Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयशैतान की सींगे बाहर निकल आएँगी... सऊदी अरब के नए मेगा प्रोजेक्ट पर भड़के...

शैतान की सींगे बाहर निकल आएँगी… सऊदी अरब के नए मेगा प्रोजेक्ट पर भड़के मुस्लिम, कहा – मनोरंजन के लिए नया काबा बना रहे

'न्यू मुरब्बा' प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक संग्रहालय, तकनीकी और डिजाइन यूनिवर्सिटी, एक विशालकाय थिएटर और अन्य मनोरंजन व संस्कृति के स्थल होंगे।

इस्लामी मुल्क सऊदी अरब, जहाँ इस्लाम में सबसे पवित्र माने जाने वाले हज स्थल मक्का और मदीना स्थित हैं, वहाँ के एक नए मेगा प्रोजेक्ट को मुस्लिम ही सोशल मीडिया पर निशाना बना रहे हैं। ये वहाँ के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के ड्रीम प्रोजेक्ट है। ये एक प्रस्तावित शहर है, जिसका मुख्य आकर्षण ‘The Mukaab’ नाम की एक संरचना होगी। मुस्लिम इसे काबा जैसा बता रहे हैं और सऊदी अरब की सरकार से खासे गुस्सा हैं।

मुस्लिमों का कहना है कि सऊदी अरब इस नए मेगा प्रोजेक्ट के तहत ‘नया काबा’ बनाने में लगा हुआ है। लोगों को काबा और मुकाब की आकृति समान लग रही है। वैसे भी अरबी भाषा में दोनों शब्दों का अर्थ एक ही होता है – घनाकार आकृति। सोशल मीडिया पर मुस्लिम कह रहे हैं कि मनोरंजन के लिए ‘नया काबा’ बनाया जा रहा है। दुनिया का सबसे आधुनिक बताया जाने वाला ये शहर रियाद में विकसित किया जा रहा है।

‘न्यू मुरब्बा’ प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक संग्रहालय, तकनीकी और डिजाइन यूनिवर्सिटी, एक विशालकाय थिएटर और अन्य मनोरंजन व संस्कृति के स्थल होंगे। इस शहर में वातावरण के लिए हरियाली का भी खास ध्यान रखा जाएगा। पैदल यात्रियों के लिए अलग रास्ते बनाए जाएँगे। सऊदी अरब की ‘पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड’ ने इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा बताते हुए नया वीडियो जारी किया है। ‘द मुकाब’ नामक इमारत की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई 400 मीटर की होगी।

प्रोफेसर डॉ मुहम्मद अल-हचिमी अल-हमीदी ने दावा किया कि नज्द क्षेत्र में एक भविष्यवाणी की गई है कि एक दिन शैतान की सींगे बाहर निकल आएँगी। एक अन्य प्रोफेसर ने भी इसे नया काबा करार दिया। एक अन्य मुस्लिम ने कहा कि ये एक ऐसा काबा है, जो पूंजीवाद को समर्पित है। कुछ मुस्लिमों ने ये भी दावा किया कि मक्का-मदीना से अपनी पहचान बदल कर सऊदी अरब रियाद को अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -