई।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ हीराबेन के अंतिम संस्कार के बाद पश्चिम बंगाल को 7800 करोड़ रुपए की योजनाओं की सौगात दी। इसमें, पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने के अलावा कई अन्य योजनाओं का उद्घाटन किया। इस मौके पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद रहीं।

पीएम मोदी इस कार्यक्रम में पहले स्वयं जाने वाले थे। हालाँकि, माँ के निधन के कारण वह बंगाल नहीं जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वह इस कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है, “बंगाल की पुण्य धरती को नमन। निजी कारणों से आपके बीच नहीं बंगाल नहीं आ पाया। इसके लिए क्षमा माँगता हूँ। रेलवे और मेट्रो प्रोजेक्ट्स के साथ कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन हुआ है। वंदे भारत ट्रेन के लिए आप सबको बधाई।”

उन्होंने यह भी कहा, “बंगाल के कण-कण में आजादी के आंदोलन का इतिहास समाहित है। जिस धरती से वंदे मातरम् का जयघोष हुआ। वहाँ अभी वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई है। आज 30 दिसंबर की तारीख का भी इतिहास में अपना बहुत महत्व है। 30 दिसंबर, 1943 के दिन ही नेताजी सुभाष चंद्रबोस ने अंडमान में तिरंगा फहराकर भारत की आजादी का बिगुल फूँका था। इस घटना के 75 वर्ष होने पर साल 2018 में, मैं अंडमान गया था, नेताजी के नाम पर एक द्वीप का नामकरण भी किया था।”

पीएम मोदी ने आगे कहा है कि 21वीं सदी में भारत के तेज विकास के लिए भारतीय रेलवे का तेज विकास, तेज सुधार उतना ही जरूरी है। केंद्र सरकार, भारतीय रेलवे और इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए रिकॉर्ड इनवेस्टमेंट कर रही है। आज भारत में भारतीय रेलवे के कायाकल्प का राष्ट्रव्यापी अभियान चल रहा है।

प्रधानमंत्री ने रेलवे में हो रहे विकास को लेकर कहा है कि देश में वंदेभारत, तेज, हमसफर जैसी आधुनिक ट्रेनें बन रही हैं। विस्टा डोम कोचेस, रेल यात्रियों को नए अनुभव करा रहे हैं। देश में सुरक्षित, आधुनिक कोचेस की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हो रही है। रेलवे स्टेशनों को भी एयरपोर्ट्स की तरह विकसित किया जा रहा है। न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन भी इसी लिस्ट में शामिल है।

पीएम ने जोर देते हुए कहा है कि बीते आठ वर्षों में भारतीय रेलवे ने आधुनिकता की नींव पर काम किया है। अब आने वाले आठ वर्ष में सभी भारतीय, भारतीय रेलवे को आधुनिकता की नई यात्रा पर निकलते हुए देखेंगे। आज पूरी दुनिया भारत को बहुत भरोसे से देख रही है। इस भरोसे को बनाए रखने के लिए हर भारतीय को पूरी शक्ति लगा देनी है। सभी लोगों को मिलकर हर दिन -हर पल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करना है। देश सेवा के कार्यों में रुकना नहीं है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है, “हम लोग अक्सर प्रीवेंटिव हेल्थकेयर की बात करते हैं। कहते हैं कि दिनचर्या वो होनी चाहिए कि बीमारी की नौबत ही ना आए। ठीक इसी तरह नदी की गंदगी को साफ करने के साथ ही केंद्र सरकार प्रीवेंशन पर बहुत जोर दे रही है। इस प्रीवेंशन का सबसे बड़ा और आधुनिक तरीका है, ज्यादा से ज्यादा आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट। आने वाले 10-15 साल बाद की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए देश में आज ही आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाए जा रहे हैं।”

इससे पहले, इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम मोदी की माँ के निधन को लेकर कहा है, “मेरी संवेदनाएँ आपके साथ हैं। दु:ख की घड़ी में हम सब आपके साथ हैं। माँ से बढ़कर कुछ और नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री जी आज आपके लिए बहुत दुखद दिन है। मैं भगवान से प्रार्थना करूँगी की आपको यह दु:ख सहन करने की क्षमता प्रदान करें। मैं आपसे अनुरोध करूँगी कि आप इस कार्यक्रम को छोटा रखें क्योंकि आप अभी अपनी माँ के अंतिम संस्कार से आए हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत करने के अलावा, 2550 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अनेक सीवर अवसंरचना परियोजनाओं का शिलान्यास किया। यही नहीं उन्होंने, कोलकाता मेट्रो की जोका-तारातला पर्पल लाइन व डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर एंड सेनीटेशन का उद्घाटन किया है।

बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ हीराबेन मोदी यूएन मेहता हॉस्पिटल में भर्ती थीं। इसी हॉस्पिटल में उनका निधन हो गया। माँ के निधन के बाद, प्रधानमंत्री ने अपनी माँ के 100वें जन्मदिन के मौके पर दी उनकी अंतिम शिक्षा को भी याद किया। उन्होंने लिखा, “मैं जब उनसे 100वें जन्मदिन पर मिला तो उन्होंने एक बात कही थी, जो हमेशा याद रहती है- કામ કરો બુદ્ધિથી, જીવન જીવો શુદ્ધિથી यानी काम करो बुद्धि से और जीवन जियो शुद्धि से।”

निधन के बाद हीराबेन मोदी का पार्थिव शरीर उनके छोटे बेटे पंकज मोदी के घर ले जाया गया गया। हीराबेन पंकज मोदी के साथ गाँधीनगर के रायसन गाँव की वृंदावन सोसायटी में रहती थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी माँ हीराबेन के अंतिम दर्शन के लिए पंकज मोदी के घर पहुँचे। अंतिम यात्रा में पीएम माँ के पार्थिव शरीर को कंधा देते हुए भी नजर आए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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