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भारत-Pak सीमा पर मौजूद ‘हरामी नाला’ बेहद अहम, यहाँ का दलदल ही नहीं पानी भी खतरनाक: समझें- क्यों ये घुसपैठ के लिहाज से है बेहद संवेदनशील

गुजरात के कच्छ स्थित हरामी नाला भारत-पाक सीमा का सबसे संवेदनशील क्षेत्र है, जहां दलदल, समुद्री ज्वार और बदलते रास्तों के बीच बीएसएफ चौबीसों घंटे निगरानी करती है।

भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा की बात होती है तो ज्यादातर लोगों के मन में राजस्थान का रेगिस्तान या जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियाँ आती हैं, लेकिन गुजरात के कच्छ में स्थित ‘हरामी नाला’ ऐसा इलाका है, जहाँ सीमा की निगरानी करना सबसे मुश्किल कामों में से एक माना जाता है।

दलदल समुद्री पानी, बदलते ज्वार-भाटा और लगातार बदलती भौगोलिक स्थिति के कारण यह क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना रहता है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस संवेदनशील इलाके का दौरा कर यहाँ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया।

क्या है हरामी नाला और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

हरामी नाला गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित करीब 22 किलोमीटर लंबा समुद्री चैनल है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा का हिस्सा बनता है। इसका बड़ा हिस्सा अरब सागर के खारे पानी से घिरा रहता है, जबकि लगभग आठ किलोमीटर का क्षेत्र दलदली जमीन से भरा हुआ है।

इस इलाके की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ ज्वार-भाटा आने के साथ पानी की गहराई, दिशा और दलदल की स्थिति लगातार बदलती रहती है। इसी वजह से यहाँ स्थायी निशान या सीमा चिन्ह स्थापित करना बेहद मुश्किल होता है। समुद्री धारा और रास्ते बार-बार बदलने के कारण इस क्षेत्र को नेविगेट करना भी काफी कठिन माना जाता है।

कैसे पड़ा हरामी नाला नाम?

हरामी नाला नाम सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे स्थानीय लोगों का अनुभव जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इस क्षेत्र की स्थिति ऐसी है की आप इसका अनुमान नहीं लगा सकते। यहाँ आने वाला व्यक्ति कभी भी सही अंदाजा नहीं लगा सकता कि आगे क्या स्थिति मिलेगी।

समुद्री रास्ते, दलदल और पानी की गहराई लगातार बदलते रहते हैं। इसी कारण स्थानीय बोलचाल में इसे ‘हरामी नाला‘ कहा जाने लगा। समय के साथ यही नाम प्रचलित हो गया और आज यह पूरे देश में इसी नाम से जाना जाता है।

घुसपैठ और तस्करी के लिए इस्तेमाल होता रहा है यह रास्ता

हरामी नाला लंबे समय तक पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ के लिए आसान रास्ता माना जाता रहा है। इस इलाके की स्थिति का फायदा उठाकर आतंकवादी, तस्कर और घुसपैठिएँ भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश करते रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कई बार पाकिस्तानी मछुआरे भी अनजाने में या जानबूझकर भारतीय सीमा में प्रवेश करते हुए पकड़े गए हैं। इस क्षेत्र में संदिग्ध नावों की गतिविधियाँ भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।

पाकिस्तानी मछुआरे (फोटो साभार – NBT)

सबसे बड़ा उदाहरण साल 2008 के मुंबई आतंकी हमले का है। जाँच एजेंसियों के अनुसार 26/11 हमले में शामिल आतंकियों का समूह समुद्री रास्ते से भारत में दाखिल हुआ था। इसके बाद इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को और मजबूत किया गया। तब से BSF लगातार यहाँ निगरानी बढ़ा रही है।

BSF के सामने हर दिन खड़ी रहती हैं कई चुनौतियाँ

हरामी नाला में सीमा की निगरानी करना बेहद कठिन काम है। यहाँ दलदल इतना गहरा होता है कि कई बार BSF की गश्ती नावें भी फंस जाती हैं। ज्वार उतरने के बाद पानी कम हो जाने पर नावों का संचालन मुश्किल हो जाता है।

दलदली जमीन पर जवानों को विशेष गमबूट पहनकर चलना पड़ता है। जमीन में मौजूद छोटे-छोटे शंख और समुद्री जीव पैरों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसके अलावा केकड़े, उड़ने वाले कीट, तेज हवाएँ और खारा पानी जवानों की मुश्किलें बढ़ा देते हैं।

यहाँ दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं है। गर्मी के मौसम में तापमान काफी अधिक हो जाता है, जबकि समुद्री हवाएँ और बदलता मौसम लगातार चुनौती पैदा करते हैं। इसके बावजूद BSF के जवान चौबीसों घंटे सीमा की निगरानी करते हैं।

तैरती चौकियाँ और आधुनिक तकनीक से हो रही निगरानी

हरामी नाला में स्थायी चौकियाँ बनाना आसान नहीं है क्योंकि दलदली जमीन निर्माण कार्य के लिए उपयुक्त नहीं है। इसी कारण BSF यहाँ तैरती हुई पोस्ट और अस्थायी निगरानी केंद्रों का इस्तेमाल करती है।

दलदली क्षेत्र में जवान हर कुछ दूरी पर अस्थायी स्टैंड बनाकर निगरानी करते हैं। हाई टाइड आने पर वे ऊँचे प्लेटफॉर्म पर चढ़कर चौकसी जारी रखते हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

इसके अलावा BSF के विशेष ‘क्रोकोडाइल कमांडो’ भी इस क्षेत्र में तैनात रहते हैं। आधुनिक कैमरों, नौकाओं और तकनीकी उपकरणों की मदद से पूरे इलाके की निगरानी की जाती है।

अमित शाह के दौरे से क्यों बढ़ी चर्चा?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में हरामी नाला क्षेत्र का दौरा कर यहाँ सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने भारत-पाक सीमा पर स्थित बॉर्डर आउटपोस्ट G-7 का उद्घाटन किया और सीमा सुरक्षा बल के जवानों से मुलाकात की।

दौरे के दौरान उन्होंने हरामी नाला क्षेत्र में बनाए गए आधुनिक ऑब्जर्वेशन पोस्ट टावर का भी उद्घाटन किया। करीब 9.5 मीटर ऊँचे इस टावर में अत्याधुनिक सर्विलांस कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से सीमा पर दूर तक निगरानी रखी जा सकेगी।

इसके अलावा चिड़ियामोड़-बियारबेट लिंक रोड और BSF के लिए नई आधारभूत सुविधाओं की शुरुआत भी की गई। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान होगी और सीमा पर निगरानी क्षमता में बड़ा सुधार आएगा।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद इस पूरे क्षेत्र में मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित किया गया है और भविष्य में भी सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।

सीमा सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम है हरामी नाला

हरामी नाला केवल एक समुद्री चैनल नहीं बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित होने, दलदली भूभाग और समुद्री पहुँच के कारण यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए हमेशा विशेष महत्व रखता है।

BSF के जवान कठिन परिस्थितियों में यहां दिन-रात निगरानी कर रहे हैं। आधुनिक तकनीक और नए बुनियादी ढाँचे के जुड़ने से अब इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है। यही कारण है कि हरामी नाला को भारत-पाक सीमा के सबसे चुनौतीपूर्ण और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में गिना जाता है।

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विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

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