Saturday, July 31, 2021
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‘न्यूजलॉन्ड्री! तुम पत्रकारिता का सबसे गिरा स्वरुप हो’ कोरोना संक्रमित को फ़ोन कर सुधीर चौधरी के विरोध में कहने को विवश कर रहा NL

न्यूजलॉन्ड्री की कुत्सित मानसिकता की पोल जी न्यूज के प्रवीण श्रीवास्तव ने ट्विटर पर खोली है। बकौल प्रवीण वे संक्रमित हैं और अस्पताल में हैं। लेकिन, न्यूजलॉन्ड्री के एक पत्रकार ने उन्हें फोन कर लगातार परेशान कर रखा है।

जी न्यूज (zee news) के 29 कर्मचारी पिछले दिनों कोरोना संक्रमित पाए गए थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर वर्ग विशेष की कुत्सित मानसिकता दिखी थी। ये कर्मचारी फिलहाल अस्पताल में हैं। लेकिन मीडिया गिरोह का प्रमुख सदस्य न्यूजलॉन्ड्री इनके पीछे लगा हुआ है। उन्हें परेशान कर रहा है। जी न्यूज और उसके एडिटर इन चीफ के खिलाफ बोलने को उकसा रहा है।

न्यूजलॉन्ड्री की कुत्सित मानसिकता की पोल जी न्यूज के HR प्रवीण श्रीवास्तव ने ट्विटर पर खोली है। बकौल प्रवीण वे संक्रमित हैं और अस्पताल में हैं। लेकिन, न्यूजलॉन्ड्री के एक पत्रकार ने उन्हें फोन कर लगातार परेशान कर रखा है।

प्रवीण के खुलासे पर गौर करने से पहले एक नजर ख़बरों की धुलाई का दावा करने वाली प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘न्यूजलॉन्ड्री’ के चरित्र पर डाल लेते हैं। यह पोर्टल हीनभावना से ग्रस्त अजेंडाबाज अभिनंदन सेखरी की देखरेख में चलता है। इसने कुछ ऐसे लोगों को काम पर रखा है जो दूसरे संस्थान के लोगों का पीछा करते हैं। मनगढ़ंत आरोप लगाते है और फिर अपनी समझ के अनुसार उसकी व्याख्या करते हैं। हालाँकि यह भी एक तथ्य है कि हर बार खुद ‘न्यूजलॉन्ड्री’ वाले अपनी धुलाई करवाकर अपने आकाओं के पास लौट जाते हैं।

जी न्यूज़ के प्रवीण श्रीवास्तव ने आखिरकार ट्विटर पर न्यूजलॉन्ड्री के एक स्टाफ की पोल खोलते हुए लिखा है;

और कितना नीचे गिरोगे न्यूज़लौंड्री। ऐसे वक्त में जब मैं कोरोना से जंग लड़ रहा हूँ। एक बुरे मानसिक तनाव का सामना कर रहा हूँ, अस्पताल में हूँ। आपके पत्रकार बसंत कुमार मुझे फोन और वॉट्सएप पर परेशान कर रहे हैं, ताकि मैं सुधीर चौधरी औऱ जी न्यूज़ के खिलाफ बोलूँ।

न्यूजलॉन्ड्री में काम करने वाले बसंत कुमार की इस गिरी हरकत से तंग आकर प्रवीण श्रीवास्तव ने दूसरे ट्वीट में लिखा;-

और आपके झूठ का एजेंडा आगे बढाऊँ। अगर यही आपकी पत्रकारिता है, तो ये पत्रकारिता का सबसे गिरा स्वरुप है। अगर आप ‘सच’ के लिए मेरा पक्ष जानने को इच्छुक हैं तो मेरे वीडियो को अपनी खबर में डालें। लेकिन आप वो नहीं करेंगे, क्योंकि उससे आपका एजेंडा पंक्चर हो जाएगा।

इस ट्वीट को सुधीर चौधरी ने भी रीट्वीट किया है।

दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब न्यूजलॉन्ड्री ने निम्नस्तरीय सूझबूझ और सतही व्यावाहारिक और व्यावसायिक ज्ञान वाले अपने लोगों का इस्तेमाल कहानी गढ़ने के लिए किया है। इससे पहले न्यूजलॉन्ड्री के इसी बसंत कुमार ने ऑपइंडिया हिंदी के सम्पादक अजीत भारती को पत्रकारिता के नियम और मूल्यों पर ज्ञान देने का प्रयास किया था और उनके हिस्से का बयान छुपाकर एक कहानी तैयार कर सस्ती लोकप्रियता जुगाड़ने का प्रयास किया था।

यही नहीं बसन्त कुमार ने अपनी ‘स्वघोषित रिपोर्ट’ पर ऑपइंडिया हिंदी के सम्पादक अजीत भारती के आपत्ति जताने के बाद भी अपने दावे के समर्थन में कोई प्रमाण सामने नहीं रखा। पत्रकारिता में नैतिकता और आदर्शों की बात करते हुए अजीत भारती से बसंत ने बातचीत तो की लेकिन रिपोर्ट में वही लिखा जो उसे लिखना था, या लिखने को बोला गया था। हालाँकि, रिपोर्टर ने न तो रिपोर्ट की लिंक भेजी (ताकि यह देखा जा सके कि जो कहा है वही रिपोर्ट हुई है या फिर कुछ और), न ही फोन की बातचीत की रिकॉर्डिंग (जो कहा था कि भेजेगा)। जाहिर सी बात है कि आप इन सब चीजों को तभी छुपाते हैं जब आपको न तो पत्रकारिता की नैतिकताओं का ख्याल हो, न ही समझ।

वही कारनामा बसंत ने दूसरी बार की बातचीत में भी किया। ये जानते हुए न्यूजलॉन्ड्री का कलाकार पत्रकार दोबारा वही करेगा, दूसरी बार भी अपना पक्ष रखने के लिए बसंत के प्रश्नों का जवाब दिया और आगाह भी किया कि पिछली बार की धूर्तता न करे। न्यूजलॉन्ड्री की पत्रकारिता का आदर्श ही गंदे कपड़ों के मैल की तरह त्याज्य तरीके की रिपोर्टिंग है जो उसने इस बार भी किया है।

बसंत कुमार पत्रकारिता की सड़ांध उसी न्यूजलॉन्ड्री की खोज है, जो ख़बरों को मनचाहा स्वरुप देने के लिए बयान और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए कुख्यात है। लेकिन बसंत कुमार अकेले इस रवैए के लिए दोषी नहीं कहे जा सकते। न्यूजलॉन्ड्री के अकाउंट पर नजर डालने से पता चलता है कि उसने हाल ही में अलग-अलग लोगों को ऐसी कहानी तैयार करने के लिए विवश किया होगा, जिनके माध्यम से वो यह झूठ स्थापित कर सकें कि जी न्यूज़ के संस्थापक सुधीर चौधरी अपने स्टाफ को धमका रहे हैं।

19 मई की न्यूजलॉन्ड्री की रिपोर्ट में सुधीर चौधरी पर लगे आरोप को 22 मई को खुद ज़ी न्यूज़ का स्टाफ बेहद काल्पनिक और मनगढ़ंत बताता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब न्यूजलॉन्ड्री अपनी ही खबर की धुलाई करने का जोखिम उठाएगा? या फिर न्यूजलॉन्ड्री जानता है कि उसे सत्य, वास्तविकता, इंसानियत और तर्क से मुँह मोड़कर ही अपनी कूपमंडूकता पर अडिग रहना है?

इसी फर्जीवाड़े पर सुधीर चौधरी ने कुछ दिन पहले ही खुद भी प्रशांत भूषण के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “सुप्रीम कोर्ट को ऐसे वकीलों के ख़िलाफ़ स्वयं संज्ञान लेकर कार्यवाही करनी चाहिए जो ऐसे संकट के दौर में FAKE NEWS फैलाकर अपनी दुकानदारी चला रहे हैं। देश के तो ये कभी भी नहीं थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का भी दुरुपयोग करते हैं। जिस खबर को ये सब लोग मिलकर फैला रहे हैं वो ग़लत है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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