अमेरिका के टेक्सास में भारतीय मूल के चंद्र मौली ‘बॉब’ नागमल्लैया की गला काटकर हत्या कर दी गई। वह मूलरूप से कर्नाटक का रहने वाला था और डैलस के डाउनटाउन सूट्स मोटल में मैनेजर की पोस्ट पर कार्यरत था। होटल में उनके सहकर्मी योडार्निस कोबोस-मार्टिनेज ने किसी बात को लेकर हुए विवाद के बाद चाकू से हमला कर दिया था। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
भारतीय नागरिक की बेरहमी से हत्या की यह घटना सोशल मीडिया पर छाई हुई है। इसके बावजूद अमेरिकी मीडिया ने घटना को लेकर खास कवरेज नहीं दी, जिससे नेटिजन्स नाराज हैं। इसके अलावा घटना के बाद अमेरिका की अप्रवासन नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं।
परिवार के सामने सिर धड़ से किया अलग
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 53 वर्षीय चंद्र मौली नागमल्लैया पर बुधवार (10 सितंबर 2025) सुबह टूटी हुई वॉशिंग मशीन के इस्तेमाल को लेकर हुए विवाद के बाद हमला किया गया। आरोपित 37 वर्षीय योर्डानिस कोबोस-मार्टिनेज ने एक चाकू निकाला और नागमल्लैया पर कई वार किए, फिर उसकी पत्नी और बेटे के सामने सिर धड़ से अलग कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नागमल्लैया के बेटे ने अपने पिता को बैट दिखाकर बचाने की कोशिश की लेकिन हमलावर को रोक नहीं सका। हमलावर ने बाद में कटे हुए सिर को लात मारकर पार्किंग के कूड़ेदान में डाल दिया। डलास पुलिस ने घटना के तुरंत बाद खून से लथपथ शर्ट पहने कोबोस-मार्टिनेज को गिरफ्तार कर लिया।
अमेरिकी मीडिया की चुप्पी पर उठे सवाल
इस घटना की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना की गई और कई लोगों ने अमेरिकी मीडिया पर घटना को लेकर चुप्पी साधने के भी आरोप लगाए। ऋचा लखेरा नाम की एक एक्स यूजर ने लिखा, “इरीना जारुत्स्का और चार्ली किर्क की हत्याओं को तो खूब कवरेज मिली लेकिन भारतीय मूल के नागमल्लैया की सार्वजनिक रूप से हुई सबसे निर्मम और अमानवीय हत्या को नजरअंदाज कर दिया गया।”

एक अन्य एक्स यूजर, इंडियन ब्रॉन्सन ने सीधे तौर पर कॉन्ग्रेसी रो खन्ना को दोषी ठहराया और उन पर आव्रजन नीतियों के परिणामों को स्वीकार करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

एक अन्य यूजर प्रेमानंद जॉन ने लिखा, “परिवार को अपूरणीय क्षति… मानसिक पीड़ा जीवन भर रहेगी। यह हत्या एक व्यक्तिगत त्रासदी और राजनीतिक मुद्दा दोनों बन गई है, जिसने अमेरिका में आव्रजन प्रवर्तन, अपराध और मीडिया की खामियों को उजागर किया है।”
भारतीय मूल के ‘पीड़ित’ को नहीं दिया महत्व
कुछ लोगों का मानना है कि अमेरिका के बड़े मीडिया संस्थान किसी भी अपराध को दिखाने से पहले अपराधी और पीड़ित की नस्ल देखते हैं। शायद उनके लिए भारतीय नागरिक की हत्या कोई बड़ा अपराध नहीं थी, वो भी तब जब अपराधी एक अमेरिकन हो। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि आरोपित का पहले भी अपराधिक रिकॉर्ड रह चुका है। इसके बावजूद मीडिया ने खबर को महत्व नहीं दिया।


