Homeराजनीतिकॉन्ग्रेस के चेले जितना अपमानित करेंगे, मुझे नामदार से लड़ने के लिए उतनी ही...

कॉन्ग्रेस के चेले जितना अपमानित करेंगे, मुझे नामदार से लड़ने के लिए उतनी ही ताकत मिलेगी: स्मृति ईरानी

“मुझ पर हमला करना उनका अधिकार है लेकिन वे मुझे नहीं रोक सकते हैं। जितना भी अपमानित करेंगे, मुझे उतनी ही ताकत मिलेगी कि मैं उनसे लड़ूँ। क्योंकि मैं कॉन्ग्रेस पार्टी के नामदार के खिलाफ लड़ रही हूँ, इसलिए उनसे यह सब देखा नहीं जा रहा है।”

उत्तर प्रदेश के अमेठी से BJP उम्मीदवार केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने डिग्री विवाद पर कॉन्ग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि कॉन्ग्रेस हमेशा ही उन्हें अपमानित करने का प्रयास करती रही है और महिला होने के कारण ऐसी कोई प्रताड़ना नहीं है, जो कॉन्ग्रेस ने उनके खिलाफ इस्तेमाल ना की हो। उन्होंने कहा कि इस तरह से कॉन्ग्रेस उन्हें रोक नहीं सकती।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, “मुझ पर हमला करना उनका अधिकार है, कॉन्ग्रेस के चेले-चपाटे चाहे जो भी कर लें, लेकिन वे मुझे नहीं रोक सकते हैं। जितना भी अपमानित करेंगे, मुझे उतनी ही ताकत मिलेगी कि मैं उनसे लड़ूँ। क्योंकि मैं कॉन्ग्रेस पार्टी के नामदार के खिलाफ लड़ रही हूँ, इसलिए उनसे यह सब देखा नहीं जा रहा है।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -