Tuesday, July 16, 2024
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कोरिया का पादरी बदल रहा नेपाल का ‘धर्म’: बौद्धों-हिंदुओं का धर्मांतरण, कहा- मूर्तियाँ देख हैरान था, यीशु होने चाहिए

नेशनल क्रिश्चियन सर्वे के अनुसार हिंदू बहुल देश में 7,758 चर्च खुल गए हैं और इस पूरे परिवर्तन के पीछे सबसे ज्यादा साउथ कोरिया का हाथ है, जोकि दुनिया में मिशनरी का काम तेजी से फैला रहा है।

नेपाल में धर्मांतरण भले ही अवैध हो लेकिन ईसाई मिशनरियाँ अपने मिशन को कामयाब करने के लिए लगातार रिस्क ले रही हैं। गरीब हिंदुओं को तेजी से ईसाई बनाने का काम हो रहा है। कभी पैसों का लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन किया जा रहा है तो कभी चमत्कार दिखाने के नाम पर।

बीबीसी ने नेपाल में हो रहे हिंदुओं और बौद्ध लोगों के धर्मांतरण पर एक रिपोर्ट की है। इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे झारलांग के गाँव में एक चर्च बनाकर कोरियाई पादरी पांग-छांग ने इसे ‘यीशु की जीत’ बताया और धर्मांतरित लोगों से वहाँ प्रार्थना करवाई। इनमें ज्यादातर लोग लामा धर्म को मानने वाले तमांग समुदाय के गरीब और आध्यात्मिक हैं जिनके पूरे गाँव को मिशनरी द्वारा धर्मांतरित किया गया।

जानकारी के मुताबिक, पांग छांग नेपाल में पिछले करीबन 20 सालों से है। इस दौरान उसने नेपाल में 70 चर्च खुलवा दिए है जोकि ज्यादातर धाधिंग जिले में है। पांग के मुताबिक समुदाय के लोगों ने जमीन दान करके खुद ही चर्च बनवाने में मदद की है। पांग ने दावा किया है कि हर पहाड़ी इलाके के करीब चर्चों का निर्माण हो गया है।

बीबीसी की रिपोर्ट बताती है कि नेशनल क्रिश्चियन सर्वे के अनुसार, बुद्ध की जन्मभूमि व हिंदू बहुल देश में आज 7,758 चर्च खुल गए हैं और इस पूरे परिवर्तन के पीछे सबसे ज्यादा साउथ कोरिया का हाथ है, जोकि दुनिया में मिशनरी का काम तेजी से फैला रहा है। कोरियन वर्ल्ड मिशन एसोसिएशन के अनुसार करीबन 22000 मिशनरियों को विदेशों में तैनात किया गया है।

पांग छांग और उनकी बीवी ली जियोंग भी इसी मिशन के साथ नेपाल में हैं। दोनों पहले बैंकर थे। हालाँकि 2003 में वह यहाँ आए और अपना काम शुरू किया। मगर 2018 में आया धर्मांतरण विरोधी कानून इनके लिए एक बहुत बड़ा डर है।

पांग की पत्नी कहती हैं, “हम लोग हमेशा डर और घबराहट में काम करते हैं। लेकिन इस डर की वजह से हम जीसस की शिक्षा का प्रसार करना नहीं बंद कर सकते। हम आत्माओं को बचाना बंद नहीं करेंगे।”

पांग बताते हैं कि वो 2003 में आए थे जब देश में हिंदू शाही परिवार का राज था। वह कहते हैं, “मैं इतनी सारी भगवान की मूर्तियाँ देख हैरान था, मुझे लगा कि यहाँ ईशु की सीख का प्रचार-प्रसार बहुत ज्यादा जरूरी है।”

पांग के अनुसार जब 2008 में सिविल वार के बाद ये सेकुलर देश बना तो मिशनरी के कार्य के लिए ये स्वर्णिम युग था। रिपोर्ट के मुताबिक 300 कोरियन मिशनरियों के परिवार नेपाल में रह रहे हैं। ये लोग वहाँ व्यापार और पढ़ाई के वीजा के नाम आए हैं। कुछ रेस्ट्रां जैसे बिजनेस कर रहे हैं। पांग ने बीबीसी को अपनी मंशा के बारे में सब बताते हुए कहा, “मैं बिलकुल खुला बताता हूँ कि ईश्वर नेपाल में क्या कर रहे हैं।”

बता दें कि पांग इस काम को कानून विरोधी नहीं मानते क्योंकि वह लोग खुले में ये सब नहीं कर रहे। वह कहते हैं- “हमारा मिशनरी का काम सिर्फ हमारा नहीं है। ये ईश्वर का काम है। हम दिखाना चाहते हैं कि ईश्वर कैसे नेपाल में चमत्कार करते हैं।”

नेपाल में बढ़ रही ईसाइयों की संख्या

उल्लेखनीय है कि हिंदू बहुल नेपाल में ईसाइयों की तादाद फिलहाल 2 फीसद बताई जा रही है, लेकिन आँकड़े आने के बाद इनका सही पता चलेगा। 1951 में यहाँ एक ईसाई नहीं था। 1961 में 458 हुए और 2011 में इनकी गिनती 376000 हुँच गई। अनुमान है कि फिलहाल ये गिनती 545000 हो चुकी है। हर साल 2000 नेपाली छात्रों को कोरिया पढ़ने भेजा जाता है। नेपाल में भी बच्चों को ऐसी शिक्षा दी जाती है। जो लोग अपनी संस्कृति से जुड़ा रहना चाहते हैं उनके बच्चों को बरगलाया जाता है।

नेपाल में बढ़ रहे धर्मांतरण के मामले में ऐसा नहीं है कि लोग नहीं जानते। पूर्व उप प्रधानमंत्री कमल थामा कहते हैं कि ये काम जंगल में आग की तरह फैल रहा है। कोरियन मिशनरियाँ सांस्कृतिक पहचान पर हमला कर रही हैं। वह गरीबों और पिछड़े लोगों को ईसाई बना रहे हैं। कमल थापा कहते हैं कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून है लेकिन किसी को भी इसके तहत दोषी नहीं बनाया गया। लोग या तो अपील पर छूट जाते हैं या फिर सबूतों के अभाव में। पादरी भी खुद मानते हैं कि अन्य देशों में धर्मांतरण विरोधी कानून सच लगता है पर नेपाल में इसे देखने वाला कोई नहीं है।

बीबीसी की रिपोर्ट में कभी हिंदू पंडित का काम करने वाले पादरी दिल्ली राम का जिक्र है जो अब नेपाल क्रिश्चियन सोसायटी का अध्यक्ष है। उसे 2018 में लोगों को धर्मांतरित करने के इल्जाम में आरोपित बनाया गया था। हालाँकि बाद में आरोप हटा दिए गए। आज वो कहता है- “कभी हम पर लोगों को धर्मांतरित करने के इल्जाम लगे लेकिन अब सत्ता हमारे हाथ में है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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