Friday, April 23, 2021
Home रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय राणा अयूब, सबा नकवी, आरफा... एक पाकिस्तानी ने पूरी जमात की खड़ी कर दी...

राणा अयूब, सबा नकवी, आरफा… एक पाकिस्तानी ने पूरी जमात की खड़ी कर दी खटिया, देखें Video

"आप कहती हैं, इंडिया में मुस्लिमों को मसला है… इंडिया में सिर्फ कुछ मुस्लिमों को मसला है भई! जिनकी वजह से इंडिया की एकता को मसला हो रहा है। मुस्लिम उनको काफिर कहता है और हिन्दू उन्हें कट्टरपंथी कहते हैं। आप जैसे लोगों की वजह से उन्हें समस्या आती हैं।"

भारत में कोरोना वायरस (COVID-19) का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरे तबलीगी जमात पर देशवासियों की प्रतिक्रिया को लेकर सबा नकवी, आरफा खानम, राणा अयूब जैसे मजहब विशेष के सोशल मीडिया प्रतिनिधियों की पाकिस्तान स्थित कराची के पूर्व मेयर और पाकिस्‍तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ अजाकिया (Arif Aajakia) ने जमकर क्लास लगाई है।

आरिफ अजाकिया ने यूट्यूब पर अप्रैल 16 को एक वीडियो जारी किया है। इसकी शुरुआत में वे कहते हैं कि यह वीडियो भारत में उनकी बहन सबा नकवी वीडियो के जवाब में है। इसमें वे कहते हैं कि सबा नकवी पकिस्तान के मजहब विशेष के एहसानों को भी गिना रहीं थीं तो मुझे जरूरी लगा कि कुछ चीजों को हमें सही कर लेना चाहिए।

वीडियो में आरिफ अजाकिया कहते हैं, “90 के दशक में कराची-सिंध में जब मिलिट्री ऑपरेशन हो रहा था, उस वक्त हम पर जो जुल्म हो रहा था, उस वक्त भारत से बहुत कम लोग लिखते थे। उस समय सबा साहिबा के वालिद बड़े पैमाने पर हमारे लिए लिखते थे और हमें बहुत हौंसला मिलता था। लेकिन जब हक और सच की बात आती है तो इनके वालिद समेत हर हकपरस्त का यह संदेश होता है कि वो हक़ की बात करें।”

सबा नकवी द्वारा शेयर किए गए वीडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वो बात कर रहीं थीं कि इंडिया में आजकल समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। आरिफ अजाकिया ने कहा कि अगर इंडिया ना होता तो और भी बहुत बड़े स्तर पर आपको निशाना बनाया जाता, यह तो कुछ भी नहीं है।

आरिफ अजाकिया ने कहा, “सेक्युलरिज्म के अनुसार तो आपके यहाँ तबलीगी जमात का नाम लेने से भी समस्या आ रही है, इसे सिंगल सोर्स (एक ही स्रोत से) कहा जा रहा है। जब वहाँ नाम तक लेने की इजाजत नहीं है, जबकि इसी बेवकूफी से यह सब हो रहा है। देश के सभी लोग कुर्बानी दे रहे हैं, सब घर में हैं, और इतने लोगों की कुर्बानी अगर सिर्फ एक तरफ के लोगों से हो रहा है। बदसलूकी और पथराव तो उसी एक समुदाय ने किया है न। ये सब आपके सामने है। फिर भी आपका संविधान इजाजत नहीं दे रहा उस समुदाय का नाम लेने का। पाकिस्तान में एक-एक पत्रकार कह रहा है कि तबलीगियों को रोको, इनकी वजह से आ रहा है। आप इसको फ़ौरन इस्लामोफोबिया कह रही हैं?”

“बदकिस्मती से सबा साहेबा, आरफा, राना इन सबकी जो पत्रकारिता मैं देखता हूँ, तो यह सिर्फ एक समुदाय का बचाव करती हैं, बात यहाँ पर बेवकूफी की हो रही है। क्योंकि आपके मुल्ला निजी जगहों पर नमाज पढ़ रहे हैं, सब जगह नजर आ रहे हैं। क्या फोटोशॉप से उनके सर से टोपी हटा दें? उनकी दाढ़ियाँ हटा दें? क्या करें? और जब बात करते हैं तो आप उसे इस्लामोफोबिया कहते हैं।”

उन्होंने आगे कहा है, “अब आपके कहे हुए एहसानों पर आते हैं – सबसे पहले आते हैं शाहरुख खान! किंग खान- वो पाकिस्तान में होते तो पल्ले दर्जे के एक्टर होते। वो इंडियन हैं इसी कारण वो मशहूर हैं दुनिया में। यह भारत पर शाहरुख़ का एहसान नहीं, बल्कि भारतीय होना शाहरुख़ खान का विशेषाधिकार है। यह उसका अपना मत भी है। उसने इंटरव्यू में यह बातें खुद कहीं हैं। उसने अपने बच्चों का धर्म हिन्दुस्तान बताया है। शाहरुख़ का सारा पैसा हिन्दुस्तान का है, उसमें से अगर उसने चैरिटी की है तो और लोगों ने भी की है। अक्षय ने भी की। दूसरों ने भी की, लिस्ट भरी पड़ी है।”

अजाकिया ने कहा, “मजहब की जब बात आती है तब आप फ़ौरन नाम लेना शुरू कर देते हैं। हिन्दुस्तान की जरूरत दुनिया को है, हॉलीवुड के स्टार पसंद करते हैं भारत में काम करना, क्रिकेट खेलने लोग इंडिया जाना चाहते हैं। टैलेंट को मजहब में तौलना हराम है वैसे भी। शाहरुख को अपने टैलेंट के बदले अच्छी कीमत मिली है। आपने सलमान का नाम क्यों नहीं लिया? उसने जम के चमाटें मारी हैं आजकल के वीडियो में।”

“आप कहती हैं, इंडिया में मुस्लिमों को मसला है… इंडिया में सिर्फ कुछ मुस्लिमों को मसला है भई! जिनकी वजह से इंडिया की एकता को मसला हो रहा है। उसमें मुस्लिम समुदाय को बहुत हो रहा है। खासकर लिबरल को मसला हो रहा है, मुस्लिम उनको काफिर कहता है और हिन्दू उन्हें कट्टरपंथी कहते हैं। आप जैसे लोगों की वजह से उन्हें समस्या आती हैं।”

“आप जैसे पत्रकारों का फर्ज है, इस समय गलती मुस्लिम नहीं बल्कि मुस्लिम लीडर्स की है। आप जैसे लोग का तो फर्ज है इसमें गलती आम मुस्लिम की नहीं है, चाहे वो धार्मिक नेता हैं, चाहे आप जैसे पत्रकार हैं, जो वकालत करती हैं, तमाम मुस्लिमों की। उनका फर्ज है कि पहले अपने समुदाय को समझाओ, आपका घोड़ा खुद आपके नियंत्रण में नहीं है। पहले उनको तो घरों में बंद करो भाई। जहाँ देखो वहाँ पथराव कर रहे हैं, घेराव कर रहे हैं।”

“हमने इतिहास में सुना है कि पुलिस पर पथराव होते हैं, फ़ौज पर पथराव होते हैं ये दुनिया की बदकिस्मत कौम है इंडिया की ये ‘सिंगल सोर्स’ कौम, जो अपने डॉक्टर्स पर, पुलिस पर पथराव कर रहे हैं। खुदा का खौफ करो…”

“पाकिस्तान का मीडिया भरा पड़ा है जो कह रहे हैं तबलीगियों को निकालने और टार्गेट करने के लिए। आपके यहाँ तो मीडिया नहीं बल्कि सोशल मीडिया कर रहा है। सोशल मीडिया तो आम आदमी की बात है। उसमें से अगर एक वर्ग को निकाल दो तो वो लोग भारत को रिप्रजेंट नहीं करते। आप खुद नफरत की दीवार बनाना चाह रही हैं।”

आरिफ अजाकिया ने सबा नकवी को भारत के उन मुस्लिमों की याद दिलाते हुए कहा, जिन्हें भारत में हिन्दुओं ने खूब स्नेह दिया, “आपके सदर रहे हैं इंडिया के मुस्लिम, उन्होंने सम्मान हासिल किया है। आज भी कलाम साहब लोग हिन्दुओं से लेकर सबके रोल मॉडल हैं। कई ऐसे मुस्लिम हैं, जिन्हें हिन्दू बहुत पसंद करते हैं। वहाँ मजहब नजर नहीं आता आपको?

“आप जावेद अख्तर को लिरिक्स लिखना छोड़ने को कह रहे हैं? उनको उनके एक-एक लफ्ज़ की कीमत दी गई है मोहब्बत की सूरत में, आर्थिक रूप से और फैन्स के रूप में। जावेद साहब तो खुद कहते हैं कि वो नास्तिक हैं, तो फिर आपसे सवाल पूछा जाना चाहिए कि फिर आपने उन्हें मुस्लिमों की लाइन में खड़ा क्यों किया?”

“अब आपके मुख्य मुद्दे पर आते हैं। ताजमहल! मुझे सिर्फ इतना बता दो कि ताजमहल क्या मंगोलिया से उठाकर लाया गया था? या वहाँ से पैसे लेकर आए थे और उनसे बनाया गया था? या पैसे, मजदूर, पत्थर लेकर आए थे और उनसे मुस्लिमों ने बनाया था?”

ताजमहल के इतिहास पर बात करते हुए आरिफ कहते हैं, “जिस मुहब्बत की निशानी को आप ये ताजमहल बताती हैं, वो मल्लिका 16वें बच्चे को जन्म देते हुए मरी थी, जिसकी मोहब्बत के गम में ये ताजमहल बना था। और उसी गम में फिर उसकी बहन से शादी की थी, और ये मल्लिका जिसके मरने के गम में ये महल बनाया गया था उसके शौहर को जंग में भेजा था। उसका कत्ल करवाया था और उससे फिर ये शादी रचाई गई थी… ये है आपके गम की निशानी।”

“इस्लाम की तारीख को ना कुरेदो… बहुत गंद है इसमें। इसी मोहब्बत के देवता शाहजहाँ के बेटे ने अपने भाइयों का कत्ल किया था। विनती है तारीखों को ना कुरेदें। ताजमहल की बुनियाद में करोड़ों हिन्दुओं की कब्रें हैं।”

“ताजमहल बनने में साल-दो-साल नहीं बीस साल लगे थे। हजारों मजदूरों ने कुर्बानी दी। वो सब मजदूर हिन्दुस्तानी थे। मुगल वहाँ से ‘कुछ’ लेकर नहीं आए थे… भर-भर के लाए थे। तमाम ताशकंद और बुखारा समरकंद में तरक्कियाँ हुईं थीं। इसी हिन्दुस्तान से लूटकर ले गए थे।”

आरिफ अजाकिया मुस्लिमों के इतिहास पर विस्तृत बात कहना चाहते थे लेकिन ‘वीडियो के लम्बे’ हो जाने की वजह से उन्होंने खुद को समेटते हुए कहा, “मुगलों का सेकुलरिज्म भी हमें ना दिखाया करें। सबको पता है। वीडियो लम्बी हो जाती हैं वरना मैं बैठकर चार-चार घंटे के आपको लेक्चर दे सकता हूँ।”

आरफा खानम शेरवानी और साम्प्रदायिक नारे

“जहाँ आपके जैसे पत्रकार और आरफा खानम कहती हैं कि भारत माता की जय मत कहो, यह सांप्रदायिक है… इसमें देवी की पूजा आ जाती है। भारत माता की जय का मतलब भारत माता जिंदाबाद… पाकिस्तान जिंदाबाद… यह तो हर मुल्क में है।”

“नागरिकता कानून के समय भी ये ट्वीट करती हैं कि ‘ला इलाहा इलल्लाह’ साम्प्रदायिक हैं। नहीं हैं, सेक्युलर हैं क्योंकि यह एक समूह के लोगों की ताकत है। इस तरह की राजनीति कर के आप इंडिया के लोगों को और तकलीफ में डाल देती हैं। अभी सिर्फ मुस्लिमो को ट्यूशन की जरूरत है, ना कि हिन्दुओं को। बाद में इस्लामोफोबिया और बाकी सारी चीजें करते रहें लेकिन इस समय सबसे पहली जरूरत आम मुस्लिम को समझाने की है।”

भारत में तबलीगी जमात के कारण हुए कोरोना वायरस के संक्रमण के तथ्य बताते हुए उन्होंने कहा, “33% कोरोना वायरस इंडिया में तबलीगी जमात की बेवकूफियों की वजह से फैला है। फिर आप बहाने बनाते नजर आते हैं कि सरकार ने ये क्यों नहीं किया, वो क्यों नहीं किया… आपकी कोई जिमेम्दारी नहीं थी क्या? समुदाय के रूप में आपकी क्या जिम्मेदारी है? ताने मारना? मुस्लिमों के एहसान गिनवाना?”

“इसके बाद आरिफ अजाकिया ने हाल ही में मुरादाबाद में डॉक्टर्स की टीम पर हुए हमले का जिक्र भी किया। और सवाल किए कि सबा नकवी जैसे लोगों ने अपने समुदाय को यह क्यों नहीं बताया कि आपका दुश्मन डॉक्टर्स नहीं, इन्डियन नहीं, बल्कि कोरोना वायरस है। उन्होंने कहा कि सबा नकवी ने उल्टा यह संदेश दिया कि देश मुस्लिमों का दुश्मन है। इस समय ताने मरना और एहसान जताना नहीं है।”

उन्होंने कहा कि हमें अपने गिरेबान में झाँकने की जरूरत है। इसके बाद मजहब में राजस्व तलाशने की बात करते हुए उन्होंने कहा, “ताजमहल से जो राजस्व आता है वह एक शासक के बनाए हुए स्मारक से आता है। उसे कभी भी मजहबी पैमाने में मत तौलिए। स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी, सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मारक भी अब एक राजस्व का स्रोत है। तो आप उसे सिर्फ हिन्दू स्मारक नहीं कह सकते हैं न?”

“स्मारकों के मजहब सिर्फ मजहबी जगहों पर होते हैं, जैसे मक्का में हैं, मदीना में हैं। वरना मजहबी नहीं होते। आपके अजमेर में एक मजार पे शायद मुस्लिमों से ज्यादा हिन्दू जाते हैं। मेरा उसी समुदाय से आने के कारण मेरी जिम्मेदारी बढ़ जाती है इस वजह से मैं इन सब बारे में बात कर रहा हूँ।”

इस वीडियो को आप इस लिंक पर देख सकते हैं –

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Covaxin के लिए जमा कर लीजिए पैसे, कंपनी चाहती है ज्यादा से ज्यादा कीमत: मनी कंट्रोल में छपी खबर – Fact Check

मनी कंट्रोल ने अपने लेख में कहा, "बाजार में कोविड वैक्सीन की कीमत 1000 रुपए, भारत बायोटेक कोवैक्सीन के लिए चाहता है अधिक से अधिक कीमत"

PM मोदी के साथ मीटिंग को केजरीवाल ने बिना बताए कर दिया Live: बात हो रही थी जिंदगी बचाने की, करने लगे राजनीति

इस बैठक में केजरीवाल ने लाचारों की तरह पहले पीएम मोदी से ऑक्सीजन को लेकर अपील की और बाद में बातचीत पब्लिक कर दी।

उनके पत्थर-हमारे अन्न, उनके हमले-हमारी सेवा: कोरोना की लहर के बीच दधीचि बने मंदिरों की कहानी

देश के कई छोटे-बड़े मंदिर कोरोना काल में जनसेवा में लगे हैं। हम आपको उन 5 मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जिनकी सेवा ने सबको प्रभावित किया है।

विरार हो या भंडारा, सवाल वहीः कब तक जड़ता को मुंबई स्पिरिट या दिलेर दिल्ली बता मन बहलाते रहेंगे

COVID-19 की दूसरी लहर बहुत तेज है और अधिकतर राज्यों में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। पर ऐसा क्यों है कि महाराष्ट्र सरकार के संक्रमण रोकने के प्रयास शुरू से ही असफल दिखाई देते रहे हैं?

B.1.618 ट्रिपल म्यूटेंट कोरोना वायरस: 60 दिनों में 12% केस इसी के, टीकों-एंटीबॉडी का मुकाबला करने में भी सक्षम

"बंगाल में हाल के महीनों में B.1.618 बहुत तेजी से फैला है। B.1.617 के साथ मिलकर इसने पश्चिम बंगाल में बड़ा रूप धारण कर लिया है।"

शाहनवाज दूत है, कोरोना मरीजों के लिए बेच डाला कार: 10 महीने पुरानी खबर मीडिया में फिर से क्यों?

'शाहनवाज शेख ने मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर मुहैया कराने के लिए अपनी SUV बेच डाली' - जून 2020 में चली खबर अप्रैल 2021 में फिर चलाई जा रही।

प्रचलित ख़बरें

‘प्लाज्मा के लिए नंबर डाला, बदले में भेजी गुप्तांग की तस्वीरें; हर मिनट 3-4 फोन कॉल्स’: मुंबई की महिला ने बयाँ किया दर्द

कुछ ने कॉल कर पूछा क्या तुम सिंगल हो, तो किसी ने फोन पर किस करते हुए आवाजें निकाली। जानिए किस प्रताड़ना से गुजरी शास्वती सिवा।

सीताराम येचुरी के बेटे का कोरोना से निधन, प्रियंका ने सीताराम केसरी के लिए जता दिया दुःख… 3 बार में दी श्रद्धांजलि

प्रियंका गाँधी ने इस घटना पर श्रद्धांजलि जताने हेतु ट्वीट किया। ट्वीट को डिलीट किया। दूसरे ट्वीट को भी डिलीट किया। 3 बार में श्रद्धांजलि दी।

पाकिस्तान के जिस होटल में थे चीनी राजदूत उसे उड़ाया, बीजिंग के ‘बेल्ट एंड रोड’ प्रोजेक्ट से ऑस्ट्रेलिया ने किया किनारा

पाकिस्तान के क्वेटा में उस होटल को उड़ा दिया, जिसमें चीन के राजदूत ठहरे थे। ऑस्ट्रेलिया ने बीआरआई से संबंधित समझौतों को रद्द कर दिया है।

अम्मी कोविड वॉर्ड में… फिर भी बेहतर बेड के लिए इंस्पेक्टर जुल्फिकार ने डॉक्टर का सिर फोड़ा: UP पुलिस से सस्पेंड

इंस्पेक्टर जुल्फिकार ने डॉक्टर को पीटा। ये बवाल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कोविड-19 लेवल थ्री स्वरूपरानी अस्पताल (SRN Hospital) में हुआ।

रेप में नाकाम रहने पर शकील ने बेटी को कर दिया गंजा, जैसे ही बीवी पढ़ने लगती नमाज शुरू कर देता था गंदी हरकतें

मेरठ पुलिस ने शकील को गिरफ्तार किया है। उस पर अपनी ही बेटी ने रेप करने की कोशिश का आरोप लगाया है।

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में सोए दो साधुओं का गला कुदाल से काटा, ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले महंत के आश्रम पर हमला

बिहार के मधुबनी जिला स्थित खिरहर गाँव में 2 साधुओं की गला काट हत्या कर दी गई है। इससे पहले पास के ही बिसौली कुटी के महंत के आश्रम पर रात के वक्त हमला हुआ था।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

293,859FansLike
83,529FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe