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जिहादियों का नया अड्डा: मोहम्मद यूनुस के शासन में अराजकता, आर्थिक तबाही और इस्लामी कट्टरपंथ की चपेट में आता जा रहा बांग्लादेश; अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार

मोहम्मद यूनुस के शासन में बांग्लादेश अराजकता, आतंकवाद और तानाशाही की चपेट में है। अल्पसंख्यक समुदाय असुरक्षित हैं, आतंकियों को संरक्षण मिल रहा है और लोकतांत्रिक ढाँचा टूटता जा रहा है।

17 करोड़ से अधिक आबादी वाला बांग्लादेश आज खतरनाक हालात की ओर बढ़ रहा है। हर गुजरते दिन के साथ यह देश न सिर्फ दक्षिण एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा बनता जा रहा है।

प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद, अंतरिम सरकार की बागडोर मोहम्मद यूनुस ने संभाली। लेकिन उनके नेतृत्व में देश अराजकता, आर्थिक तबाही और बढ़ती इस्लामी कट्टरपंथ की चपेट में आ गया है।

सत्ता संभालते समय यूनुस ने लोकतांत्रिक सुधार, मानवाधिकारों की रक्षा, प्रेस की आजादी और कानून के राज को बहाल करने का वादा किया था। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। देश की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है, कट्टरपंथी संगठन फिर से मजबूत हो रहे हैं और बड़ी संख्या में युवा चरमपंथ और जिहादी सोच की ओर खिंचते जा रहे हैं।

शुरुआत में मोहम्मद यूनुस को सुधारक माना गया और लोग उन्हें बांग्लादेश की कमजोर लोकतंत्र को बचाने वाला समझने लगे थे। लेकिन यह उम्मीद जल्द ही टूट गई। भारतीय रणनीतिकार प्रोफेसर ब्रह्मा चेलानी ने चेतावनी देते हुए कहा कि बांग्लादेश अब उसी रास्ते पर बढ़ रहा है जिस पर पाकिस्तान गया था।

इसी बीच, यूनुस का नोबेल शांति पुरस्कार भी दोबारा विवादों में आ गया है। नॉर्वे की नोबेल कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर ओले डैनबोल्ट म्योस ने कभी उन्हें इस्लाम और पश्चिम के बीच पुल की तरह बताया था। लेकिन अब यह माना जा रहा है कि यह पुरस्कार उन्हें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की सालों की लॉबिंग के चलते मिला था।

मोहम्मद यूनुस और क्लिंटन परिवार के रिश्ते गहरे और चिंताजनक माने जा रहे हैं। 26 सितंबर 2024 को क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव के एक कार्यक्रम में यूनुस ने खुले तौर पर उन नेताओं को पेश किया, जिन्हें बांग्लादेश में हुए तथाकथित ‘जनविद्रोह’ के पीछे माना जाता है। अब यह विद्रोह बड़े पैमाने पर एक जिहादी तख्तापलट समझा जा रहा है।

उसी कार्यक्रम में बिल क्लिंटन ने महफूज आलम की तारीफ की, जो कि हिज़्ब उत-तहरीर का नेता है  यह संगठन दुनिया भर में आतंकवादी घोषित है।

गैटस्टोन इंस्टीट्यूट की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूनुस क्लिंटन फाउंडेशन के बड़े दानदाताओं में से हैं। वहीं, विकीलीक्स के 2007 में लीक हुए एक केबल के मुताबिक, हिलेरी क्लिंटन ने बांग्लादेश सेना पर दबाव डाला था कि वह अपने करीबी दोस्त यूनुस को उस समय की सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाए।

शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद इस्लामी और जिहादी संगठनों को खुला मैदान मिल गया है और वे पहले से कहीं ज्यादा ताकत और बेखौफी के साथ सक्रिय हो गए हैं।

अटलांटिक काउंसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, कट्टरपंथियों ने बांग्लादेश में मूर्तियों और कला कृतियों को तोड़फोड़ कर नष्ट कर दिया। इसके तुरंत बाद अल-कायदा की मीडिया शाखा ‘अस-सहाब’ ने बारह पन्नों का बयान जारी किया, जिसमें इन घटनाओं को मुसलमानों की जीत बताते हुए बांग्लादेश को दक्षिण एशिया में इस्लामी फतह का नया केंद्र बताया गया।

मार्च में हिज़्ब उत-तहरीर ने ढाका में ‘मार्च फॉर खिलाफा’ का आयोजन किया, जिसका व्यापक प्रचार हुआ और सरकार ने इसे रोकने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की। ये घटनाएँ सिर्फ कानून-व्यवस्था के पतन को नहीं दिखातीं, बल्कि इस बात की ओर भी इशारा करती हैं कि देश अब एक जिहादी राज्य की ओर बढ़ रहा है।

भारत में निर्वासन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यूनुस को ‘आतंकी नेता’ करार दिया और उन पर आरोप लगाया कि वे बांग्लादेश को अमेरिका के हाथों बेच रहे हैं। उनकी पार्टी की छात्र इकाई ने कहा कि देश ‘लोकतंत्र का कब्रिस्तान’ बन चुका है।

इस्लामी विद्रोह के एक साल बाद इंडिया टुडे डिजिटल ने एक लेख में खुलासा किया कि हसीना-विरोधी ताकतें वर्षों से प्रशासन में अपने वफादार बिठाती रही थीं। जब छात्र आंदोलन चरम पर पहुँचा, तो इन लोगों ने सरकारी संस्थाओं को ठप कर दिया, जिससे शासन पूरी तरह ध्वस्त हो गया।

अब बांग्लादेश की स्थिति वही हो गई है जैसी पाकिस्तान की 1980 के दशक में थी। एक ऐसा विचारधारा-प्रधान राज्य, जो जिहादी ताकतों का बंधक बन चुका है। हिंदू, बौद्ध और ईसाई, जिन्हें असली ‘धरतीपुत्र’ कहा जाता है या तो देश से खदेड़े जा रहे हैं या टूटे-फूटे मंदिरों के मलबे में दबाए जा रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस ने एक संपादकीय में लिखा कि मोहम्मद यूनुस के वादों के बावजूद पिछले एक साल में बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरवाद तेजी से बढ़ा है और कानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह गई है। अवामी लीग के नेताओं को बड़ी संख्या में जेल भेज दिया गया जबकि आतंकवाद से जुड़े लोगों को या तो रिहा कर दिया गया या उन्हें भागने दिया गया।

बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान का पैतृक घर भी नष्ट कर दिया गया। देश की बहुलतावादी पहचान अब घोर संकट में है। अमेरिका की कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम ने भी अपनी रिपोर्ट में इन चिंताओं की पुष्टि की और कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों पर व्यवस्थित दबाव लगातार बढ़ रहा है।

मई में हजारों हिफाजत-ए-इस्लाम समर्थकों ने मुस्लिम महिलाओं को बराबरी के अधिकार देने के प्रयासों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान हिंसक अपराध बढ़ रहे हैं और जनता पर बढ़ते कर्ज और खराब शासन की वजह से अर्थव्यवस्था लगातार डगमगा रही है।

फर्स्टपोस्ट ने बांग्लादेश की स्थिति को साफ शब्दों में बताया, “देश अब पूरी तरह अराजकता में है। अवामी लीग के तहत चलने वाली रंगदारी अब अलग-अलग राजनीतिक गुटों, कट्टरपंथी छात्र संगठनों और आपराधिक गिरोहों की खुली प्रतिस्पर्धा में बदल गई है।”

शेख हसीना ने सत्ता परिवर्तन को अंधकारमय पल बताया और यूनुस की सरकार को असंवैधानिक और तानाशाही करार दिया। 5 अगस्त 2025 को यूनुस ने फरवरी तक चुनाव कराने की घोषणा तो की, लेकिन उनके कदम कुछ और ही इशारा कर रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास को तानाशाही संग्रहालय में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नए सरकारी ढाँचे की तैयारी न होना यह दिखाता है कि लोकतंत्र बहाल करने की उनकी कोई मंशा नहीं है। उधर, यूनुस तुर्की, ईरान, पाकिस्तान और फिलिस्तीन जैसे इस्लामी देशों से गहरे रिश्ते बना रहे हैं और लगातार इस्राइल-विरोधी प्रचार कर रहे हैं।

घरेलू स्तर पर इस्लामी आतंकवाद खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका है। 1970-80 के दशक में अफगानिस्तान जाकर सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने वाले मदरसा-शिक्षित बांग्लादेशी युवाओं ने लौटकर हूजी-बी (HuJI-B) और जेएमबी (JMB) जैसे संगठन बनाए।

आज इनके साथ अंसर अल इस्लाम (अल-कायदा की बांग्लादेश शाखा), हिज्ब उत-तहरीर, हिफाजत-ए-इस्लाम, खिलाफत मजलिस और इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश जैसे कई नए संगठन भी सक्रिय हैं।

हाल ही में अमेरिकी राजनयिक ट्रेसी ऐन जैकबसन से मुलाकात में यूनुस ने दावा किया कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस है। लेकिन जनवरी में उनकी ही सरकार ने अल-कायदा से जुड़े उस आतंकी को माफ करने की कोशिश की, जिस पर 2015 में एक अमेरिकी नागरिक की हत्या का आरोप है और जिसके सिर पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने 5 मिलियन डॉलर का इनाम रखा है। यह दिखाता है कि यूनुस के दावे झूठे हैं और वे आतंकी ताकतों को बचा रहे हैं।

दुनिया अब और चुप नहीं रह सकती। बांग्लादेश की स्थिति सिर्फ एक आंतरिक राजनीतिक संकट की नहीं है बल्कि एक ऐसा टाइम बम है जिसका असर पूरी दुनिया पर होगा।

देश तेजी से जिहादियों का अड्डा, नशीली दवाओं की तस्करी, हथियारों की तस्करी और कट्टरपंथी विचारधारा का केंद्र बनता जा रहा है। अगर इसे रोका नहीं गया तो जल्द ही हजारों जिहादी सीमाओं को पार कर पश्चिमी सभ्यता, ईसाइयों, यहूदियों, हिंदुओं और सेक्युलर लोगों को निशाना बनाएँगे।

अब शालीन कूटनीति का समय खत्म हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय खासकर अमेरिका, भारत, यूरोपीय संघ और क्षेत्रीय सहयोगियों को सख़्त कदम उठाने होंगे। आर्थिक प्रतिबंध, वीजा रोक, वित्तीय निगरानी और आतंकवाद-विरोधी कार्रवाइयों के जरिए यूनुस शासन को जवाबदेह ठहराना जरूरी है। जितनी देर दुनिया इंतजार करेगी, उतना ही अंधेरा बढ़ेगा। बांग्लादेश का पतन उसकी सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा। इसके नतीजे वैश्विक होंगे विनाशकारी और अपूरणीय।

(मूल रूप से यह खबर अंग्रेजी में सला उद्दीन शोएब चौधरी ने लिखी है, जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

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Salah Uddin Shoaib Choudhury
Salah Uddin Shoaib Choudhury
Salah Uddin Shoaib Choudhury is an internationally acclaimed multi-award-winning anti-militancy journalist, writer, research scholar, and counterterrorism specialist. He regularly writes for local and international newspapers.

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