Homeसोशल ट्रेंड#ScientistSisodia ने 'द लल्लनटॉप' को दिया फिजिक्स का ज्ञान, कहा- पानी तो गंदा ही...

#ScientistSisodia ने ‘द लल्लनटॉप’ को दिया फिजिक्स का ज्ञान, कहा- पानी तो गंदा ही आएगा

"वैज्ञानिक तौर पर और फिजिक्स के मुताबिक ये बिलकुल भी संभव नहीं है कि कचड़ा न आए। आपको 10 मिनट तो लगेंगे ही कीचड़ साफ करने में।" - फिजिक्स समझाने में मशगूल सिसोदिया लल्लनटॉप पत्रकार की बात भी नहीं सुन रहे थे।

दिल्ली विधानसभा चुनावों में एक बार फिर ऐतिहासिक जीत हासिल करने के लिए आम आदमी पार्टी ने अपना दम-खम झोंक दिया है। रिपोर्ट कार्ड जारी करके दिल्लीवासियों को काम गिनवाए जा रहे हैं। बिजली-पानी-शिक्षा के मुद्दों के साथ विपक्ष को एक बार फिर भ्रष्टाचारी बताया जा रहा है। हालाँकि, ये बात और है कि इस बीच प्रदेश की जनता उन्हें उनके अधूरे वादों के लिए लगातार कोस रही है और सोशल मीडिया पर उनके नेताओं द्वारा किए कामों पर उनका मजाक भी उड़ा रही है।

इसी क्रम में प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वैसे तो ये वीडियो द लल्लनटॉप को दिए एक साक्षात्कार की क्लिप है, जिसे लोकसभा चुनावों के मद्देनजर रिकॉर्ड किया गया था। लेकिन किसे पता था कि इस वीडियो में 18 मिनट से लेकर 19 मिनट के स्लॉट में हुई बातचीत पर उनके उपमुख्यमंत्री की फजीहत तब होगी, जब चुनाव विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक होंगे।

इस साक्षात्कार में द लल्लनटॉप के पत्रकार नीरज भट्ट मनीष सिसोदिया से मंडावली क्षेत्र में लोगों के घर के नल से आ रहे गंदे पानी पर सवाल करते दिख रहे हैं। वे पूछते हैं कि जब वो मंडावली गाँव में रिपोर्ट करने गए थे तो वहाँ पानी की समस्या से परेशान लोग अचानक से बाहर आए और नलों से निकलते गंदे पानी को दिखाने लगे। नीरज ने अपनी बात को सत्यापित करने के लिए ये भी कहा कि उनके पास इसकी बाकायदा वीडियो है।

अब सवाल सुनने के बाद मनीष सिसोदिया ने समस्या के समाधान की बजाय अपने जवाब में बताना शुरू किया कि आखिर ऐसा क्यों होता है। आसान भाषा में कहें तो उन्होंने नलों में आ रहे कीचड़ को जस्टिफाई करने की कोशिश की… सिसोदिया ने बताया, जिस वक्त पानी आता है उस वक्त आप अपनी मोटर चलाएँगे, तो आपको पानी साफ मिलेगा। लेकिन जिस वक्त पानी नहीं आता है, उस वक्त आप मोटर चलाएँगे, तो वो आस-पास की गंदगी को खींचेगा और वो गंदगी पानी के साथ बाहर आएगी।

सिसोदिया के अनुसार पाइपलाइन में कचरा और धूल होता ही होता है। इसलिए अगर आप मोटर पानी सप्लाई वाले समय के बाद चलाएँगे, तो उसमें कचड़ा खिंच कर आएगा। लेकिन अगर सप्लाई के समय मोटर चलाएँगे तो उसका फायदा आपको आगे के लिए भी मिलेगा। अगर आप ऐसा नहीं करते और एक बार मोटर चलाकर डस्ट पाइप में खींच लेते हैं, तो अगली बार आपको 10 मिनट लगेंगे ही लगेंगे कीचड़ साफ करने में। सिसोदिया का कहना है कि वैज्ञानिक तौर पर और फिजिक्स के मुताबिक ये बिलकुल भी संभव नहीं है कि कचड़ा न आए।

पूरे साक्षात्कार के दौरान सिसोदिया को पत्रकार अपनी बात समझाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन शायद सिसोदिया अपनी पढ़ी हुई फिजिक्स से उन्हें समझाने में इतने व्यस्त हैं कि वो सुनना ही नहीं चाहते। वायरल वीडियो में देख सकते हैं कि नीरज अपनी बात को कहने की पूरी कोशिश करते हैं लेकिन सिसोदिया अपनी फिजिक्स उन पर इस प्रकार मढ़ते हैं कि आगे इस विषय पर नीरज सुनने के अलावा कुछ नहीं कह पाते।

गौरतलब है कि अब इस वीडियो की क्लिप को लेकर सोशल मीडिया पर मनीष सिसोदिया को घेरा जा रहा है। उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। उनके फिजिक्स ज्ञान पर सवाल उठ रहे है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस वीडियो को शेयर किया है और लिखा है, “ओह हो भारी गलती हो गई… अब ये सब मिल के मोदी जी को कोसेंगे कि मोदी जी की सरकार ने ऐसे होनहार व्यक्ति को पद्मश्री तक नहीं दिया।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी, केजरीवाल-मान-सिसोदिया के साथ तस्वीरें: कौन है AAP नेता अशोक ओझा, जो अपनी ही पार्टी के नेताओं को IB के नाम...

अशोक ओझा केवल शहर स्तर का पदाधिकारी नहीं था, बल्कि पार्टी के बड़े नेताओं के साथ सीधा संपर्क रखने वाला और संगठन में पहचान रखने वाला चेहरा था।

जनगणना में मातृभाषा का एक जवाब तय करता है देश का बजट, शिक्षा नीति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व: जानिए उर्दू-अरबी से लेकर 19000 भाषाई पहचान...

लोकतंत्र में संख्या बल ही किसी भी भाषाई समूह की माँगों को मजबूती देता है। बहुभाषी भारत में यह जनगणना तय करती है कि आने वाले समय में सरकारी संसाधन और प्रशासनिक विकास किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
- विज्ञापन -