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‘कबॉट्स केवल गॉड से बात करते हैं’: कौन हैं ‘बोस्टन ब्राह्मण’, अमेरिका को आबाद करने में इनका कितना योगदान, कोल्डप्ले स्कैंडल के बाद क्यों हो रही चर्चा?

असल में आज का अमेरिका काफी हद तक इन्हीं बोस्टन ब्राह्मणों का बसाया हुआ है। उन्होंने बोस्टन लैटिन स्कूल (अमेरिका का पहला हाईस्कूल), हार्वर्ड, एंडोवर, फिलिप्स एक्सेटर जैसे एलीट स्कूल्स बनाए।

हाल ही में एक कोल्डप्ले कंसर्ट ने दुनिया भर में हलचल मचा दी, जब एक किस कैम ने एस्ट्रोनॉमर कंपनी की HR एक्जीक्यूटिव क्रिस्टी कबॉट को उनके CEO एंडी बायरन के साथ गले लगाते हुए कैद कर लिया। दोनों शादीशुदा हैं, लेकिन कंसर्ट में वे एक-दूसरे के करीब नजर आए। क्रिस्टी ने कैमरे से मुँह छिपाने की कोशिश की, जबकि एंडी ने चेहरा फेर लिया।

इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया और कोल्डप्ले के सिंगर क्रिस मार्टिन ने मजाक में कहा कि या तो ये अफेयर है या वे बहुत शर्मीले हैं। क्रिस्टी अब कंपनी से छुट्टी पर हैं और ये स्कैंडल अब सिर्फ एक ऑफिस रोमांस से ज्यादा बन गया है।

इस घटना ने क्रिस्टी के पति एंड्र्यू कबॉट की फैमिली को फिर से दुनिया की नजरों में ला दिया। एंड्र्यू प्राइवेटियर रम कंपनी के मालिक हैं और कबॉट फैमिली बोस्टन की सबसे पुरानी और अमीर फैमिलीज में से एक है। बोस्टन की ये फैमिलीज ‘बोस्टन ब्राह्मण’ के नाम से जानी जाती है। ये फैमिली सदियों से न्यू इंग्लैंड की सत्ता और संस्कृति पर छाई हुई है।

इस स्कैंडल ने न सिर्फ व्यक्तिगत जीवन पर सवाल उठाए, बल्कि अमेरिका की इस पुरानी एलीट क्लास की परतें भी खोल दीं, जहाँ धन, परंपरा और गोपनीयता का बोलबाला है। ऐसे में अब हिंदुस्तान के लोग भी जानना चाहते हैं कि ये बोस्टन ब्राह्मण कौन हैं, और कबॉट फैमिली की ये पहचान कैसे बनी।

अमेरिका में बसे सबसे पुराने यूरोपीय परिवारों में से एक

कबॉट फैमिली बोस्टन की उन चुनिंदा फैमिलीज में से एक है, जिन्हें ‘फर्स्ट फैमिलीज ऑफ बोस्टन’ कहा जाता है। ये फैमिली 10 पीढ़ियों से न्यू इंग्लैंड में बसी हुई है और इनकी जड़ें 17वीं सदी के यूरोपीय आप्रवासियों से जुड़ी हैं। फैमिली की शुरुआत जॉन कबॉट से हुई, जो 1680 में जर्सी द्वीप (ब्रिटिश क्राउन डिपेंडेंसी) से सलेम, मैसाचुसेट्स आए थे।

कबॉट फैमिली के जॉन और उनके बेटे जोसेफ कबॉट ने जहाजरानी का बिजनेस शुरू किया, जो अफीम, रम और गुलामों की तस्करी तक फैला। 18वीं सदी में ये बोस्टन के सबसे अमीर मर्चेंट बन गए। उनके बेटों जोसेफ जूनियर, जॉर्ज और सैमुअल ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी छोड़कर शिपिंग में हाथ आजमाया और फैमिली की दौलत को आसमान छू लिया।

कबॉट फैमिली की अमीरी का राज कई बिजनेस में छिपा है। शुरुआत में शिपिंग से, फिर 19वीं सदी में कार्बन ब्लैक (सूट) का व्यापार, जो कार के टायरों में इस्तेमाल होता है। गॉडफ्रे लॉवेल कबॉट ने 1861 में कबॉट कॉर्पोरेशन की नींव रखी, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी कार्बन ब्लैक प्रोड्यूसर है। इसके अलावा एंड्र्यू कबॉट (क्रिस्टी कबॉट के पति) प्राइवेटियर रम के छठे जनरेशन के मालिक हैं, जो फैमिली का पुराना ब्रैंड है।

1972 में न्यू यॉर्क टाइम्स ने फैमिली की दौलत को 200 मिलियन डॉलर आँका था, जो आज के हिसाब से करीब 15.4 बिलियन डॉलर (करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये) है। फैमिली ने हार्वर्ड, MIT, नॉर्विच यूनिवर्सिटी और पर्किन्स स्कूल फॉर ब्लाइंड जैसी संस्थाओं को दान दिए। राजनीति में भी इनका दबदबा रहा। इस परिवार के जॉर्ज कबॉट सीनेटर थे, हेनरी कबॉट लॉज राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और जॉन मूर्स कबॉट कई देशों में अमेरिकी राजदूत।

फैमिली के वारिस फ्रांसिस कबॉट ने मजाक में कहा कि वे दो चीजों में इंटरेस्टेड हैं- अमीर औरतों से शादी और ग्रुप सिंगिंग। आज क्रिस्टी और एंड्र्यू का 2.2 मिलियन डॉलर का घर न्यू हैम्पशायर में है, लेकिन फैमिली की असली ताकत उनकी पुरानी दौलत और कनेक्शंस में है।

बोस्टन ब्राह्मण होने का मतलब है एलीट

बोस्टन ब्राह्मण अमेरिका की वो पुरानी एलीट क्लास है, जो 18वीं से 20वीं सदी तक न्यू इंग्लैंड की संस्कृति, राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज पर छाई रही। ये ज्यादातर व्हाइट एंग्लो-सैक्सन प्रोटेस्टेंट (WASP) फैमिलीज हैं, जो पुरिटन कॉलोनिस्ट्स के वंशज हैं। नाम ‘बोस्टन ब्राह्मण’ 1861 में ओलिवर वेंडेल होम्स सीनियर ने अपनी किताब ‘एल्सी वेनर’ में गढ़ा। उन्होंने बोस्टन की ऊपरी क्लास को ‘ब्राह्मण कास्ट ऑफ न्यू इंग्लैंड’ कहा, क्योंकि वे खुद को एक चमकती हुई शहर बनाने के लिए चुने हुए मानते थे- कड़ी मेहनत, किफायत, संस्कृति और शिक्षा पर जोर। ये फैमिलीज जैसे एपल्टन, बेकन, कबॉट, कूलिज, फोर्ब्स, लॉज, लॉवेल, पर्किन्स, रसेल, साल्टनस्टॉल, शॉ और विंथ्रोप- पुरानी दौलत और विरासत पर टिकी हैं।

इनकी पहचान कैसे बनी?

17वीं सदी में इंग्लैंड से आए पुरिटन्स ने बोस्टन को बसाया। 18वीं सदी में शिपिंग, मर्चेंट ट्रेड और बैंकिंग से अमीर बने। 19वीं सदी तक वे बोस्टन की अर्थव्यवस्था पर काबिज थे- चाइना ट्रेड, रेलरोड, टेक्सटाइल मिल्स। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी उनके कंट्रोल में थी, जहाँ वे पढ़ते और पढ़ाते थे। वे संस्कृति के संरक्षक बने, जिसमें उन्होंने बोस्टन सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा, म्यूजियम ऑफ फाइन आर्ट्स, बोस्टन एथेनियम जैसी संस्थाएँ बनाईं। उन्होंने राजनीति में मौजूदा समय की पार्टी रिपब्लिक्स को भी सहयोग दिया। हालाँकि इन परिवारों ने प्रवासियों के साथ बुरा किया, साथ ही ईसाईयों में भी वो आयरिश कैथोलिकों से दूरी बरतते रहे।

भारत के ब्राह्मणों से बिल्कुल अलग हैं ये एलीट ब्राह्मण

ये भारत के ब्राह्मणों से बिलकुल अलग हैं। भारत में ब्राह्मण धार्मिक कास्ट है – जो वेदों, पूजा और ज्ञान के रखवाले हैं, जन्म से तय। बोस्टन ब्राह्मण कोई धार्मिक ग्रुप नहीं, बल्कि सेकुलर एलीट क्लास है, जो दौलत, शिक्षा और विरासत पर आधारित। वे यूनिटेरियन या एपिस्कोपल चर्च फॉलो करते हैं, लेकिन रिलिजन से ज्यादा कल्चर पर जोर।

नाम में भारत की छाया इसलिए है क्योंकि होम्स ने हिंदू ब्राह्मणों की तरह उन्हें हाईएस्ट इंटेलेक्चुअल क्लास माना। भारत के ब्राह्मण रिलिजियस ड्यूटीज निभाते हैं, जबकि बोस्टन वाले बिजनेस और सोसाइटी लीड करते हैं। अंतर ये कि बोस्टन ब्राह्मणों में मैरिज से एंट्री हो सकती है, जबकि भारत में कास्ट जन्म से फिक्स।

धार्मिक आजादी के लिए अमेरिका आए, और सबको दी भी

बोस्टन ब्राह्मणों की कहानी इंग्लैंड और कुछ हॉलैंड से शुरू होती है। 17वीं सदी में पुरिटन्स- इंग्लिश प्रोटेस्टेंट्स जो चर्च ऑफ इंग्लैंड से असहमत थे- धार्मिक आजादी के लिए अमेरिका आए। 1620 में मेफ्लावर जहाज से प्लिमथ कॉलोनी बसाई। 1630 में जॉन विंथ्रोप ने बोस्टन की नींव रखी, जो ‘शाइनिंग सिटी ऑन ए हिल’ बनना था। कुछ डच भी आए, लेकिन मेनली इंग्लिश गेंट्री और मजिस्ट्रेट्स के वंशज। वे मैसाचुसेट्स में सेटल हुए, फार्मिंग से ट्रेड में शिफ्ट हुए। 18वीं सदी में ब्रिटिश ट्रूप्स से लड़कर इंडिपेंडेंस जीती। 19वीं सदी में इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन से अमीर बने, जैसे फ्रांसिस कबॉट लॉवेल ने टेक्सटाइल मिल्स शुरू कीं।

इन्हीं बोस्टन ब्राह्मणों का बसाया हुआ है आज का अमेरिका

असल में आज का अमेरिका काफी हद तक इन्हीं बोस्टन ब्राह्मणों का बसाया हुआ है। वे फाउंडिंग फादर्स के डिसेंडेंट्स हैं, जैसे जॉन एडम्स, जॉन क्विंसी एडम्स। उन्होंने बोस्टन लैटिन स्कूल (अमेरिका का पहला हाईस्कूल), हार्वर्ड, एंडोवर, फिलिप्स एक्सेटर जैसे एलीट स्कूल्स बनाए।

अर्थव्यवस्था में रेलरोड, यूनियन पैसिफिक, जनरल इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियाँ फंड कीं। कल्चर में लिटरेचर (हॉथोर्न, एमर्सन), म्यूजियम्स, ऑर्केस्ट्रा दिए। राजनीति में जॉन केरी, हेनरी कबॉट लॉज जैसे लीडर्स दिए। वे अमेरिका को ‘अरिस्टोक्रेसी ऑफ वेल्थ’ बनाना चाहते थे, लेकिन डेमोक्रेसी से टकराते रहे।

ये एलीट क्लास है, जहाँ दौलत से ज्यादा रेस्ट्रेंट और ट्रेडिशन मायने रखते हैं। उनका बातचीत का अंदाज रिजर्व्ड और ब्रिटिश-टिंग्ड एक्सेंट वाला है, जैसे ‘कॉड’ को ‘काह्ड’ बोलना। उनका उच्चारण अंग्रेजों के अधिक करीब है और इसे उन्होंने बरकरार रखा।
पहनावे के मामले में भी बोस्टन ब्राह्मण सबसे अलग दिखते हैं। वो चमकदार कपड़े नहीं पहनते, लेकिन अच्छे सूट पहनना अपनी परंपरा का हिस्सा समझते हैं।

डाइट एक ट्रेडिशनल यानी पक्की। हर संडे रोस्ट बीफ और मंडे कोल्ड लेफ्टओवर्स, जिससे ‘कोल्ड रोस्ट बोस्टन’ फ्रेज आया, जिसे अपने यहाँ बासी खाना कहते हैं। शादी विवाह के मामले में भी काफी कड़े नियम हैं। बोस्टन फैमिली की शादियाँ अक्सर बोस्टन फैमिली में ही होती हैं, या फिर काफी अमीर घरानों में।

बोस्टन ब्राह्मण आर्ट्स, चैरिटी, कम्युनिटी लीडरशिप में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, लेकिन किसी भी तरह के विवाद से खुद को दूर रखते हैं।

एलीटिज्म का उड़ता रहा है मजाक

कविता ‘कबॉट्स टॉक ओनली टू गॉड’ इस क्लास की हाईब्रो एटीट्यूड को कैद करती है-

“एंड दिस इज गुड ओल्ड बोस्टन

द होम ऑफ द बीन एंड द कॉड

वेयर द लॉवेल्स टॉक ओनली टू कबॉट्स

एंड द कबॉट्स टॉक ओनली टू गॉड।

इसे जॉन कोलिंस बॉसिडी ने लिखा था, जो बोस्टन की एलीट की हाई सोसाइटी को मजाक उड़ाती है। कबॉट फैमिली अपर क्लास इसलिए है क्योंकि वे पुरानी दौलत (ओल्ड मनी) के मालिक हैं, नई अमीरी (न्यू मनी) से अलग। वे अमीर हैं क्योंकि सदियों से ट्रेड, इंडस्ट्री और इन्वेस्टमेंट्स से- शिपिंग से कार्बन ब्लैक तक। लेकिन उनकी अमीरी दिखावे में नहीं, बल्कि पावर और इंस्टीट्यूशंस में है। केनेडी फैमिली जैसी आयरिश-कैथोलिक डायनेस्टी को वे बाद की बात मानते हैं और भाव नहीं देते।

कबॉट फैमिली के बारे में सबकुछ जानें तो पता चलता कि वे बोस्टन ब्राह्मणों का परफेक्ट उदाहरण हैं। जॉन कबॉट से शुरू होकर उन्होंने स्लेव और ओपियम ट्रेड से दौलत बनाई, लेकिन बाद में चैरिटी से इमेज साफ की। पॉल कोडमैन कबॉट ने अमेरिका का पहला म्यूचुअल फंड बनाया,और फैमिली हार्वर्ड की एंडाउमेंट को मैनेज करती। वे अपर क्लास हैं क्योंकि सोसाइटी में उनका स्टेटस जन्म से मिलता है, न कि सिर्फ पैसों से।

आज भी वे प्राइवेट क्लब्स, एलीट स्कूल्स और बिजनेस में छाए हैं। लेकिन कोल्ड प्ले जैसे स्कैंडल्स उनकी सीक्रेसी को चैलेंज करते हैं। बोस्टन ब्राह्मण अमेरिका की अरिस्टोक्रेसी हैं, जो हिंदुस्तान के लोगों को बताते हैं कि पुरानी दौलत कैसे दुनिया चलाती है।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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