Sunday, September 19, 2021
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हिंदुस्तान की पहली घटना! अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों ने ही वाइस चांसलर को किया ‘निष्कासित’

इसी से पता चलता है AMU के छात्रों का स्टैंडर्ड! जहाँ के छात्रों को अपनी यूनिवर्सिटी के नियम-कानून का अता-पता नहीं है, वो CAA-NRC को क्या खाक समझ पाएँगे!

रविवार (22 दिसंबर) को अलीगढ़ में इंटरनेट सेवाओं की बहाली के तुरंत बाद, शिक्षकों, छात्रों और ग़ैर-शिक्षण कर्मचारियों ने अपने वाइस चांसलर को निष्कासित कर दिया। बाक़ायदा एक नोटिस जारी करते हुए, यह कहा गया कि उन्होंने अपने वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर तारिक मंसूर और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एस अब्दुल हामिद को निष्कासित कर दिया है। उन्होंने कहा कि वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार से अनुरोध है कि वे वीसी लॉज और रजिस्ट्रार के लॉज को खाली कर दें। नोटिस में घोषित किया गया है कि सभी लोग तब तक विश्वविद्यालय प्रशासन का बहिष्कार करेंगे, जब तक यह दोनों अपना इस्तीफ़ा नहीं दे देते और कैंपस छोड़कर चले नहीं जाते।

AMU के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार को निष्कासित किए जाने का नोटिस (साभार: रिपब्लिक टीवी)

इन सबके मद्देनज़र ध्यान देने वाली बात यह है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में उतरे AMU छात्रों को यह तक नहीं मालूम कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और वाइस चांसलर को पद से हटाने की भी एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया में भी राष्ट्रपति को ही निर्णय लेना होता है। लेकिन, AMU के छात्रों-शिक्षकों ने मिलकर (वैसे कितने शिक्षक इसमें शामिल हैं, इस पर संशय है क्योंकि जिस लेटर हेड पर यह सूचना आई है, वो छात्रों का है, न कि शिक्षक संघ का) अपनी मर्ज़ी से वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार को निष्कासित कर दिया। इसी से पता चलता है AMU के छात्रों का स्टैंडर्ड! जहाँ के छात्रों को अपनी यूनिवर्सिटी के नियम-कानून का अता-पता नहीं है, वो CAA-NRC को क्या खाक समझ पाएँगे!

दरअसल, AMU के छात्र नेताओं ने रविवार (15 दिसंबर) को AMU में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों के ख़िलाफ़ “पुलिस अत्याचार” और “राज्य दमन” की कड़ी निंदा करते हुए AMU के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार के इस्तीफ़े की माँग की थी।

ख़बर के अनुसार, छात्रों का आरोप था कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर तारिक मंसूर ने ही कैंपस में यूपी पुलिस को विरोध-प्रदर्शन के दौरान अंदर घुसने की अनुमति दी थी। उन्होंने हिंसा के बाद कहा था कि उग्र भीड़ से छात्रों की जान और विश्वविद्यालय सम्पत्ति को नुक़सान हो सकता था। इसके बाद स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले दागने पड़े थे।

बता दें कि नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध के बाद, अलीगढ़ में इंटरनेट कनेक्शन बंद होने के सात दिन बाद, अधिकारियों ने रविवार को सेवा बहाल कर दी। बंद के बारे में सूचित करते हुए ज़िला मजिस्ट्रेट ने 15 दिसंबर को कहा था, “छात्रों द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन के बाद, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कुछ असामाजिक तत्व भड़काऊ संदेशों को प्रसारित करने के लिए इंटरनेट सेवाओं का उपयोग कर लोगों के बीच हिंसा भड़का सकते हैं। सोशल मीडिया पर हिंसात्मक सामग्री की रोकथाम के लिए इंटरनेट सेवाएँ रात 10 बजे से अगली रात 10 बजे तक बंद रहेगी।” 

ग़ौरतलब है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध के नाम पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 15 दिसंबर 2019 को जमकर बवाल कटा था। छात्रों ने एडमिशन ब्लॉक के बाहर निकलकर पुलिस पर पथराव और हवाई फायरिंग की। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज कर रबर बुलेट दागी। यूनिवर्सिटी में माहौल बिगड़ता देख 5 जनवरी 2020 तक कॉलेज को बंद कर दिया गया और देर रात ही सभी हॉस्टल खाली करा लिए गए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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