Thursday, April 2, 2026
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साउथ कोरिया में 1.20 लाख ‘होम कैमरे’ हैक, अश्लील कंटेंट बनाकर करोड़ों में बेचा: जानें हैकर्स ने कैसे IP में लगाई सेंध और कैसे खुद को ऑनलाइन अटैक से बचाएँ?

साउथ कोरिया में IP कैमरों की यह बड़ी हैकिंग सिर्फ एक चोरी या अपराध की घटना नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी चेतावनी है कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के इस दौर में हमारी प्राइवेसी कितनी खतरे में है। जिन कैमरों और उपकरणों को हम अपने घर की सुरक्षा के लिए लगाते हैं, वे ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकते हैं।

साइबर सुरक्षा आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती है। हाल ही में साउथ कोरिया में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ हैकर्स ने घरों और व्यवसायों में लगे 1,20,000 से अधिक इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) कैमरों को हैक कर लिया। हैकर्स ने इन कैमरों की फुटेज का इस्तेमाल करके अश्लील सामग्री बनाई और उसे एक विदेशी वेबसाइट पर बेचकर करोड़ों रुपए कमाए। यह घटना दिखाती है कि कैसे हमारी छोटी सी लापरवाही हमारी निजता (प्राइवेसी) और सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है। इस मामले में पुलिस ने चार मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार किया है और वेबसाइट को बंद करने की कार्रवाई कर रही है।

क्या है मामला और कैसे हुई हैकिंग?

यह पूरा मामला IP कैमरों (इंटरनेट प्रोटोकॉल कैमरे), जिन्हें आमतौर पर ‘होम कैम’ कहा जाता है, की सुरक्षा में मौजूद बड़ी कमियों से जुड़ा है। IP कैमरे, सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले पुराने CCTV कैमरों का एक सस्ता और नया विकल्प हैं। इनकी खासियत यह है कि ये सीधे आपके इंटरनेट नेटवर्क से जुड़े होते हैं, जिससे आप दुनिया के किसी भी कोने से अपने मोबाइल फोन पर अपने घर, बच्चों या पालतू जानवरों पर नजर रख सकते हैं। साउथ कोरिया में चार लोगों ने इसी सुविधा का गलत फायदा उठाया। पुलिस ने उन्हें 1 लाख 20 हजार से ज्यादा IP कैमरों को हैक करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

इन हैक किए गए कैमरों की फुटेज निजी घरों, मनोरंजन स्थलों (कराओके रूम), व्यायामशालाओं (पिलेट्स स्टूडियो) और यहाँ तक कि डॉक्टरों के निजी क्लीनिकों जैसे संवेदनशील स्थानों से ली गई थी। हैकर्स ने इन निजी फुटेज को चुराया और उनका इस्तेमाल करके यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री तैयार की। उन्होंने यह सामग्री एक विदेशी एडल्ट वेबसाइट पर बेच दी, जिससे उन्हें बड़ी कमाई हुई।

उदाहरण के लिए, एक आरोपित ने अकेले 63,000 कैमरे हैक करके 545 वीडियो बेचे और करीब ₹21 लाख की कमाई की। दूसरे आरोपित ने भी 70,000 कैमरे हैक करके लगभग ₹11 लाख कमाए। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले एक साल में उस अवैध वेबसाइट पर डाले गए वीडियो में से 62% इन्हीं दो आरोपितों ने बेचे थे, जिससे पता चलता है कि यह कितनी बड़े पैमाने पर किया गया अपराध था।

हैकिंग कैसे हुई?

IP कैमरों को हैक करने के लिए अपराधियों ने कोई बहुत बड़ी तकनीकी चालाकी नहीं दिखाई, बल्कि उन्होंने एक आम गलती का फायदा उठाया। इन कैमरों को हैक करने का मुख्य कारण था कमजोर और पहले से सेट किए गए पासवर्ड (डिफ़ॉल्ट पासवर्ड)। जब कोई नया IP कैमरा खरीदकर लगाता है, तो वह अक्सर ‘123456’, ‘0000’ या ‘ABCD’ जैसे बहुत ही आसान पासवर्ड के साथ आता है। बहुत से लोग इन डिफॉल्ट पासवर्ड को बदलना भूल जाते हैं और हैकर्स इन्हीं सरल पासवर्ड को निशाना बनाते हैं क्योंकि वे आसानी से अनुमान लगाए जा सकते हैं।

इसके अलावा, हैकिंग की दूसरी वजह यह थी कि बहुत से सस्ते या पुराने कैमरों के सॉफ्टवेयर में सुरक्षा की कमियाँ (Security Holes) होती हैं। अगर कैमरे के सॉफ्टवेयर को समय पर अपडेट नहीं किया जाए, तो ये कमियाँ खुली रह जाती हैं। हैकर्स इंटरनेट पर ऐसे सभी कैमरों को स्कैन करते हैं जिनकी सुरक्षा कमजोर है। एक बार उन्हें कमजोर पासवर्ड या सॉफ्टवेयर की खामी वाला कैमरा मिल जाता है तो वे रिमोट हैकिंग (दूर बैठे) के जरिए कहीं से भी कैमरे के पूरे सिस्टम तक पहुँच बना लेते हैं और उसकी लाइव फुटेज को रिकॉर्ड कर लेते हैं।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में पकड़े गए चारों अपराधी किसी एक बड़े गिरोह का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे अलग-अलग काम कर रहे थे। हालाँकि, उन सभी का तरीका और लक्ष्य एक ही था- कमजोर सुरक्षा वाले IP कैमरों को निशाना बनाना और अवैध फुटेज बेचकर पैसा कमाना। यह साफ दिखाता है कि हमारी छोटी सी लापरवाही (पासवर्ड न बदलना) हैकर्स के लिए कितनी बड़ी कमाई का जरिया बन सकती है।

यौन शोषण और हैकिंग से खुद को कैसे बचा सकते हैं?

IP कैमरों की हैकिंग और यौन शोषण जैसे साइबर अपराधों से खुद को बचाना बहुत मुश्किल नहीं है, इसके लिए बस थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता दिखानी होगी। आपको अपनी ऑनलाइन आदतों में कुछ बदलाव लाने होंगे ताकि अपराधी आपकी सुरक्षा में सेंध न लगा सकें।

IP कैमरा हैकिंग से बचाव के आसान तरीके- अपनी सुरक्षा को और पक्का करने के लिए, आपको हर छह महीने में अपना पासवर्ड बदलते रहना चाहिए और एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल अलग-अलग डिवाइस या अकाउंट के लिए कभी न करें। अगर आपके कैमरे के ऐप या वेबसाइट में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) की सुविधा है, तो उसे हमेशा ऑन रखें। इससे लॉगिन के लिए पासवर्ड के साथ-साथ आपके मोबाइल पर आया एक कोड भी डालना जरूरी होगा।

कैमरे को सुरक्षित रखने के लिए, उसके मैन्युफैक्चरर द्वारा जारी किए गए सॉफ्टवेयर अपडेट को समय पर इंस्टॉल करें, क्योंकि ये अपडेट सुरक्षा की कमियों को दूर करते हैं। इसके अलावा, अपने वाई-फाई राउटर का पासवर्ड भी जटिल रखें और WPA2 या WPA3 एन्क्रिप्शन का उपयोग करें। हमेशा भरोसेमंद और हाई-क्वालिटी ब्रांड के कैमरे ही खरीदें जो मजबूत सुरक्षा सुविधाएँ, जैसे एन्क्रिप्शन, देते हों। अंत में, अगर आपको लगे कि आपका कैमरा अपने आप हिल रहा है या ज़ूम हो रहा है (जिसे संदिग्ध गतिविधि कहते हैं), तो तुरंत अलर्ट हो जाएँ, पासवर्ड बदलें और कैमरा इंटरनेट से डिसकनेक्ट कर दें।

यौन शोषण और सेक्सटॉर्शन से खुद को बचाना- यौन शोषण और सेक्सटॉर्शन (ब्लैकमेलिंग) जैसे खतरों से बचने के लिए, आपको अपनी ऑनलाइन आदतों में बहुत सावधानी बरतनी होगी। किसी भी अनजान व्यक्ति से, खासकर डेटिंग ऐप्स या सोशल मीडिया पर, अपनी संवेदनशील तस्वीरें या वीडियो कभी भी साझा न करें। अपनी निजी फुटेज को क्लाउड स्टोरेज (जैसे गूगल ड्राइव) पर या इंटरनेट से जुड़े डिवाइस पर बिना मजबूत सिक्योरिटी के स्टोर न करें।

अगर कोई अजनबी आपको वीडियो कॉल करता है या संदिग्ध व्यवहार करता है तो उसमें शामिल होने से बचें, क्योंकि साइबर अपराधी अक्सर पहले आपका वीडियो रिकॉर्ड करते हैं और फिर आपको ब्लैकमेल करते हैं। अगर आप ब्लैकमेल के शिकार हो जाते हैं तो डरकर कभी भी पैसे न दें, क्योंकि इससे ब्लैकमेलिंग रुकती नहीं, बल्कि और बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में, तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन के साइबर सेल में जाकर रिपोर्ट करें। माता-पिता के लिए यह जरूरी है कि वे अपने बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा, निजता के महत्व और आपत्तिजनक सामग्री से दूर रहने के बारे में सही जानकारी दें, ताकि वे खुद को सुरक्षित रख सकें।

जागरूकता के लिए साइबर सुरक्षा वेबसाइट और हेल्पलाइन

साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा और ज़रूरी हथियार है। भारत सरकार ने लोगों को जागरूक करने और उनकी मदद करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ऐसी ही कुछ वेबसाइटें और हेल्पलाइन यहाँ दी गई हैं।

सबसे पहले है साइबर दोस्त (Cyber Dost)। यह भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा चलाई गई एक पहल है, जिसका मुख्य काम लोगों को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करना है। ‘साइबर दोस्त’ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार साइबर सुरक्षा से जुड़े छोटे-छोटे टिप्स, सलाह और नई खतरों के बारे में चेतावनियाँ साझा करता रहता है, ताकि लोग ऑनलाइन फ्रॉड से बच सकें।

दूसरा महत्वपूर्ण साधन है भारत सरकार का आधिकारिक पोर्टल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in)। अगर आपके साथ कोई भी ऑनलाइन धोखाधड़ी, यौन शोषण, या किसी भी तरह का साइबर अपराध होता है तो आप इस पोर्टल पर जाकर तुरंत अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह पोर्टल सीधे पुलिस से जुड़ा हुआ है।

इसके अलावा, डिजिटल सेक्स क्राइम पीड़ित सहायता केंद्र (Digital Sex Crime Victim Support Center) विशेष रूप से डिजिटल यौन अपराधों के शिकार लोगों के लिए बनाया गया है। यह केंद्र पीड़ितों को भावनात्मक परामर्श (काउंसलिंग) देता है, उनकी आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री को हटाने या ब्लॉक करने में मदद करता है और उन्हें जरूरी कानूनी सहायता भी देता है। ये सभी संसाधन मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि नागरिक साइबर दुनिया में सुरक्षित रहें और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत मदद मिल सके।

निजता पर बढ़ता हमला

साउथ कोरिया में IP कैमरों की यह बड़ी हैकिंग सिर्फ एक चोरी या अपराध की घटना नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी चेतावनी है कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के इस दौर में हमारी निजी ज़िंदगी (प्राइवेसी) कितनी खतरे में है। यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि जिन कैमरों और उपकरणों को हम अपने घर की सुरक्षा के लिए लगाते हैं, वे ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकते हैं और हमारी निजी फुटेज को बाहर लीक कर सकते हैं।

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विशेषता
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मीडिया जगत में 5 साल से ज्यादा का अनुभव हो चला है। इटीवी भारत और इंडिया न्यूज के साथ ट्रेनिंग की शुरुआत की, तो सुदर्शन न्यूज चैनल में एंकरिंग, सोशल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अवसर मिला। न्यूज के अलावा मौका मिला एमएच1 नेशनल चैनल में, जहाँ सोशल मीडिया एक्जिक्यूटिव के पद पर तीन चैनल (श्रद्धा एमएच1, एमएच1 म्यूजिक और एमएच1 न्यूज) संभाला। इसके बाद सीनियर कंटेंट राइटर के पद पर एफिलिएट विभाग में जागरण न्यू मीडिया में काम करने का मौका मिला। अब सफर ले चला ऑपइंडिया की ओर...

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