मिडिल ईस्ट की जंग मार्च 2026 में अब पूरी तरह से ‘ऑयल वॉर’ में बदल गई है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ी तनाव के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया। यह संकरी जलडमरूमध्य दुनिया के 20-25% तेल और 20% LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का रास्ता है। कतर के रास लाफान प्लांट पर हमले के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LNG उत्पादक कतर ने उत्पादन पूरी तरह रोक दिया। कतर एनर्जी और भारत की पेट्रोनेट LNG ने फोर्स मेज्योर नोटिस जारी कर दिया। इसका नतीजा है- वैश्विक तेल बाजार में अब तक का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, यह 1973 के यॉम किप्पूर वॉर या 2022 के यूक्रेन युद्ध से भी बड़ा संकट है। रोजाना करीब 8-10 मिलियन बैरल तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हो रही है। टैंकर ट्रैफिक 86% गिर गया। सैकड़ों जहाज अटके हुए हैं। तेल की कीमतें 80-100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं। LNG की कीमतें दोगुनी हो गई हैं।
अब सवाल यह है कि भारत पर इसका कितना असर पड़ रहा है? खासकर तेल के साथ-साथ LNG और PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) पर।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। रोजाना 5.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल खपत करता है। इसमें 85-88% आयात पर निर्भर है। पहले मिडिल ईस्ट (सऊदी, इराक, UAE, कुवैत) से 50% से ज्यादा तेल आता था। इनमें से 40-50% यानी 2-2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन होर्मुज से गुजरता था। लेकिन अब सरकार का दावा है कि 70% आयात होर्मुज के बाहर के रास्तों से आ रहा है। रूस से आयात बढ़कर 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया है। अमेरिका, वेस्ट अफ्रीका और सऊदी-यूएई के पाइपलाइन रूट (यानबू और फुजैराह) का इस्तेमाल बढ़ा दिया गया है।
सरकार के मुताबिक, स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) और कमर्शियल स्टॉक मिलाकर 40-74 दिन का बफर है। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने कहा, “हमने होर्मुज से आने वाली मात्रा से ज्यादा तेल सुरक्षित कर लिया है।” फिर भी कीमतें बढ़ने से आयात बिल पर 10-15% अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। छोटे रिफाइनरी और पेट्रोल-डीजल की कीमतें थोड़ी बढ़ सकती हैं। लेकिन कुल मिलाकर कच्चे तेल की मात्रा में बहुत बड़ी कमी नहीं आई है। रूस और दूसरे स्रोतों से भरपाई हो रही है।
असली समस्या LNG और PNG क्षेत्र में है। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा LNG आयातक है। 2025 में 24-27 मिलियन टन LNG आयात किया। कुल गैस खपत 189 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) है। इसमें घरेलू उत्पादन 97.5 MMSCMD और बाकी आयातित LNG से आता है। कतर से 40-50% LNG आता है (लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट में पेट्रोनेट अकेले 8.5 मिलियन टन सालाना लेता है)। कतर और UAE से आने वाले 50-55% LNG होर्मुज से गुजरता है।
कतर के प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद 2-3 मार्च 2026 से उत्पादन बंद हो गया है। रास लाफान (77 मिलियन टन सालाना क्षमता) दुनिया का सबसे बड़ा प्लांट है। यहाँ से जहाज नहीं निकल पा रहे है। जिसके बाद पेट्रोनेट LNG ने कतर एनर्जी को और अपने ऑफटेकर्स (GAIL, IOC, BPCL) को फोर्स मेज्योर नोटिस दे दिया। इसका मतलब है कि हम अभी सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि परिस्थितियाँ विपरीत हैं।
इसका नतीजा भारत में ये हुआ कि औद्योगिक क्षेत्र में 20-40% सप्लाई की कटौती करनी पड़ी। इन कटौतियों के चलते गुजरात गैस ने इंडस्ट्रीज को गैस देना रोक दिया है। वहीं, प्राइवेट कंपनी अडानी टोटल गैस ने इंडस्ट्रियल क्लाइंट्स को कीमतें बहुत बढ़ा दीं हैं। इसकी वजह भी यही है कि अगर ये संकट लंबे समय तक चले, तो घरेलू उपभोक्ताओं की माँग को पहले संभाला जाए। चूँकि सप्लाई की मात्रा एक बराबर नहीं है, ऐसे में ONGC पेट्रो एडिशंस का दाहेज प्लांट भी कम क्षमता पर चल रहा है।
इस बीच उद्योगों के लिए GAIL भी सप्लाई कटौती पर विचार कर रहा है। इस कदम की वजह से फर्टिलाइजर कंपनियाँ (IFFCO, KRIBHCO) भी प्रभावित हो रही हैं। इस एनर्जी पर चलने वाले स्टील यूनिट्स में भी प्रोडक्शन घट गया है। कुल मिलाकर 47.4 MMSCMD गैस प्रभावित हुई है, जो कुल खपत का 25% है।
समस्या यह है कि LNG का कोई स्ट्रैटेजिक रिजर्व नहीं है। टर्मिनल्स पर सिर्फ 1-2 हफ्ते का स्टॉक रहता है। कतर से सस्ता गैस (लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट) बंद होने पर स्पॉट मार्केट से महँगा LNG लाना पड़ रहा है। कीमतें दोगुनी हो गई हैं। हालाँकि मोदी सरकार ने कई वैकल्पिक व्यवस्थाएँ की हैं, जिसमें वैकल्पिक स्रोतों से सरकार ने सप्लाई बढ़ाई है। जानें- कैसे भारत इस समस्या से प्लानिंग के साथ निपट रहा है।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
- दो LNG कार्गो वैकल्पिक स्रोतों (अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) से रवाना हो चुके हैं।
- घरेलू गैस और RLNG को प्राथमिकता सेक्टर (घरेलू PNG, CNG, फर्टिलाइजर) में डायवर्ट किया जा रहा है।
- रूस और अमेरिका से ज्यादा क्रूड और LNG खरीदने की कोशिश।
- लंबे समय में ओमान-UAE से अंडरसी पाइपलाइन (MEIDP) प्रस्ताव तेज किया जा रहा है।
हालाँकि थोड़े समय के लिए दिक्कत बनी रह सकती है, लेकिन सरकार जिस तरह से कदम उठा रही है, उसके चलते आम लोगों को बहुत परेशान नहीं होना पड़ेगा।
कुल मिलाकर, कच्चे तेल में मात्रा की कमी 5-10% से ज्यादा नहीं होगी क्योंकि रूस और दूसरे रूट काम कर रहे हैं। लेकिन LNG और PNG में 20-40% तक कमी आ सकती है, खासकर इंडस्ट्री में। घरेलू उपभोक्ता सुरक्षित रहेंगे लेकिन कीमत बढ़ेगी। यह संकट भारत को याद दिलाता है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविधीकरण और घरेलू उत्पादन बढ़ाना कितना जरूरी है।
हालाँकि इसके लिए मोदी सरकार समय से कदम उठा रही है। बहुत हद तक संभव है कि भारत अपने हितों की रक्षा करेगा और इंडस्ट्री को भी बराबर एनर्जी सप्लाई मिलती रहेगी।


