Tuesday, July 23, 2024
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केजरीवाल की अगवानी और एयरक्राफ्ट लेने में व्यस्त हैं सीएम भगवंत मान, पंजाब पर दिन प्रतिदिन बढ़ रहा कर्ज

एक रिपोर्ट के अनुसार, कभी देश के सबसे समृद्ध राज्य माने जाने वाले पंजाब पर इस समय लगभग ₹3.40 लाख करोड़ का कर्ज है। यह कर्ज पंजाब की कुल अर्थव्यवस्था का 50% से अधिक है। पंजाब की अर्थव्यवस्था का कुल आकार 2022-23 में लगभग ₹6.29 लाख करोड़ था।

पंजाब की आर्थिक हालत बेहद खराब है। हालात ऐसे हैं कि राज्य की आम आदमी पार्टी की सरकार लोन को पाँच साल माफ़ करने की गुहार लगा रही है। हालाँकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान इस दौरान AAP मुखिया केजरीवाल के स्वागत और नया एयरक्राफ्ट लेने में व्यस्त हैं। पंजाब के बजट का एक बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज के ब्याज को चुकाने में जा रहा है।

पंजाब की वर्तमान में खस्ता आर्थिक हालत के पीछे कॉन्ग्रेस और AAP बराबर रूप से सहयोगी हैं। अगर 2017 में पंजाब की सत्ता में आई कॉन्ग्रेस सरकार ने इसकी अर्थव्यस्था को ICU में पहुँचाया तो AAP उसे अपनी नीतियों द्वारा इसे वेंटिलेटर पर पहुँचा रही है। पंजाब देश का अकेला ऐसा बड़ा राज्य है, जिस पर उसकी अर्थव्यवस्था का 50% से अधिक कर्ज है।

हालाँकि, पंजाब पर भले इतना अधिक कर्ज है कि सरकार के रोजाना के कामधाम भी अटक रहे हों, लेकिन AAP ने अपनी नीतियाँ नहीं बदली हैं। वह राज्य की अर्थव्यवस्था को रेवड़ियाँ बाँटकर और गर्त में ले जा रही हैं। चाहे वह मुफ्त बिजली की योजना हो या बसों में मुफ्त सवारी करवाना।

पंजाब की अर्थव्यवस्था का हाल-बेहाल?

कभी देश के सबसे समृद्ध राज्य माने जाने वाले पंजाब पर आई एक रिपोर्ट के अनुसार, इस समय राज्य के लगभग ₹3.40 लाख करोड़ का कर्ज है। यह कर्ज पंजाब की कुल अर्थव्यवस्था का 50% से अधिक है। पंजाब की अर्थव्यवस्था का कुल आकार 2022-23 में लगभग ₹6.29 लाख करोड़ था। पंजाब में 2022 में सत्ता परिवर्तन हुआ था और आम आदमी पार्टी की सरकार आई थी।

साल 2017 से 2022 तक पंजाब में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इस सरकार ने पाँच वर्षों (2017-22) में लगभग ₹1 लाख करोड़ का नया कर्ज पंजाब पर लाद दिया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने 2022 के मार्च महीने से लेकर 2023 के अंत तक लगभग ₹50,000 करोड़ का नया कर्ज पंजाब पर लाद दिया। पंजाब के कर्ज में बढ़ोतरी इसलिए नहीं हुई कि राज्य में कोई बड़ा विकास कार्य हुआ हो।

पंजाब की GSDP (राज्य की कुल अर्थव्यवस्था) का 50% से अधिक उस पर कर्ज होना बड़ी समस्या वाली बात है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2022-23 में राज्य का राजकोषीय घाटा (सरकार की आमदनी और कमाई में अंतर) उसकी GSDP का 5.2% था। सरकार जितना कमा रही है, उससे कहीं अधिक खर्च कर रही है।

एक हाथ कर्ज चुकाया, दूसरे हाथ से बढ़ाया

पंजाब सरकार को पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ रहा है। इससे कर्ज का पहाड़ और भी बढ़ता जा रहा है। एक रिपोर्ट बताती है कि पंजाब की AAP सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ₹47,000 करोड़ का जो कर्ज लिया, उसमें से ₹27,000 करोड़ तो पुराने कर्जों के ब्याज और मूलधन को चुकाने में चला गया।

पंजाब की सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में ₹20,100 करोड़ पुराने कर्ज के ब्याज के रूप में दिया था। इसके अलावा ₹15,146 करोड़ पुराने कर्ज के मूलधन के रूप में चुकाए। यानि AAP सरकार ने 2022-23 में जितना असल कर्ज चुकाया, उससे अधिक तो उसे ब्याज चुकाना पड़ा। आगे भी यह स्थिति बदलती नहीं दिख रही है।

वित्त वर्ष 2023-24 में पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार को लगभग ₹22,000 करोड़ पुराने कर्जों के ब्याज में और लगभग ₹16,000 करोड़ ब्याज को असल चुकाने में देने पड़ेंगे। पंजाब में अगर आर्थिक सुधारों और फिजूलखर्ची पर ध्यान नहीं दिया गया तो जल्द ही इसका कर्ज ₹4 लाख करोड़ को पार कर जाएगा।

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया, फिर भी मुफ्त हम तो बाँटेंगे भैया

AAP सरकार पंजाब की आर्थिक हालत सुधारने के बजाय उसे और गर्त में ले जा रही है। AAP सरकार की नीतियाँ ऐसी हैं कि राज्य पर दबाव और बढ़ रहा है। AAP की सरकार राज्य में 2022 में हर घर को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के वादे के साथ सत्ता में आई थी। AAP ने महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का वादा भी किया था।

पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग के अनुसार, पंजाब की AAP सरकार 2022-23 में राज्य में मुफ्त बिजली देने में ₹18,714 करोड़ खर्च करने पड़ेंगे। इसमें से ₹8,809 किसानों को मुफ्त बिजली देने में ₹5,886 करोड़ रूपए परिवारों को 300 यूनिट बिजली देने में और ₹1,427 करोड़ का खर्चा हुआ। इसके अलावा, बसों में महिलाओं को मुफ्त सवारी करवाने का भी सरकार पर बड़ा बोझ पड़ रहा है।

राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा देने में AAP सरकार को ₹550 करोड़ खर्च करने पड़े हैं। इसके अलावा भी राज्य सरकार कई ऐसी स्कीम लाने के विचार कर रही हैं, जिसमें और खर्चा होगा। ऐसे में जिस राज्य को लगातार कर्ज चुकाने के लिए ही कर्ज लेना पड़ रहा हो, वह मुफ्त रेवड़ियाँ बाँटने में खर्चा करे, आर्थिक रूप से यह कहीं से बुद्धिमान नहीं सिद्ध होते।

पंजाब कर्ज के बोझ तले, मुख्यमंत्री एयरक्राफ्ट लेने चले

भले ही पंजाब कर्जे के बोझ तले दबा है और उसकी आर्थिक हालत खस्ता है लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री की शौकीनियों में कोई कमी नहीं आई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अगस्त 2023 में एक 10 सीटर विमान लेने के लिए निविदा निकाली थी।

यह निविदा तब निकाली गई जब राज्य के पास पहले से एक हेलिकॉप्टर है जिसका उपयोग लगातार मुख्यमंत्री भगवंत मान करते हैं। इस निविदा के आने के बाद आरोप लगाया गया था कि इस लीज पर लिए गए एयरक्राफ्ट का उपयोग अरविन्द केजरीवाल करेंगे। ट्विटर पर जब भगवंत मान की सरकार की आलोचना हुई तो यह निविदा हटा दी गई। पंजाब पुलिस ने भी निविदा डालने वाले RTI एक्टिविस्ट को धमकाया भी।

पंजाब की आर्थिक स्थिति सुधारने के बजाय मुख्यमंत्री भगवंत मान ज्यादातर समय अपनी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल के स्वागत सत्कार में लगे रहते हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल दिसम्बर 2023 में पंजाब में विपश्यना के लिए पहुँचे तो भी वहाँ भगवंत मान भी पहुँचे थे। इसके पहले केजरीवाल का लगभग हर माह एक पंजाब दौरा होता रहा है।

जो पैसा मिला उसे खर्च नहीं किया, उलटे कर्ज माफ़ी की लगाई गुहार

पंजाब सरकार केंद्र सरकार पर लगातार आरोप लगा रही है कि उसे अधिक कर्ज नहीं लेने दिया जा रहा है। कहीं वह आरोप लगाती है कि केंद्र ने उसके फंड रोक कर दिया है। हालाँकि, पंजाब को जो पैसा अभी केंद्र सरकार ने दिया भी है, वह उसे भी सही से खर्च नहीं कर पा रही है।

भीषण आर्थिक संकट का सामना करने वाली पंजाब की ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) सरकार केंद्र से मिले ₹11,000 करोड़ रुपए में से ₹8,000 करोड़ रुपए को खर्च नहीं कर पाई है। फंड का रोना रोने वाली AAP सरकार वित्त वर्ष 2023-24 के 9 महीने बीतने के बाद इसमें से मात्र ₹3,000 करोड़ ही खर्च सकी है। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सचिवों से ऐसे जुगाड़ सोचने को कहा है, जिससे यह पैसा केंद्र को लौटाना ना पड़े।

एक तरफ खुद को मिला पैसा नहीं खर्च कर पा रही तो दूसरी तरफ इस बात के लिए जोर लगा रही है कि उसे पाँच सालों तक कर्ज ना चुकाना पड़े। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को अक्टूबर 2023 में लिखे एक पत्र में कहा है कि वो केंद्र की मोदी सरकार को इस बात के लिए मनाएँ कि पंजाब से पाँच साल तक किसी भी प्रकार के कर्जे की वसूली ना हो।

क्या होनी चाहिए आदर्श स्थिति?

पंजाब पर जितना वर्तमान में कर्ज है, वह कहीं से भी जायज नहीं है। ना ही उसका राजकोषीय घाटा नियमों के अनुसार है। दरअसल, देश में राज्यों के वित्तीय प्रबन्धन के विषय में बनाए गए कानून राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) के तहत किसी भी राज्य का कर्ज उसकी कुल GSDP से 20% से अधिक नहीं होना चाहिए।

कुछ मामलों में छूट के साथ भी इसे अधिकतम 25% रखने की हिदायत दी गई है। पंजाब पर GSDP का 50% कर्ज है और इसके घटने के कोई आसार नहीं हैं। वहीं, अगर राजकोषीय घाटे की बात की जाए तो यह भी FRBM एक्ट के तहत GSDP का 3% होना चाहिए। पंजाब में यह भी 5.2% है। हालाँकि पंजाब सरकार इसे कम करने का कोई प्रयास नहीं करती दिखती।

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