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3 साल-14 राउंड बातचीत के बाद India-UK ने साइन की CETA डील, 99% भारतीय सामानों पर 0% ड्यूटी: ₹2.8 लाख करोड़ का व्यापार बढ़ेगा, जानिए दोनों देशों को समझौते से कितने फायदे

यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और मजबूत नेतृत्व का नतीजा है, जो भारत को दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ जोड़ने का काम कर रहा है।

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गुरुवार (24 जुलाई 2025) का दिन बेहद खास रहा। इसी दिन भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने आखिरकार अपने बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और मजबूत नेतृत्व का नतीजा है, जो भारत को दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ जोड़ने का काम कर रहा है।

इस समझौते पर भारत की ओर से वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने और यूके की ओर से बिजनेस एंड ट्रेड सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने साइन किए। इस मौके पर खुद प्रधानमंत्री मोदी, यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, विदेश मंत्री एस जयशंकर और यूके की चांसलर रैचेल रीव्स भी मौजूद थे। यह डील मोदी जी के यूके विजिट के दौरान साइन हुई, जो दोनों देशों के बीच सालों से चल रही बातचीत का खुशखबरी भरा अंत है।

अब आप सोच रहे होंगे कि यह CETA क्या है और क्यों इतना बड़ा माना जा रहा है? सरल शब्दों में कहें तो यह एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) है, जो दोनों देशों के बीच सामान और सेवाओं के व्यापार को आसान बनाएगा। पहले जहाँ सामान भेजने पर भारी टैक्स या ड्यूटी लगती थी, अब वो कम या जीरो हो जाएगी। इससे भारत के कारोबारियों, किसानों, मजदूरों और युवाओं को नए मौके मिलेंगे।

वर्तमान में भारत-यूके का द्विपक्षीय व्यापार करीब 56 अरब डॉलर (लगभग 4.7 लाख करोड़ रुपए) का है। इस समझौते का लक्ष्य है कि 2030 तक यह दोगुना से ज्यादा हो जाए, यानी 120 अरब डॉलर (करीब 10 लाख करोड़ रुपए) तक पहुँच जाए। कुछ रिपोर्ट्स में यह आँकड़ा 112 अरब डॉलर बताया गया है, लेकिन ज्यादातर सोर्सेज 120 बिलियन पर सहमत हैं। यह डील 2040 तक सालाना 34 अरब डॉलर (करीब 2.8 लाख करोड़ रुपए) का अतिरिक्त ट्रेड बूस्ट देगी, जो दोनों देशों की GDP को मजबूत करेगी।

भारत-ब्रिटेन यहाँ तक कैसे पहुँचे?

यह समझौता रातोंरात नहीं हुआ। बातचीत की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब ब्रिटेन ब्रेक्जिट के बाद नए ट्रेड पार्टनर्स ढूँढ रहा था। भारत भी ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए तैयार था। तीन साल की लंबी नेगोशिएशंस के बाद 6 मई 2025 को दोनों देशों ने एग्रीमेंट इन प्रिंसिपल पर सहमति जताई। फिर 22 जुलाई 2025 को भारत की यूनियन कैबिनेट ने इसे अप्रूव किया और अब 24 जुलाई 2025 को यह साइन हो गया।

नेगोशिएशंस में कई राउंड्स हुए – कुल 14 राउंड्स, जहाँ मुद्दे जैसे टैरिफ कट्स, वीजा रूल्स, IPR प्रोटेक्शन और संवेदनशील सेक्टरों की सुरक्षा पर बहस हुई। भारत ने अपनी तरफ से डेयरी, एग्रीकल्चर और फिशिंग जैसे क्षेत्रों को प्रोटेक्ट किया, जबकि यूके ने EVs, व्हिस्की और फाइनेंशियल सर्विसेज पर फोकस किया।

MEA (मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स) के मुताबिक, टैरिफ एक्सक्लूजन्स बहुत कम हैं, मतलब ज्यादातर ट्रेड फ्री होगा। यह डील रैटिफाई होने के बाद कुछ महीनों में लागू हो जाएगी और इसका असर तुरंत दिखना शुरू हो जाएगा।

CETA की मुख्य खासियतों को जानिए – इसमें क्या-क्या शामिल

यह समझौता सिर्फ सामान बेचने-खरीदने तक सीमित नहीं है। यह एक कॉम्प्रिहेंसिव डील है, जो गुड्स, सर्विसेज, इनवेस्टमेंट, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, जीआई टैग्स और प्रोफेशनल मोबिलिटी को कवर करता है।

सबसे बड़ी बात कि भारत के 99% निर्यातों पर यूके में जीरो ड्यूटी मिलेगी, जो लगभग 100% ट्रेड वैल्यू को कवर करती है। मतलब भारत से यूके जाने वाले सामान पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे भारत के एक्सपोर्ट्स में 23 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के नए अवसर खुलेंगे। यूके की तरफ से भारत 90% ब्रिटिश प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कट करेगा, जिससे यूके को 6 अरब पाउंड (करीब 6500 करोड़ रुपए) का इनवेस्टमेंट और एक्सपोर्ट बेनिफिट मिलेगा।

सेवाओं में यूके ने पहली बार इतनी बड़ी कमिटमेंट्स दी हैं। आईटी/आईटीईएस, फाइनेंशियल सर्विसेज, प्रोफेशनल सर्विसेज, एजुकेशन, टेलीकॉम, आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियाँ यूके के बाजार में आसानी से एंट्री कर सकेंगी।

इस डील का एक खास ब्रेकथ्रू है डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC)… जो भारतीय वर्कर्स और उनके एम्प्लॉयर्स को यूके में सोशल सिक्योरिटी पेमेंट्स से 3 साल तक छूट देगा। इससे कंपनियों की लागत 20-30% कम होगी और वर्कर्स की सैलरी बढ़ेगी। इसके अलावा ये समझौता सस्टेनेबल डेवलपमेंट, इनोवेशन और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को कम करने पर फोकस करता है। महिलाओं, युवाओं और MSMEs को स्पेशल प्रोविजन्स हैं, जैसे ट्रेड फाइनेंस और ग्लोबल पार्टनरशिप्स।

सेक्टर-वाइज फायदे: किसको क्या मिलेगा?

चलिए अब आपको डिटेल में बताते हैं कि इस डील से अलग-अलग सेक्टरों को क्या बेनिफिट्स मिलेंगे।

मैन्युफैक्चरिंग और लेबर बेस्ड सेक्टर

टेक्सटाइल्स, लेदर, फुटवेयर, जेम्स एंड ज्वैलरी, टॉयज और मरीन प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों में बड़ा बूस्ट। इन पर 99% जीरो ड्यूटी मिलेगी।

उदाहरण: लेदर और फुटवेयर एक्सपोर्ट्स यूके में 900 मिलियन डॉलर (7500 करोड़ रुपए) को पार कर सकते हैं। तिरुपुर और कानपुर जैसे टेक्सटाइल हब्स में लाखों नौकरियाँ बढ़ेंगी।

कुल एक्सपोर्ट ग्रोथ: इन सेक्टरों से 10-15% सालाना बढ़ोतरी की उम्मीद। इससे कारीगरों, बुनकरों और महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे छोटे उद्यमों को फायदा। MSMEs को IPR और GI प्रोटेक्शन से ग्लोबल रिकग्निशन मिलेगा।

कृषि और किसान

किसान यूके के 375 अरब डॉलर के एग्री मार्केट तक पहुँच पाएँगे। 95% एग्री प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस।

नए मार्केट्स: जैकफ्रूट, मिलेट्स, ऑर्गेनिक हर्ब्स और अन्य उत्पाद। मरीन एक्सपोर्ट्स (फिशिंग) पर 99% जीरो ड्यूटी, जो मछुआरों की आय 20-30% बढ़ा सकती है।

संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित: डेयरी, सेब, एडिबल ऑयल्स पर कोई टैरिफ कट नहीं। पारंपरिक फार्मिंग नॉलेज को पेटेंट प्रोटेक्शन।

ब्लू इकोनॉमी: मरीन सेक्टर में इंडिया की ताकत को अनलीश करेगा, जो एक्सपोर्ट को 5-10 बिलियन डॉलर बढ़ा सकता है।

सर्विसेज और युवा प्रोफेशनल्स

75,000 भारतीय वर्कर्स को 3 साल की सोशल सिक्योरिटी छूट। 36 सर्विस सेक्टरों में नो इकोनॉमिक नीड्स टेस्ट।

35 यूके सेक्टरों में 24 महीने तक काम करने का मौका, बिना लोकल ऑफिस की जरूरत। हर साल 1,800+ शेफ, योगा इंस्ट्रक्टर और म्यूजिशियंस यूके जा सकेंगे

आईटी, फाइनेंशियल, एजुकेशन में बड़ा बाजार: इंडियन टैलेंट को हाई-वैल्यू जॉब्स। DCC से लागत कम होने से कंपनियाँ ज्यादा हायर करेंगी।

उपभोक्ताओं और अन्य सेक्टरों को लाभ

भारतीयों को यूके के प्रोडक्ट्स सस्ते में मिलेंगे: व्हिस्की, EVs, चॉकलेट्स, कॉस्मेटिक्स, कार्स, सैल्मन फिश आदि पर टैरिफ कट।

मैन्युफैक्चरिंग: इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, केमिकल्स में ट्रांसफॉर्मेशन। फूड प्रोसेसिंग और प्लास्टिक्स में 15-20% ग्रोथ।

स्टार्टअप्स: यूके इनवेस्टर्स और इनोवेशन हब्स तक एक्सेस, जो ग्लोबल एक्सपैंशन में मदद करेगा।

अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले सकारात्मक असर

यह डील हजारों जॉब्स क्रिएट करेगी। यूके में हजारों ब्रिटिश जॉब्स सिक्योर होंगी, जबकि भारत में MSMEs और लेबर-इंटेंसिव सेक्टरों से लाखों नई नौकरियाँ आएँगी। ट्रेड बूस्ट से GDP ग्रोथ 0.5-1% बढ़ सकती है। इनवेस्टमेंट: यूके से 6 बिलियन पाउंड का फ्लो, जो इंडियन इंडस्ट्रीज में लगेगा। जेंडर-इक्विटेबल ग्रोथ: महिलाओं को फाइनेंस और ग्लोबल चेन में शामिल होने से एम्पावरमेंट। कुल मिलाकर यह ‘मेक इन इंडिया’ को फास्ट ट्रैक देगा और भारत को ग्लोबल ट्रेड लीडर बनाएगा।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए पीएम मोदी और यूके के पीएम कीर स्टारमर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 99% भारतीय निर्यात पर शून्य ड्यूटी से करीब 23 अरब डॉलर के नए अवसर खुलेंगे, खासकर मेहनत पर आधारित सेक्टरों के लिए। इससे कारीगर, बुनकर और MSMEs को समृद्धि मिलेगी। उन्होंने बताया कि कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, खिलौने और मछली उत्पादों में रोजगार बढ़ेगा। महिलाओं को फाइनेंस और वैश्विक वैल्यू चेन में गहराई से शामिल होने का मौका मिलेगा।

किसानों के लिए 95% कृषि उत्पादों पर ड्यूटी फ्री निर्यात और मछुआरों के लिए 99% मछली उत्पादों पर शून्य ड्यूटी से उनकी आय बढ़ेगी। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, केमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग और प्लास्टिक जैसे विनिर्माण सेक्टरों में भी बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता नौकरी सृजन, समुदायों को सशक्त करने और भारत की रणनीतिक व्यापार नेतृत्व को मजबूत करने में मदद करेगा।

CETA भारत और यूके के बीच एक नया युग शुरू करेगा। यह समझौता भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में ले जाएगा। इससे नौकरियाँ बढ़ेंगी, निर्यात में उछाल आएगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते मजबूत होंगे। महिलाओं, युवाओं, किसानों और MSMEs को नई संभावनाएँ मिलेंगी। उदाहरण के लिए तिरुपुर और कानपुर जैसे शहरों में जूते और कपड़े के उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों लोगों को काम मिलेगा। इसी तरह किसानों को अपने जैविक उत्पादों को यूके में बेचने का मौका मिलेगा, जो उनकी जिंदगी बदल सकता है।

इस समझौते से समाज के हर वर्ग को फायदा पहुँचेगा। पीएम मोदी के विजन और पीयूष गोयल की मेहनत से यह संभव हुआ है। आने वाले सालों में यह समझौता भारत को आर्थिक रूप से और मजबूत करेगा और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य हकीकत में बदल सकता है। यह सिर्फ एक व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि भारत की तरक्की की एक नई कहानी है।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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