Friday, June 18, 2021
Home राजनीति कॉन्स्टेबल के 'इशारे' से गई CM की कुर्सी: जब राजीव के लिए एक हाथ...

कॉन्स्टेबल के ‘इशारे’ से गई CM की कुर्सी: जब राजीव के लिए एक हाथ वाले जोशी को गहलोत ने लगाया ठिकाने

"बंधु नेहरू परिवार में सब को गुस्सा आता है। इंदिरा जी को आता था। कोई खास बात नहीं है। सब ठीक हो जाएगा।" लेकिन उसके बाद जोशी के लिए कुछ भी ठीक नहीं हुआ। 20 जनवरी 1988 को उनसे इस्तीफा ले लिया गया।

एक हैं अशोक गहलोत और एक थे हरिदेव जोशी। इंदिरा के जमाने के दिग्गज कॉन्ग्रेसी रहे जोशी को पार्टी में उनके बेटे राजीव गॉंधी के जमाने में ठिकाने लगाया गया था। इसके पीछे गहलोत का बड़ा हाथ बताया जाता है। जोशी के पतन के बाद ही राजस्थान कॉन्ग्रेस की सियासत में गहलोत का सूरज चढ़ता गया। आजकल वे सचिन पायलट नामक चुनौती को ठिकाने लगाने के जोड़-तोड़ में लगे हैं।

हरिदेव जोशी तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे। पार्टी में उनकी तूती बोलती थी। जब वे 1985 में दूसरी बार सीएम बने तब तक कॉन्ग्रेस पर राजीव पूरी तरह काबिज हो चुके थे। देश के प्रधानमंत्री थे। उनकी कैबिनेट में गहलोत भी थे। राजीव राजस्थान पर भी अपनी पूरी पकड़ चाहते थे।

जोशी के रहते यह संभव नहीं दिख रहा था। लिहाजा उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बनाकर गहलोत को दिल्ली से जयपुर भेजा। जोशी ने इस फैसले का विरोध तो नहीं किया, लेकिन पार्टी की बैठकों से खुद भी दूर रहते थे और उनके कैबिनेट सहयोगी भी। इसके बाद की कहानी पर आने से पहले यह जानते हैं कि जोशी राजस्थान की सियासत में शीर्ष तक कैसे पहुॅंचे थे।

हरिदेव जोशी राजस्थान स्थित बँसवाड़ा के रहने वाले थे। बचपन में उनका हाथ टूट गया तो बाँस की पट्टियों से ही गाँववालों ने इसे सीधा करने की कोशिश की लेकिन बात बिगड़ गई। डॉक्टर के पास गए तो पता चला कि हाथ बेकार हो चुका है और उसे काटना पड़ेगा। बावजूद इसके जोशी ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। गिरफ्तार भी हुए।

कॉन्ग्रेस में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें प्रदेश महासचिव का पद दिया गया। वे पहली बार अक्टूबर 1973 में मुख्यमंत्री बने थे। पहली बार उनका कार्यकाल करीब साढ़े तीन वर्षों का रहा। मार्च 1985 में दूसरी बार सीएम बने तो कार्यकाल करीब तीन साल ही चला। तीसरा और आखिरी कार्यकाल चार महीने का रहा था।

असल में इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों मे कॉन्ग्रेस को बुरी हार मिली थी और जोशी का पद चला गया। हालॉंकि उनका राजनीतिक अस्त जनवरी 1988 में ही हो गया था जब उन्हें राजीव ने इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया। वैसे भी लगातार 10 विधानसभा चुनाव जीत कर जननेता की छवि बनाने वाले जोशी कभी भी गॉंधी परिवार की पहली पसंद नहीं रहे थे।

जनवरी 1988 में जब जोशी से इस्तीफा लिया गया तब गहलोत ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे। जोशी के इस्तीफे से जुड़ी एक दिलचस्प घटना का विवरण राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार श्याम आचार्य ने अपनी किताब तेरा तुझको अर्पण में किया है।

उन्होंने लिखा है कि राजीव गॉंधी ने दिल्ली के बाहर किसी शांत जगह पर केंद्रीय कैबिनेट की बैठक करने का फैसला किया। जगह चुनी गई राजस्थान की सरिस्का। लेकिन उस समय राजस्थान में भयंकर अकाल पड़ा था। इसकी वजह से इस फैसले की आलोचना होने लगी। इसे देख राजीव ने बैठक की जगह तो नहीं बदली, लेकिन जोशी तक सादगी बरतने का संदेश भिजवाया।

कहते हैं कि राजीव खुद गाड़ी ड्राइव कर बैठक स्थल तक जा रहे थे। वे जैसे ही सरिस्का से ठीक पहले चौराहे पर पहुॅंचे वहॉं तैनात कॉन्स्टेबल ने बाईं तरफ मुड़ने का इशारा किया। राजीव ने गाड़ी मोड़ी तो रास्ता एक मैदान में जाकर खत्म हो गया।

मैदान में सरकारी गाड़ियों की कतार लगी थी। वे समझ गए कि उनके निर्देशों का पालन नहीं हुआ है। आचार्य ने लिखा है कि राजीव ने हरिदेव से पूछा- जोशी जी आपने यह क्या तमाश कर रखा है? हू गेव द इंस्ट्रक्शन (किसने यह आदेश दिया)? जोशी ने तत्कालीन डीजीपी पीसी मिश्रा को आगे कर दिया और उन्होंने बताया कि दिल्ली से ही इसके निर्देश आए थे। राजीव ने कहा- हू गेव इंस्ट्रक्शन, मैंने नहीं दिया। यह कह वे आगे बढ़ गए। जोशी का माला तक नहीं पहना। इस घटना के जो चश्मदीद थे उनमें अशोक गहलोत भी शामिल थे।

जोशी इस घटना के बाद खुद को बेहद अपमानित महसूस कर रहे थे। उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया। हालॉंकि बाद में राजीव ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया ​भी। लेकिन, उनकी विदाई की पटकथा तैयार हो चुकी थी। आचार्य के अनुसार उस समय राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर-शोर से थी कि गहलोत ने ही उस कॉन्स्टेबल से राजीव की गाड़ी को मैदान की ओर मुड़ जाने का इशारा करने के लिए कहा था।

आचार्य ने उस घटना का जो विवरण लिखा है उससे पार्टी नेताओं को लेकर गॉंधी परिवार की सोच का भी पता चलता है। जब हरिदेव जोशी कोप भवन में गए शीर्षक से लिखी कथा में बताया गया है कि इस घटना के बाद निकट सहयोगियों ने जोशी को सलाह दी कि आज जो कुछ हुआ है उसके बाद उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। लेकिन, जोशी ने जवाब दिया, “बंधु नेहरू परिवार में सब को गुस्सा आता है। इंदिरा जी को आता था। कोई खास बात नहीं है। सब ठीक हो जाएगा।” लेकिन उसके बाद जोशी के लिए कुछ भी ठीक नहीं हुआ। 20 जनवरी 1988 को उनसे इस्तीफा ले लिया गया।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Searched termsharidev joshi rajasthan, haridev joshi ashok gehlot, haridev joshi congress, haridev joshi cm rajasthan, haridev joshi rajiv gandhi, हरिदेव जोशी राजस्थान, हरिदेव जोशी राजस्थान के मुख्यमंत्री, हरिदेव जोशी कांग्रेस, राजस्थान संबित पात्रा, संबित पात्रा गहलोत सरकार, संबित पात्रा राजस्थान फोन टेपिंग, संबित पात्रा फोन टेपिंग की सीबीआई जांच, गहलोत पायलट में नहीं हो रही बात, गहलोत पायलट की डेढ़ साल से बातचीत बंद, कांग्रेस नेताओं के खिलाफ शिकायत, बीजेपी ने सुरजेवाला के खिलाफ की शिकायत, राजस्थान बीजेपी, राजस्थान बीजेपी लक्ष्मीकांत भारद्वाज, sachin pilot latest, sachin pilot news, sachin pilot rajasthan high court, sachin pilot congress, sachin pilot ashok gehlot, rajasthan news, rajasthan gehlot, rajasthan congress, CM गहलोत सुरजेवाला ऑडियो, Ashok Gahlot, राजस्थान, Rajasthan, Congress, कॉन्ग्रेस
अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘अगर मरना पड़े तो 4-6 को मार के मरना’: कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक सेल का नया अध्यक्ष, जो बच्चों से लगवाता है ‘हिटलर की मौत मरेगा’...

इमरान प्रतापगढ़ी को देश के कई उर्दू मुशायरों और इस्लामी कार्यक्रमों में बुलाया जाता है और वो उन्हीं का सहारा लेकर अपना इस्लामी प्रोपेगंडा चलाते हैं।

दो समुद्री तटों और चार पहाड़ियों के बीच स्थित रायगढ़ का हरिहरेश्वर मंदिर, जहाँ विराजमान हैं पेशवाओं के कुलदेवता

अक्सर कालभैरव की प्रतिमा दक्षिण की ओर मुख किए हुए मिलती है लेकिन हरिहरेश्वर में स्थित मंदिर में कालभैरव की प्रतिमा उत्तरमुखी है।

मोदी कैबिनेट में वरुण गाँधी की एंट्री के आसार, राजनाथ बोले- UP में 2022 का चुनाव योगी के नाम

मोदी सरकार में जल्द फेरबदल की अटकलें कई दिनों से लग रही है। 6 नाम सामने आए हैं जिन्हें जगह मिलने की बात कही जा रही है।

ताबीज की लड़ाई को दिया जय श्रीराम का रंग: गाजियाबाद केस की पूरी डिटेल, जुबैर से लेकर बौना सद्दाम तक की बात

गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग के साथ हुई मारपीट की घटना में कब, क्या, कैसे हुआ। सब कुछ एक साथ।

टिकरी बॉर्डर पर शराब पिला जिंदा जलाया, शहीद बताने की साजिश: जातिसूचक शब्दों के साथ धमकी भी

जले हुए हालात में भी मुकेश ने बताया कि किसान आंदोलन में कृष्ण नामक एक व्यक्ति ने पहले शराब पिलाई और फिर उसे आग लगा दी।

‘अब मूत्रालय का भी फीता काट दो’: AAP का ‘स्पीडब्रेकर’ देख नेटिजन्स बोले- नारियल फोड़ने से धँस तो नहीं गया

AAP नेता शिवचरण गोयल ने स्पीडब्रेकर का सारा श्रेय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिया। लेकिन नेटिजन्स ने पूछ दिए कुछ कठिन सवाल।

प्रचलित ख़बरें

BJP विरोध पर ₹100 करोड़, सरकार बनी तो आप होंगे CM: कॉन्ग्रेस-AAP का ऑफर महंत परमहंस दास ने खोला

राम मंदिर में अड़ंगा डालने की कोशिशों के बीच तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने एक बड़ा खुलासा किया है।

‘भारत से ज्यादा सुखी पाकिस्तान’: विदेशी लड़की ने किया ध्रुव राठी का फैक्ट-चेक, मिल रही गाली और धमकी, परिवार भी प्रताड़ित

साथ ही कैरोलिना गोस्वामी ने उन्होंने कहा कि ध्रुव राठी अपने वीडियो को अपने चैनल से डालें, ताकि जिन लोगों को उन्होंने गुमराह किया है उन्हें सच्चाई का पता चले।

टिकरी बॉर्डर पर शराब पिला जिंदा जलाया, शहीद बताने की साजिश: जातिसूचक शब्दों के साथ धमकी भी

जले हुए हालात में भी मुकेश ने बताया कि किसान आंदोलन में कृष्ण नामक एक व्यक्ति ने पहले शराब पिलाई और फिर उसे आग लगा दी।

‘चुपचाप मेरे बेटे की रखैल बन कर रह, इस्लाम कबूल कर’ – मृत्युंजय बन मुर्तजा ने फँसाया, उसके अम्मी-अब्बा ने धमकाया

मुर्तजा को धर्मान्तरण कानून-2020 के तहत गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित को कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है।

पल्लवी घोष ने गलती से तो नहीं खोल दी राहुल गाँधी की पोल? लोगों ने कहा- ‘तो इसलिए की थी बंगाल रैली रद्द’

जहाँ यूजर्स उन्हें सोनिया गाँधी को लेकर इतनी महत्तवपूर्ण जानकारी देने के लिए तंज भरे अंदाज में आभार दे रहे हैं। वहीं राहुल गाँधी को लेकर बताया जा रहा है कि कैसे उन्होंने बेवजह वाह-वाही लूट ली।

भाई की आँखें फोड़वा दी, बीवी 14वें बच्चे को जन्म देते मरी: मोहब्बत का दुश्मन था हिन्दू-मुस्लिम शादी पर प्रतिबंध लगाने वाला शाहजहाँ

माँ नूरजहाँ को निकाल बाहर किया। ससुर की आँखें फोड़वा डाली। बीवी 14वें बच्चे को जन्म देते हुए मरी। हिन्दुओं पर अत्याचार किए। आज वही व्यक्ति लिबरलों के लिए 'प्यार का मसीहा' है।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
104,573FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe