Homeराजनीतिउत्तराखंड में जीत रही बीजेपी: 6000 वोटों से हारे सीएम पुष्कर सिंह धामी, कॉन्ग्रेस...

उत्तराखंड में जीत रही बीजेपी: 6000 वोटों से हारे सीएम पुष्कर सिंह धामी, कॉन्ग्रेस के हरीश रावत को भी 16000 वोटों से मिली मात

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत (Harish Rawat) भी लालकुआँ विधानसभा सीट से चुनाव हार गए हैं। उन्हें भाजपा के उम्मीदवार मोहन सिंह बिष्ट ने करीब 16000 वोटों के बड़े अंतर से पटखनी दी।

उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों (Uttarakhand Assembly Election-2022) के लिए मतगणना लगातार जारी है। रुज्ञानों से ये स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में भाजपा दोबारा से सरकार बना रही है, लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) प्रदेश की खटीमा सीट से चुनाव हार गए हैं। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत (Harish Rawat) भी लालकुआँ विधानसभा सीट से चुनाव हार गए हैं। उन्हें भाजपा के उम्मीदवार मोहन सिंह बिष्ट ने करीब 16000 वोटों के बड़े अंतर से पटखनी दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खटीमा विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस के भुवन कापड़ी ने 6000 वोटों के अंतर से हराया। लेकिन बावजूद इसके बीजेपी ने प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया है। चुनाव आय़ोग के मुताबिक, बीजेपी पहाड़ी राज्य में 47 सीटों पर आगे चल रही है। जीत का ये आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है। यहाँ कॉन्ग्रेस केवल 19 सीटों पर सिमटती दिख रही है। जबकि 2 सीटें खबर लिखे जाने तक अन्य के खाते में जाती दिख रही हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में 2017 में जब बीजेपी की सरकार बनी तो उस दौरान त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था। लेकिन उनकी कार्यशैली से पार्टी में अंदरूनी तौर पर विरोध के स्वर उठे, जिसके बाद चार साल बाद त्रिवेंद्र रावत की जगह तीरथ रावत को सीएम बनाया गया। हालाँकि, उनकी बयानबाजियों ने पार्टी असहज स्थिति में ला दिया। ऐसा प्रतीत होने लगा था कि राज्य में बीजेपी 20 सीटों तक सिमट सकती है। इन हालातों से निपटने के बाद तीसरी बार पुष्कर सिंह धामी को सीएम बनाया। हुआ भी यही कि 8 महीने के अथक परिश्रम के बाद धामी ने बीजेपी को फिर से फाइट में ला दिया। बहरहाल अब उनके चुनाव हारने के बाद इस बात का सवाल खड़ा हो गया है कि राज्य के अगले सीएम कौन होंगे? इस बात का पता तो चुनाव के बाद ही पता चल सकेगा।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीट है। बहुमत के लिए 36 सीटें चाहिए। इस बार 65.10 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2017 के विधानसभा चुनावों (65.56) से थोड़ा ही कम है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?

क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।
- विज्ञापन -