Tuesday, April 20, 2021
Home रिपोर्ट मीडिया लाज़िम है वो NDTV नहीं देखेंगे: चैनल ने लेफ्ट को बताया JNU फसाद की...

लाज़िम है वो NDTV नहीं देखेंगे: चैनल ने लेफ्ट को बताया JNU फसाद की जड़, वामपंथियों ने कहा- धोखा

एनडीटीवी ने दावा किया है कि जब ये हमला हुआ, तब जेएनयू के सारे स्ट्रीट लाइट्स को ऑफ कर दिया गया था। वैसे, ये पहली बार नहीं है जब जेएनयू के उपद्रवियों के प्रदर्शन के दौरान स्ट्रीट लाइट्स ऑफ किया गया हो। जब हॉस्टल फी बढ़ाने को लेकर उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था, तब भी स्ट्रीट लाइट्स ऑफ कर दिए गए थे।

एनडीटीवी एक ऐसा नाम है, जो किसी भी मसले की रिपोर्टिंग इस आधार पर करता है कि उसमें भाजपा, मोदी-शाह अथवा हिंदुत्व का नाम घसीटा जा सके। जहाँ इनका नाम आने की सम्भावना नहीं रहती, वहाँ एनडीटीवी ऐसा कुछ नहीं करता। मुस्लिम फ़क़ीर को काला जादू वाले तांत्रिक बना कर पेश करने वाला एनडीटीवी अरविन्द केजरीवाल को चुनावी फायदा पहुँचाने के लिए एक इंटरव्यू किया, जिसमें आप कार्यकर्ताओं को ‘आम आदमी’ बता कर उनसे केजरीवाल की तारीफ करवाई गई। ख़ासकर जब मामला भाजपा व दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़ा हो, एनडीटीवी उसमें उनके किरदार को नकारात्मकता के साथ पेश करेगा, ऐसा तय होता है।

लेकिन, अबकी नकारात्मकता फैलाने वाले एनडीटीवी ने भी वामपंथियों को धोखा दे दिया है। एनडीटीवी ने स्वीकार किया है कि जेएनयू में हिंसा की वारदात शुरू करने में वामपंथियों का हाथ था। वामपंथी संगठन आइसा ने हिंसा की शुरुआत की। यानी, एनडीटीवी ने माना है कि इस पूरे फसाद की जड़ वामपंथी उपद्रवी हैं। पहला हमला लेफ्ट छात्रों की ओर से हुआ। एनडीटीवी की इस ख़बर से उन वामपंथियों को झटका लगना तय है, इनकी सारी उम्मीदें इस चैनल पर टिकी हुई थीं। उन्हें अप्रत्याशित तरीके से धोखा मिला है। वो शायद ही एनडीटीवी को माफ़ कर पाएँ।

एनडीटीवी ने माना है कि जब वामपंथी छात्रों ने हॉस्टल में हमला किया, तब वहाँ एबीवीपी के काफ़ी कम छात्र थे। इससे पता चल जाता है एबीवीपी से जुड़े छात्रों को किस कदर पीटा गया होगा। एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में ये भी माना है कि वामपंथियों ने वहाँ मौजूद 10 पुलिसकर्मियों से भी हाथापाई की। इसपर चुटकी लेते हुए एक ट्विटर यूजर ने लिखा- “लाजिमी है, अब वो एनडीटीवी नहीं देखेंगे!” इस पंक्ति से फैज़, एनडीटीवी और वामपंथी- तीनों पर ही निशाना साधा गया।

यहाँ तक कि एनडीटीवी की इस सूचना को एबीवीपी वालों ने भी शेयर किया। एबीवीपी ने कहा कि अब तो एनडीटीवी ने भी मान लिया है कि सारे फसाद की जड़ वामपंथी हैं। एनडीटीवी भी मान रहा है कि वामपंथियों ने एबीवीपी के कार्यकर्ताओं पर हमले करने शुरू किए। एबीवीपी ने इस ख़बर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर शांति स्थापित करनी है तो ये वामपंथी संगठनों को प्रतिबंधित करने का सबसे सही समय है। इससे देश के सभी विश्वविद्यालयों में शांति आएगी। एबीवीपी की राष्ट्रीय महासचिव निधि त्रिपाठी ने इस ख़बर पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा:

“अब तो एनडीटीवी भी स्वीकार कर चुका है कि हिंसा का स्रोत कम्यूनिस्ट हैं। ऐसे में, फिल्म जगत और बौद्धिक जगत के भ्रमित तथाकथित लिबरल्स को भी स्वीकार करने में कोई संकोच नही करना चाहिए कि वामपंथियों ने हिंसा की है। एबीवीपी के विषय में कल से सोशल मीडिया में जो भी भ्रामक प्रचार हुआ, एनडीटीवी की ख़बर के साथ ही उसका अंत हो चुका है।”

हालाँकि, एनडीटीवी को जल्द ही समझ में आ गया गया कि उसे क्या प्रोपेगंडा फैलाना है और उसने कई ऐसे न्यूज़ रिपोर्ट्स किए, जिसमें एबीवीपी को इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। एबीवीपी ने संदिग्ध स्क्रीनशॉट्स के माध्यम से ऐसा दावा किया। ऐसे ही एक स्क्रीनशॉट को बरखा दत्त ने शेयर किया था। बाद में पता चला कि वो जिसे एबीवीपी का कार्यकर्ता बता कर हिंसा की साज़िश रचने का आरोप लगा रही थी, वो कॉन्ग्रेस का निकला। वो नंबर कॉन्ग्रेस से जुड़ा हुआ है, पार्टी ने भी ऐसा स्वीकार किया है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने कहा कि अब वो उस नंबर की सेवाएँ नहीं ले रहा है।

दिल्ली पुलिस ने बताया है कि कई नकाबपोशों की शिनाख्त हो गई है और क्राइम ब्रांच को मामला सौंप दिया गया है। एनडीटीवी ने पत्थरबाजी के बहाने एबीवीपी पर आरोप लगाया है। एक प्रोफेसर का बयान प्रकाशित किया गया है, जिसमें उसने कहा है कि बड़े-बड़े पत्थरों से उपद्रवियों ने हमला किया। जबकि, ऑपइंडिया से बातचीत में घायल छात्रा वेलेंटिना ने बताया कि उपद्रवी शॉल के नीचे पत्थर छिपा कर लाए थे और वो सभी वामपंथी थे। ऐसे में एनडीटीवी की ख़बर को ही आधार बनाएँ और उसे वेलेंटिना के बयान से जोड़ कर देखें तो पता चलता है कि प्रोफेसरों पर भी वामपंथियों ने ही हमला किया।

एनडीटीवी ने दावा किया है कि जब ये हमला हुआ, तब जेएनयू के सारे स्ट्रीट लाइट्स को ऑफ कर दिया गया था। वैसे, ये पहली बार नहीं है जब जेएनयू के उपद्रवियों के प्रदर्शन के दौरान स्ट्रीट लाइट्स ऑफ किया गया हो। जब हॉस्टल फी बढ़ाने को लेकर उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था, तब भी स्ट्रीट लाइट्स ऑफ कर दिए गए थे। इसके बाद जेएनयू के छात्रों द्वारा पुलिस पर पत्थरबाजी करने की सूचना मिली थी। हालाँकि, जेएनयू के छात्रों ने कहा था कि पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया। क्या ऐसा संभव नहीं कि दंगाई वामपंथियों ने पकड़े जाने के डर से स्ट्रीट लाइट्स ऑफ कर दिए हों?

हालाँकि, एनडीटीवी अब भले ही वामपंथियों को ख़ुश करने के लिए भाजपा व एबीवीपी को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए 1000 लेख लिखे, डैमेज हो चुका है। वो कहते हैं न, सच छिपाए नहीं छिपता। शायद एनडीटीवी पर यही कहावत फिट बैठती है। एक लाइन की ख़बर ने वामपंथियों को इतना निराश किया है कि वो ‘अपने’ टीवी चैनल पर भी भरोसा करने से पहले शायद कई बार सोचें। वैसे, एनडीटीवी ने बड़ी चालाकी से एबीवीपी छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों व जारी किए गए सबूतों को छिपा लिया।

एनडीटीवी ने अपने एक भी लेख में उन स्क्रीनशॉट्स और वीडियो का जिक्र नहीं किया, जिसमें वामपंथियों द्वारा हमले करने की बात पता चलती है। शुक्रवार (जनवरी 3, 2020) को दोपहर में वामपंथी गुंडों ने रजिस्ट्रेशन कराने आए छात्रों की खुलेआम पिटाई की। प्रसार भारती सहित कई बड़े मीडिया संस्थानों ने अपने ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को शेयर किया। लेकिन, एनडीटीवी ने एक बार भी इस वीडियो का जिक्र तक नहीं किया। हाँ, उसने ‘सूत्र’ के हवाले से दावा किया कि जेएनयू में पहले हमला लेफ्ट वालों ने किया।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

आपके शहर में कब और कितना कहर बरपाएगा कोरोना, कब दम तोड़ेगी संक्रमण की दूसरी लहर: जानें सब कुछ

आप कहॉं रहते हैं? मुंबई, दिल्ली या चेन्नई में। या फिर बिहार, यूपी, झारखंड या किसी अन्य राज्य में। हर जगह का हाल और आने वाले कल का अनुमान।

क्या राजनीतिक हिंसा के दंश से बंगाल को मिलेगी मुक्ति, दशकों पुराना है विरोधियों की लाश गिराने का चलन

पश्चिम बंगाल में चुनाव समाप्ति की ओर बढ़ रहे हैं। इस दौरान हिंसा की कई घटनाएँ सामने आई है। क्या नतीजों के बाद दशकों पुराना राजनीतिक हिंसा का दौर थमेगा?

काशी की 400 साल पुरानी परंपरा: बाबा मसाननाथ मंदिर में मोक्ष की आकांक्षा में धधकती चिताओं के बीच नृत्य करती हैं नगरवधुएँ

काशी की महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, चिता भस्म की होली के बाद एक और ऐसी प्राचीन परंपरा जो अपने आप में अनूठी है वह है मणिकर्णिका घाट महाश्मशान में बाबा मसाननाथ के दर पर नगरवधुओं का नृत्य।

सुबह का ‘प्रोपेगेंडाबाज’ शाम को ‘पलटी मारे’ तो उसे शेखर गुप्ता कहते हैं: कोरोना वैक्सीन में ‘दाल-भात मूसलचंद’ का क्या काम

स्वदेशी वैक्सीन पर दिन-रात अफवाह फैलाने वाले आज पूछ रहे हैं कि सब को वैक्सीन पहले क्यों नहीं दिया? क्या कोरोना वॉरियर्स और बुजुर्गों को प्राथमिकता देना 'भूल' थी?

बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होएः दिल्ली में CM केजरीवाल के ‘मैं हूॅं ना’ पर मजदूरों की बेबस भीड़ क्यों भारी

केजरीवाल ने मज़दूरों से अपील करते हुए 'मैं हूॅं ना' के शाहरुख़ खान स्टाइल में कहा: सरकार आपका पूरा ख़याल रखेगी। फिर भी वही भीड़ क्यों?

‘भारत में कोरोना के डबल म्यूटेशन ने दुनिया को चिंता में डाला’: मीडिया द्वारा बनाए जा रहे ‘डर के माहौल’ का FactCheck

'ब्लूमबर्ग' की रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत के इस डबल म्यूटेशन ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है। जानिए क्या है इसके पीछे की सच्चाई।

प्रचलित ख़बरें

‘वाइन की बोतल, पाजामा और मेरा शौहर सैफ’: करीना कपूर खान ने बताया बिस्तर पर उन्हें क्या-क्या चाहिए

करीना कपूर ने कहा है कि वे जब भी बिस्तर पर जाती हैं तो उन्हें 3 चीजें चाहिए होती हैं- पाजामा, वाइन की एक बोतल और शौहर सैफ अली खान।

‘छोटा सा लॉकडाउन, दिल्ली छोड़कर न जाएँ’: इधर केजरीवाल ने किया 26 अप्रैल तक कर्फ्यू का ऐलान, उधर ठेकों पर लगी कतार

केजरीवाल सरकार ने 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे तक तक दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त कर लेने का भरोसा दिलाया है।

‘मैं इसे किस करूँगी, हाथ लगा कर दिखा’: मास्क के लिए टोका तो पुलिस पर भड़की महिला, खुद को बताया SI की बेटी-UPSC टॉपर

महिला ने धमकी देते हुए कहा कि उसका बाप पुलिस में SI के पद पर है। साथ ही दिल्ली पुलिस को 'भिखमंगा' कह कर सम्बोधित किया।

नासिर ने बीड़ी सुलगाने के लिए माचिस जलाई, जलती तीली से लाइब्रेरी में आगः 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें राख

कर्नाटक के मैसूर की एक लाइब्रेरी में आग लगने से 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें राख हो गई थी। पुलिस ने सैयद नासिर को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधिकारियों को अगवा कर मस्जिद में ले गए, DSP को किया टॉर्चरः सरकार से मोलभाव के बाद पाकिस्तान में छोड़े गए बंधक

पाकिस्तान की पंजाब प्रांत की सरकार के साथ मोलभाव के बाद प्रतिबंधित इस्लामी संगठन TLP ने अगवा किए गए 11 पुलिसकर्मियों को रिहा कर दिया है।

‘F@#k Bhakts!… तुम्हारे पापा और अक्षय कुमार सुंदर सा मंदिर बनवा रहे हैं’: कोरोना पर घृणा की कॉमेडी, जानलेवा दवाई की काटी पर्ची

"Fuck Bhakts! इस परिस्थिति के लिए सीधे वही जिम्मेदार हैं। मैं अब भी देख रहा हूँ कि उनमें से अधिकतर अभी भी उनका (पीएम मोदी) बचाव कर रहे हैं।"
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,232FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe