गाजा के लिए एनसीएजी का गठन
गाजा संघर्ष को पूरी तरह रोकने और फिलिस्तीनी एन्क्लेव के पुनर्निमाण के लिए एनसीएजी बनाया गया है। साथ ही इसके सहयोग के लिए गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी गठित किया गया है।
NCAG की अध्यक्षता डॉ. अली शाथ करेंगे। डॉ. शाथ एक तकनीकी विशेषज्ञ (टेक्नोक्रेट) हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अली शाथ गाजा में बुनियादी सुविधाओं- जैसे पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा को बहाल करने, नागरिक संस्थाओं को मजबूत करने और रोजमर्रा की जिंदगी को स्थिर करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्यों की जिम्मेदारी भी बंटी हुई होगी। आने वाले कुछ हफ्तों में इसके सदस्यों की घोषणा की जाएगी।
इस कमेटी की देखरेख और धन जुटाने के लिए उन्होंने ‘बॉर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया गया है। इसके अध्यक्ष राष्ट्रपति ट्रंप होंगे। ब्लूमबर्ग न्यूज के मुताबिक, बोर्ड की स्थाई सदस्यता के लिए देशों से 1 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹8,300 करोड़ के नकद Entry Fee की माँग की गई है।
हालाँकि अमेरिका ने ब्लूमबर्ग न्यूज को गुमराह करने वाला बताया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, रिपोर्ट गुमराह करने वाला है। बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम सदस्यता फीस नहीं है। ये सिर्फ उन देशों के लिए है, जो स्थाई सदस्य होंगे और शांति समृद्धि के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।
बोर्ड ऑफ पीस का गठन
चार्टर के मुताबिक, बोर्ड ऑफ पीस के सदस्य राष्ट्रों का कार्यकाल बोर्ड के अध्यक्ष यानी राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छा पर 3 साल का होगा। हालाँकि 3 साल की सदस्यता वाली बात उन देशों पर लागू नहीं होगी, जो चार्टर के लागू होने के पहले साल के भीतर बोर्ड ऑफ पीस को 1 अरब अमेरिका डॉलर यानी ₹8,300 करोड़ दे देंगे यानी सदस्य देशों के लिए पैसा देना पहली शर्त है।
बोर्ड के अध्यक्ष राष्ट्रपति ट्रंप होंगे। गाजा में युद्धविराम के बाद वहाँ की जर्जर हालत को सुधारना और विकास सुनिश्चित करना, पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाना और उसकी निगरानी करना बोर्ड का कार्य है। गाजा में रोजमर्रा के विकास कार्यों की भी देखभाल करेगा। इसकी सुरक्षा के लिए इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स की तैनाती की जाएगी। इस फोर्स को बोर्ड का समर्थन प्राप्त होगा।
व्हाइट हाउस की ओर से मिले संकेतों के मुताबिक, इस बोर्ड का काम सिर्फ गाजा तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि दुनियाभर में चल रहे संघर्षों की रोकथाम में ‘नया नजरिया’ सामने लाएगा।
इजरायल ने अमेरिकी पहल की आलोचना की
इजरायल ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा के लिए बनाए गए बॉर्ड ऑफ पीस की आलोचना की है। उनका कहना है कि अमेरिका ने बगैर उनसे बातचीत किए, इसकी घोषणा की। इजरायल का कहना है कि यह फैसला उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है।
दरअसल पीस बोर्ड के अलावा गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड बनाया गया है जिसके शुरुआती सदस्यों में यूएई के मंत्री रीम अल हाशिमी, तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान अली अल थावादी, बुल्गेरिया के नेता निकोलास म्लाडेनोव को शामिल किया गया है।
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार अमेरिकी विदेश मंत्री के सामने तुर्किए को शामिल किए जाने का मुद्दा उठाएँगे। इजरायल ने हालाँकि आधिकारिक तौर पर तुर्किए को लेकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन मीडियो रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान को बोर्ड में रखने पर इजरायल खफा है।
तुर्किए हमास का समर्थन करता रहा है इसलिए इजरायल से उसके संबंध अच्छे नहीं हैं। इजरायल का मानना है कि गाजा को किसी कार्यकारी बोर्ड की जरूरत नहीं है। वहाँ से हमास को खत्म करना और स्वैच्छिक पलायन को समर्थन करना जरूरी है।
कई समीक्षकों का मानना है कि ट्रंप हो सकता है संयुक्त राष्ट्र का विकल्प तलाश रहे हैं, जिसकी वे काफी दिनों से आलोचना करते रहे हैं।
ड्राफ्ट में बोर्ड को ‘एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन’ बताया गया है। यह स्थिरता को बढ़ावा देगा। भरोसेमंद और कानूनी शासन बहाल करने में भूमिका निभाएगा। अस्थिर इलाकों में स्थायी शांति सुनिश्चित करेगा।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के सदस्य
राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस के अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा उन सदस्यों के नाम जारी किए गए हैं, जो गाजा के लिए ट्रंप प्रशासन के नए ‘बोर्ड ऑफ पीस‘ में शामिल होंगे।
अजय बंगा- बोर्ड के सदस्य में भारतीय मूल के अजय बंगा का नाम शामिल है, जो विश्व बैंक के अध्यक्ष हैं। 1959 में पुणे में पैदा हुए अजयपाल सिंह बंगा के पिता भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे। 2007 में बंगा अमेरिका के नागरिक बने। 2023 में बाइडेन प्रशासन ने उनका नाम विश्व बैंक के अध्यक्ष के तौर पर नामित किया था। इससे पहले वे एक्सोर के चेयरमैन थे।
सर टोनी ब्लेयर- ब्रिटेन के पूर्व पीएम टोनी ब्लेयर को बोर्ड ऑफ पीस का सदस्य बनाया गया है। वे 1997 से 2007 तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान 2003 में इराक युद्ध में ब्रिटेन को शामिल किया था। ये इस बोर्ड के एकमात्र गैर अमेरिकी नागरिक हैं।
मार्को रुबियो- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को ट्रंप का सबसे करीबी माना जाता है। उन्होंने इजरायल-हमास युद्धविराम समझौते का समर्थन किया था। उन्होंने अक्टूबर में इजरायल के संसद के उस पहल का भी विरोध किया था जिसमें वेस्ट बैंक के कब्जे वाले क्षेत्र को इजरायल में मिला लेने को कहा गया था।
स्टीव विटकॉफ- अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ भी बोर्ड ऑफ पीस में शामिल हैं। मध्यपूर्व क्षेत्र के लिए स्टीव विटकॉफ काफी एक्टिव रहे। हमास को हथियार डालने के लिए तैयार करना और गाजा के पुनर्निर्माण की योजना में इनका बड़ा हाथ है।
विटकॉफ रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता कराने की अमेरिका के कोशिशों में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं। दिसंबर में मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की हुई 5 घंटे की बैठक भी शामिल थे।
जेरेड कुश्नर- राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद और जेरेड कुश्नर अमेरिकी विदेश नीति से जुड़े मुद्दों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। इजरायल -गाजा युद्ध में अमेरिका की ओर से मध्यस्थ की भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने नवबंर 2025 में इजरायल के पीएम नेतन्याहू से मुलाकात की थी। इन्होंने कहा था कि गाजा के समुद्र किनारे की जमीन काफी कीमती है, अगर इसे विकसित किया जाए तो।
मार्क रोवन- अमेरिकी इक्विटी कंपनी अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन हैं। इन्हें अमेरिका का वित्त मंत्री बनाए जाने की संभावना भी थी।
रॉबर्ट गैब्रियल- अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार गैब्रियल को बॉर्ड ऑफ पीस में जगह मिली है। 2016 से ये राष्ट्रपति ट्रंप के साथ जुड़े रहे हैं और उनके करीबी माने जाते हैं।
निकोले म्लादेनोव- बुल्गारिया के राजनेता और संयुक्त राष्ट्र के मध्य पूर्व के दूत निकोले म्लादेनोव बोर्ड ऑफ पीस के सदस्य हैं। ये दूसरे ऐसे नागरिक हैं, जो अमेरिकन नहीं हैं। गाजा में जमीनी स्तर पर बोर्ड का कामकाज ये देखेंगे। ये एनसीएजी की निगरानी भी करेंगे।
गाजा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जिम्मेदारी अमेरिकी के मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स का कमांडर बनाकर सौंपा गया है। वे गाजा के पुनर्निर्माण में इस्तेमाल की जानेवाली चीजों की सुरक्षा देखेंगे।


