ईरान में इस वक्त इस्लामी शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर सड़क पर प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग खामेनेई की सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उधर, खामेनेई सरकार इन प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई कर रही है। खामेनेई सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट तक बंद कर दिया है।
इस बीच प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए स्पेसएक्स(SpaceX) ने ईरान में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा ‘स्टारलिंक’ को चालू किया था। लेकिन अब स्टारलिंक को भी बंद किया जा रहा है। इसके लिए रूस की तकनीक और चीन के शोध का इस्तेमाल किया जा रहा है।
Russia supplied the hardware.
— Shanaka Anslem Perera ⚡ (@shanaka86) January 11, 2026
China published the playbook.
Iran just proved it works.
Starlink: 80% packet loss.
Expert monitoring Iranian internet for 20 years: “I have never seen such a thing in my life.”
The “LEO satellites are unjammable” consensus?
Dead.
Wall Street… https://t.co/nxVpXHE2GC pic.twitter.com/Jd9S7y0dOG
खामेनेई सरकार के इंटरनेट बंद करने के बाद स्टारलिंक ने चौंकाया
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच आपस में बात करने और प्रदर्शन को संगठित करने में इंटरनेट और सोशल मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका रही है। इसका असर देखकर इस्लामी शासन ने 08 जनवरी 2026 को पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया। यह इंटरनेट बंदी गुरुवार शाम 6.45 बजे से लागू हुई। क्लाउडफेयर रडार की रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद ईरान में इंटरनेट ट्रैफिक लगभग ‘पूरी तरह शून्य’ हो गया।
#Internet traffc in #Iran has dropped to effectively zero as of 18:45 UTC (22:15 PM local time), signaling a complete shutdown in the country, and disconnection from the global Internet.https://t.co/V77cj6rrQW pic.twitter.com/yZjOBqsGJm
— Cloudflare Radar (@CloudflareRadar) January 8, 2026
पूरी तरह इंटरनेट बंद करने से पहले IPv6 ट्रैफिक में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। इससे संकेत मिलता है कि जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज हो रहे थे, ईरान की इस्लामी सरकार धीरे-धीरे और चुनकर इंटरनेट बंद कर रही थी।
ईरान का यह पूरी तरह इंटरनेट बंद बहुत उन्नत और योजनाबद्ध तरीके से हुआ है। सरकार अपने खास सरकारी संचार को चालू रख रही है, लेकिन आम लोगों के लिए बाहरी दुनिया से जुड़ने वाला इंटरनेट पूरी तरह काट दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, VPN और प्रॉक्सी सेवाएँ भी इस बार ज्यादातर काम नहीं कर रही हैं, जबकि पहले ईरान के लोग इन्हीं तरीकों से इंटरनेट बंदी को पार करते रहे हैं।
Proton VPN sessions originating in Iran are dipping, confirming the infrastructure which allows people to access the internet is being shut down.
— Proton VPN (@ProtonVPN) January 8, 2026
Normally, Proton VPN helps people affected by censorship to circumvent it, but in this case, the internet has been shut off entirely. https://t.co/09pCzqqZ7R pic.twitter.com/9AamyvGgq5
सरकार की निगरानी वाले लोकप्रीय ऐप रूबिका(Rubika) और ईता(Eita) को भी बंद कर दिया गया है। इसके अलावा ईरान में बैंकिंग सेवाएँ, कैब बुकिंग ऐप्स जैसे स्नैप(Snapp) और टैप्सी(Tapsi), ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय फभोन कॉल पर भी रोक लगा दी गई है।
सरकार का मानना है कि इन कदमों से प्रदर्शन शांत हो जाएँगे, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे गुस्सा और बढ़ गया है। इसी वजह से पहले से ज्यादा लोग खामेनेई सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं।
इस बीच 09 जनवरी 2026 को एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने ईरान में स्टारलिंग इंटरनेट सेवा मुफ्त में चालू कर दी। जिन प्रदर्शनकारियों के पास तस्करी से लाए गए स्टारलिंग टर्मिनल थे, उन्होंने सरकार की पाबंदियों को पार कर बिना सेंसर वाला इंटरनेट इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
यह याद दिलाना जरूरी है कि साल 2022 के महसा अमीनी आंदोलन और 2019 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी स्टारलिंक एक बड़ा सहारा बना था। ईरान में स्टारलिंग डिवाइस रखने और इसके सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध है, फिर भी हजारों की संख्या में स्टारलिंग टर्मिनल चोरी-छिपे देश में लाए गए।
अनुमान लगाया गया कि ईरान में इस समय लगभग 40 से 50 हजार स्टारलिंग सब्सक्राइबर्स मौजूद हैं।
ईरानी सरकार ने स्टारलिंक सिग्नल को किया जाम
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हो रही हिंसक कार्रवाई के बीच खबर है कि ईरानी अधिकारियों ने कई इलाकों में स्टारलिंक के सिग्नल जाम करने में सफलता पा ली है, जिससे बड़े स्तर पर इंटरनेट में दिक्कतें पैदा हुई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरानी सरकार सेना में इस्तेमाल होने वाले शक्तिशाली जैमर का उपयोग कर रही है। इससे स्टारलिंक के अपलिंक और डाउनलिंक डेटा में भारी नुकसान हो रहा है। यह नुकसान 30 प्रतिशत से बढ़कर 09 जनवरी 2026 तक 80 प्रतिशत तक पहुँच गया।
ईरानी अधिकारियों की इस कार्रवाई में GPS सिग्नल में भी दखल शामिल है, जबकि स्टारलिंग को टर्मिनल और सैटेलाइट को जोड़ने के लिए GPS पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके कारण ईरान के कई प्रदर्शन वाले इलाकों में इंटरनेट या तो बहुत कमजोर हो गया या लगभग पूरी तरह बंद हो गया।
इंटरनेट शोधकर्ता और मियान ग्रुप में इंटरने सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों के निदेशक आमिर रशिदी ने कहा कि अपने 20 साल के शोध अनुभव में उन्होंने कबी ऐसे सेना-स्तर के जैमर नहीं देखे, जिनका इस्तेमाल ईरानी सरकार स्टारलिंक को रोकने के लिए कर रही है। रशिदी ने कहा कि इतनी उन्नत तकनीक या तो ईरान ने खुद विकसित की है, या फिर यह रूस या चीन ने ईरान को दी है।
यह बात समझना जरूरी है कि स्टारलिंक को ब्लॉक करना नामुमकिन नहीं है। पहले भी रूस यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट को जाम कर चुका है। लेकिन ईरान का इतनी बड़े स्तर पर ऐसा कर पाना हैरान करने वाला है। इससे यह टूटती है कि LEO(Low Earth Orbit) सैटेलाइट सिस्टम को जाम करना लगभग असंभव है।
हालाँकि, रूस, ईरान या चीन की तरफ से कोई अधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान का यह ‘किल स्विच’ तरीका रूस के हार्डवेयर, चीन की तकनीकी जानकारी और ईरान में किए गए परीक्षणों का नतीजा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान सरकार द्वारा अपनाया गया यह ‘किल स्विच’ तरीका देश की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा रहा है। अनुमान है कि हर एक घंटे के इंटरनेट बंद रहने से ईरान को करीब 15.6 लाख डॉलर का नुकसान हो रहा है।
खास बात यह है कि जैमिंग की तकनीक बहुत उन्नत और नई है, और रिपोट्स के अनुसार इसमें रूस के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सिस्टम इस्तेमाल होते हैं। खासकर Murmansk-BN और Krasukha-4 सिस्टम। रूस दशकों से EW सिस्टम विकसित कर रहा है और उसने तीन बड़े EW सिस्टम बनाए हैं: रडार जाम करने के लिए Krasukha-4, मोबाइल नेटवर्क को बाधित करने के लिए Leer-3 और रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक रुकावट के लिए Murmansk-BN शामिल हैं।
रूस ने इस सिस्टम का इस्तेमाल यूक्रेन के साथ जारी युद्ध में किया, जिससे यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट को प्रभावित किया। हालाँकि, यह हमेशा के लिए बंद नहीं हुआ। रूस की इस सफलता के बाद स्पेसएक्स ने स्टारलिंक में सॉफ्टवेयर अपडेट किए ताकि इसे रोक सकें।
रूस के अलावा, कभी भी ताइवान पर हमला करने वाले चीन ने भी स्टारलिंग को बाधित करने की तकनीक पर रिसर्च की है। उन्होंने कई ग्राउंड स्टेशन से एक साथ जैमिंग करने का तरीका खोजा है। नवंबर 2025 में चीन के शोधकर्ताओं ने ताइवान में संभावित संघर्ष की स्थिति में स्टारलिंक इंटरनेट को जाम करने का सिमुलेशन किया था।
चीन ने अपने Simulation research of distributed jammers against mega-constellation downlink communication transmissions नाम के रिसर्च में पाया कि स्टारलिंक इंटरनेट सिस्टम को प्रभावी रूप से जाम करने के लिए लगभग 1000 से 2000 एयरबोर्न डिवाइस की जरूरत होगी।
रिसर्च में लिखा है,”स्टारलिंक के ऑर्बिटल प्लेन स्थिर नहीं हैं और इस कंस्ट्रलेशन की मूवमेंट ट्रैजेक्ट्री बहुत जटिल है। दृश्य क्षेत्र में आने वाले सैटेलाइट्स की संख्या लगातार बदलती रहती है। यह समय और जगह दोनों में अनिश्चितता किसी भी तीसरे पक्ष के लिए स्टारलिंक कंस्ट्रलेशन को मॉनिटर या कंट्रोल करने में बड़ी चुनौती पैदा करती है।”
यह भी लिखा, “जैमर्स को ग्रिड-आधारित तरीके से तैनात किया जाता है ताकि विरोधी पक्ष के पास जगह के हिसाब से लचीलापन बढ़े। इसके साथ ही जैमिंग की संभावना और प्रभावशीलता मापने का तरीका भी अपनाया गया है। असली सैटेलाइट ऑपरेशन डेटा के आधार पर स्टारलिंक सिस्टम को उदाहरण मानकर, रेडियो फ्रीक्वेंसी पावर, ग्रिड की दूरी और एंटेना की रेडिएशन पैटर्न के अलग-अलग हालात में जैमिंग कवरेज रेंज निकाली गई।”
आगे कहा गया, “सिमुलेशन के नतीजे दिखाते हैं कि जब नोड ट्रांसमिशन पावर 26 dBW है, तो हर नोड का औसत जैमिंग कवरेज 38.5 km² तक पहुँच सकता है। यह मेगा-कंस्ट्रलेशन्स के नियमन और प्रबंधन में मदद करता है।” यह अध्ययन Zheijang University और Beijing Institute of Technology के शोधकर्ताओं Gu Hanqing, Yang Zhuo, Zhang Peng और Wen Xiaowen ने किया है।
भारी प्रतिबंध और लगातार अमेरिका और इजरायल के साथ टकराव में रहने के अलावा बढ़ती घरेलू नाराजगी के चलते ईरान में इस्लामी शासन कई सालों से अपनी इंटरनेट नियंत्रण क्षमताओं को बढ़ा रहा है। ईरानी सरकार एक राष्ट्रीय इंटरनेट विकसित करने की योजना बना रही है, जो चीन के ग्रेट फायरवॉल जैसी होगी।
पिछले साल इजरायल और ईरान संघर्ष के दौरान इंटरनेट बंद होने के बावजूद ईरानी लोगों ने स्टारलिंक का इस्तेमाल किया, लेकिन इस बार पहली बार ईरानी अधिकारी इस सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को देश में बड़े स्तर पर प्रभावी रूप से निशाना बना रहे हैं।
बोलने की जरूरत नहीं कि स्पेसएक्स भी इसका जवाब देने के लिए उपाय करेगी। जैसे कि फ्रीक्वेंसी होपिंग या बीम एडजस्टमेंट आदि। ताकि ईरानी अधिकारियों द्वारा पैदा की गई रुकावट को रोका जा सके।
आर्थिक संकट, भारी महँगाई और दबावपूर्ण इस्लामी शासन के खिलाफ ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज
28 दिसंबर 2025 को तेहरान में दुकानदारों और बाजार व्यापारियों की एक स्थानीय हड़ताल से शुरू हुए विरोध देखते ही देखते पूरी ईरान के लगभग सभी 31 प्रांतों में फैल गए। ईरान की सड़कों पर सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई के खिलाफ ‘तानाशाह मौत के काबिल हैं’ जैसे नारे लगाए जा रहे हैं, जबकि इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स अभी भी प्रदर्शनकारियों को पकड़ने में लगे हैं।
लोग निर्वासित शाह रजा पहलवी की वापसी की भी माँग कर रहे हैं। अब तक 500 से ज्यादा लोग मार जा चुके हैं, इनमें बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 48 सुरक्षाकर्मियों की भी जान गई हैं। अमेरिका के ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज (HRANA) के अनुसार, इस्लामी शासन ने अब तक 10,600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है।
बता दें कि ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से गंभीर आर्थिक संकट के कारण हैं। हालाँकि सत्ता परिवर्तन की आवाजे भी काफी तेज हैं। कारण ईरानी रियाल का अचानक ढहना है, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से लगभग 1.42 से 1.45 मिलियन तक गिर गया है। केवल 2025 में ही रियाल अपनी आधी कीमत खो चुका है।
यह भी उल्लेखनीय है कि रियाल कभी भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बहुत मजबूत मुद्रा नहीं रही। जब मोहम्मद रजा फर्जिन ने सेंट्रल बैंक का नेतृत्व संभाला, उस समय रियाल का एक्सचेंज रेट 4,30,000 प्रति डॉलर था। हालाँकि, अचानक गिरकर 1.42 मिलियन हो जाने से यह साफ दिखा कि ईरानी मुद्रा कितनी गहरी मुश्किल में पहुँच गई है।
ईरानी मुद्रा की इस रिकॉर्ड गिरावट के पीछे लंबे समय से चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, जून 2025 में इजरायल के साथ संघर्ष के बाद तेल आय में कटौती और घरेलू आर्थिक खराब प्रबंधन मुख्य कारण हैं। इसके अलावा सरकार की उदारीकरण नीतियों ने भी इस गिरावट को काफी बढ़ावा दिया है।
इसका नतीजा यह हुआ कि ईरान उच्च स्तर की महँगाई से जूझ रहा है। दिसंबर 2025 में आधिकारिक महँगाई दर 42.2 प्रतिशत तक पहुँच गई। खाद्य वस्तुओं की कीमतें सालाना आधार पर 72 प्रतिशत तक बढ़ गईं, जबकि मेडिकल सामान की कीमते 50 प्रतिशत तक बढ़ीं।
आयात पर बढ़ती निर्भरता, विदेशों में फँसे हुए फंड और विदेशी मुद्रा तक पहुँच में असफलता के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था गहरी मुसीबत में है। IMF के अनुसार, देश की GDP ग्रोथ 2023 में 5.7 प्रतिशत से गिरकर 2024 में 3.7 प्रतिशत हो गई और 2026 में अनुमानित रूप से केवल 0.6 प्रतिशत रह जाएगी।
खरीदने की शक्ति कम होने के कारण लाखों लोग बुनियादी जरूरत की चीजें, खाना और स्वास्थ्य सेवाएँ भी मुश्किल से खरीद पा रहे हैं। असहनीय जीवन यापन की लागत के अलावा नई ईरानी साल में होने वाले संभावित टैक्स बढ़ोतरी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। ईरानी करदाता डर रहे हैं कि टैक्स बढ़ाए जाने के बाद उनकी हालत और भी खराब हो जाएगी।


