अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम से सैन्य कार्रवाई शुरू की। दोनों देशों ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए, जिसमें ईरान के कई शहरों में भारी तबाही हुई। इन हमलों में US ने आधुनिक हथियारों और ड्रोनों का इस्तेमाल किया। ये हथियार इतने ताकतवर हैं कि चीन से खरीदे गए ‘HQ-9B’ एयर डिफेंस सिस्टम से भी ईरान खुद को बचाने में नाकाम रहा।
सबसे पहले जानते हैं कि ईरान के खिलाफ अमेरिका ने किन-किन हथियार और मिसाइलों का इस्तेमाल किया और उनकी विशेषताएँ क्या हैं?
टॉमहॉक क्रूज मिसाइल
सबसे प्रमुख हथियार ‘टॉमहॉक क्रूज’ मिसाइल है। यह लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है, जिसे युद्धपोत या पनडुब्बी से छोड़ा जाता है। इसकी मारक क्षमता 1600 किलोमीटर तक मानी जाती है और यह जमीन पर बने सटीक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होती है। यह बहुत कम ऊँचाई पर उड़ती है, जिससे इसे रडार से पकड़ना मुश्किल होता है।
F-35 फाइटर जेट
F-35 एक आधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमान है, जिसे रडार आसानी से पकड़ नहीं पाता। यह दुश्मन की सीमा में चुपचाप घुसकर हमला करने में सक्षम है। यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन कर सकता है। इसमें आधुनिक सेंसर और सटीक बम-मिसाइल लगाने की क्षमता होती है।
F/A-18 फाइटर जेट
F/A-18 बहुउद्देश्यीय फाइटर जेट है, जिसे अक्सर एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ाया जाता है। यह तेज गति से दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकता है। इसमें अलग-अलग तरह की मिसाइल और बम लगाए जा सकते हैं। यह हवाई लड़ाई और जमीन पर हमले, दोनों में काम आता है।
LUCAS कमीकाजे ड्रोन
LUCAS एक बिना पायलट के हमला करने वाला ड्रोन है, जो क्ष्य के ऊपर मंडराता है और मौका मिलते ही टकराकर विस्फोट कर देता है। इसे सस्ता और तेजी से इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है। ऐसे ड्रोन छोटे ठिकानों या वाहनों को निशाना बनाने में कारगर होते हैं।
HIMARS रॉकेट सिस्टम
HIMARS एक चलती-फिरती रॉकेट लॉन्चर गाड़ी है, जो जमीन से ही दूर तक रॉकेट दाग सकती है। इसे जल्दी तैनात किया जा सकता है और फायर करने के बाद तुरंत स्थान बदला जा सकता है। यह दुश्मन के गोदाम, मिसाइल साइट या सैन्य ठिकानों को सटीक निशाना बनाने में इस्तेमाल होता है।
पेट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम
पेट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिका का जमीन से दागा जाने वाली रक्षा प्रणाली है, जिसे दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और लड़ाकू विमानों को हवा में ही मार गिराने के लिए बनाया गया है। इसमें ताकतवर रडार लगा होता है, जो दूर से ही खतरे को पहचान लेता है। अमेरिका इसे कई युद्ध में इस्तेमाल कर चुका है, इसे अमेरिका की हवाई सुरक्षा की ढाल माना जाता है।
THAAD
टर्मिनल हाई अल्टीट्यू एरिया डिफेंस (THAAD) अमेरिका का एक उन्नत मिसाइल रक्षा सिस्टम है, जिसे खासतौर पर बैलिस्टिक मिसाइलों को बहुत ऊँचाई पर ही रोकने के लिए बनाया गया है। यह दुश्मन की मिसाइल को वायुमंडल के अंदर या उसके किनारे पर ही नष्ट कर देता है, ताकि नीचे जमीन पर कोई नुकसान न हो।
इस सिस्टम में AN/TPY-2 नाम का बेहद ताकतवर रडार लगा होता है, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से खतरे को पहचान सकता है। THAAD की खास बात यह है कि यह विस्फोटक वारहेड का इस्तेमाल नहीं करता, बल्कि सीधे टक्कर मारकर मिसाइल को नष्ट करता है, जिससे सटीकता और सुरक्षा दोनों बढ़ जाती हैं।
चीन का ‘HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम’ भी ईरान को नहीं बचा सका
अमेरिका के ये ताकतवर हथियार ईरान में तबाही मचा रहे हैं। इन हमलों ईरान खुद को बचाने में नाकाम दिख रहा है। खासकर चीन से हाल ही ईरान ने खरीदा ‘HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम‘ पूरी तरह से कमजोर साबित हुआ।
बता दें कि यह वही डिफेंस सिस्टम है, जिसे पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में खुद को बचाने के लिए इस्तेमाल किया था, लेकिन तब भी यह सिस्टम भारत के हमलों को नहीं रोक सका था। अब ईरान में इसके कमजोर प्रदर्शन के बाद इस डिफेंस सिस्टम की सैन्य विशेषज्ञ इसकी क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं।
हालाँकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह सिस्टम पूरी तरह खराब नहीं है, बल्कि संभव है कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त और बेहद ताकतवर वायुसेना ने इसे एक साथ कई दिशाओं से इतना दबाव में डाल दिया कि यह संभल नहीं पाया।
यह भी कहा जा रहा है कि खाड़ी देशों में तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने जल्दबाजी में अपनी रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की थी, जिससे तैयारी पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई।
कैसे काम करता है चीन का HQ-98 एयर डिफेंस सिस्टम?
HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम को चीन की कंपनी चीन एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन (CASIC) ने बनाया है। इसे रूस के S-300PMU और अमेरिका के पैट्रियट PAC-2 सिस्टम से प्रेरणा लेकर बनाया गया, लेकिन बाद में इसे पूरी तरह चीन का स्वदेशी सिस्टम बना दिया गया।
इसका पहला परीक्षण साल 2006 में हुआ था और पिछले लगभग 10 साल से यह सक्रिय सेवा में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसकी मारक क्षमता लगभग 260 किलोमीटर है और यह करीब 50 किलोमीटर ऊँचाई तक जाकर दुश्मन के मिसाइल या विमान को गिरा सकता है।
चीन ने इस सिस्टम को अपने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इळाकों जैसे बीजिंग, तिब्बत और दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में तैनात किया हुआ है। इससे साफ है कि HQ-9B चीन के एयर डिफेंस नेटवर्क का एक अहम हिस्सा है। जहाँ तक ईरान की बात है, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के दौरान ईरान ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए चीन के साथ ‘तेल के बदले हथियार’ समझौते के तहत HQ-9B खरीदा था।
US के हमले में कैसे नाकाम साबित हुआ HQ-9B डिफेंस सिस्टम?
ईरान ने HQ-9B को अपनी लंबी दूरी की सुरक्षा परत के रूप में शामिल किया। ईरान की एयर डिफेंस व्यवस्था कई स्तरों में बनी है। लंबी दूरी के लिए HQ-9B, S300PMU-2 और बावर-373 तैनात हैं। मध्यम दूरी के लिए खोरदाद-15 और राद (Raad) सिस्टम हैं। छोटी दूरी की सुरक्षा के लिए Tor-M2, Pantsir-S1, Zolfaqar और कंधे से दागे जाने वाले MANPADS मिसाइल सिस्टम शामिल हैं।
अमेरिका के हमले की धमकी के बीच ईऱान ने HQ-9B को अपने सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों के आसपास तैनात किया था, जैसे नतांज परमाणु केंद्र, फोर्डो एनरिजमेंट सुविधा, IRGC के मिसाइल और ड्रोन बेस और तेहरान व इस्फहान के पास के एयरबेस। इसके बावजूद अमेरिका और इजरायल के हमलों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ, जिससे इस सिस्टम की वास्तविक क्षमता और तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


