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कौन है PM मोदी को टोकने वाली नॉर्वे की पत्रकार Helle Lyng जो खा रही फालतू का फुटेज, चीन-राणा अयूब-The Hindu से क्या है कनेक्शन: अब माँग रही राहुल गाँधी से इंटरव्यू

लिंग ने दावा किया कि संयुक्त बयान के बाद पीएम मोदी ने उनके सवाल को टाल दिया, लेकिन भारतीय दूतावास ने बाद में उन्हें एक प्रेस ब्रीफिंग में आमंत्रित किया, जहाँ विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने उनके सवालों के जवाब दिए और भारत के लोकतांत्रिक रिकॉर्ड का बचाव किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान सोमवार (18 मई 2026) को एक नॉर्वेजियन पत्रकार हेले लिंग (Helle Lyng) सोशल मीडिया पर अचानक चर्चा में आ गईं। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने भारत में ‘मानवाधिकार उल्लंघन’ से जुड़े सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।

हेले लिंग नॉर्वे के अपेक्षाकृत कम चर्चित मीडिया संस्थान डैग्सविसन (Dagsavisen) से जुड़ी हैं। दिलचस्प बात यह रही कि घटना से पहले उनके X अकाउंट पर करीब 800 फॉलोअर्स थे और अप्रैल 2024 के बाद से उनका अकाउंट लगभग निष्क्रिय था।

(फोटो साभार: X)

पोस्ट करने के कुछ ही घंटों में उनके फॉलोअर्स 14 हजार से ज्यादा हो गए और भारतीय विपक्षी तथा लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम ने उन्हें सोशल मीडिया पर हाथों हाथ लेना शुरू कर दिया। जिस मीडिया संस्थान से हेले लिंग जुड़ी हैं, उसका X अकाउंट भी 22 जनवरी के बाद से एक्टिव नहीं था, वह अचानक एक्टिव हो गया। फेसबुक पर भी इस वीडियो को पोस्ट किया गया।

डैग्सविसन ने भारत को लेकर एक रिपोर्ट भी प्रकाशित किया था, जिसमें कहा गया कि भारत भले ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर हो, लेकिन उसकी लोकतांत्रिक स्थिति ‘कमजोर’ हो रही है।

करीब 50 साल पुरानी इस मीडिया संस्थान ने अपने अखबार में पीएम मोदी के नॉर्वे दौरे पर केनेथ लिया सोलबर्ग (Kenneth Lia Solberg) की रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट की शुरुआत भारत की आर्थिक प्रगति को बताते हुए होती है, लेकिन धीरे- धीरे उसका रुख भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की खामियाँ गिनाने और मोदी सरकार की आलोचना की तरफ मुड़ जाता है।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी है, लेकिन लोकतंत्र कमजोर हुआ है। V-डेम लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स का हवाला देते हुए कहा गया कि भारत का ‘लोकतंत्र’ 1950 के बाद सबसे निचले पायदान पर पहुँच गया है। रिपोर्ट में बीजेपी के राजनीतिक प्रभाव और ‘हिंदुत्व ‘ की आलोचना की गई है और हिंदू राष्ट्रवाद को ‘डरावना’ बताया गया।

(साभार: Dagsavisen)

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि भारत के मुसलमानों के साथ भेदभाव बढ़ा है। यह वही नैरेटिव है जिसे 2014 में पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय भारत-विरोधी समूह लगातार आगे बढ़ाते रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नॉर्वे को भारत के साथ व्यापारिक समझौते करते समय इन मुद्दों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, चाहे इससे दोनों देशों को आर्थिक फायदा ही क्यों न हो।

(साभार: Dagsavisen)

केनेथ सोलबर्ग की रिपोर्ट और हेले लिंग के सवालों की भाषा और विषय लगभग एक जैसे दिखाई दिए। उल्लेखनीय बात यह भी रही कि जिस कार्यक्रम में यह घटना हुई, वह कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं बल्कि दोनों प्रधानमंत्रियों का संयुक्त बयान था। वहाँ सवाल-जवाब का कार्यक्रम तय नहीं था। बाद में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की अलग प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की गई थी।

जब पीएम मोदी बयान देकर मंच से नीचे उतर रहे थे, तभी हेले लिंग ने जोर से पूछा, “प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों का जवाब क्यों नहीं देते?” पीएम मोदी बिना प्रतिक्रिया दिए अपने नॉर्वेजियन समकक्ष के साथ आगे बढ़ गए। ठीक यही दृश्य हेले लिंग चाहती थीं।

बाद में उन्होंने कहा, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया। मुझे इसकी उम्मीद भी नहीं थी।”

इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें भारतीय लेफ्ट-लिबरल समूहों की ओर से ‘नई हीरो’ की तरह पेश किया जाने लगा। जब उनके X अकाउंट की फॉलोइंग लिस्ट देखी गई तो उसमें द वायर, द वायर की पत्रकार शिवांगी देशवाल, खुद को पत्रकार बताने वाला राणा अय्यूब और अमेरिका स्थित विवादित एंटी-इंडिया पत्रकार लॉरा लूमर (Laura Loomer) जैसे नाम दिखाई दिए।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने भी यह वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा, “जब छिपाने के लिए कुछ नहीं होता तो डरने की जरूरत नहीं होती। दुनिया जब एक घबराए हुए प्रधानमंत्री को सवालों से भागते देखती है, तो सोचा है कभी कि भारत की छवि पर क्या असर पड़ता है?”

(साभार: X)

राहुल गाँधी के कमेंट के बाद हेले लिंग ने उन्हें इंटरव्यू के लिए अप्रोच किया। उन्होंने लिखा कि क्या आप फोन पर इंटरव्यू देने के लिए मंगलवार को उपलब्ध होंगे। ये जानना दिलचस्प है कि आप नॉर्वे दौरे को लेकर क्या सोचते हैं?

एक्स पर राहुल गाँधी के कमेंट के बाद हेले लिंग ने उन्हें इंटरव्यू के लिए अप्रोच किया। उन्होंने लिखा कि क्या आप फोन पर इंटरव्यू देने के लिए मंगलवार को उपलब्ध होंगे। ये जानना दिलचस्प है कि आप नॉर्वे दौरे को लेकर क्या सोचते हैं।

लिंग नॉर्वे की एक छोटे से मीडिया हाउस से जुड़ी थी। पीएम मोदी पर प्रोपेगेंडा फैलाने से पहले उसे भारत में कोई नहीं जानता था। एक्स पर उसकी आखिरी पोस्ट 10 अप्रैल 2024 की थी। पिछले 2 साल से वह एक्टिव भी नहीं थी। उसके पास ब्लू टिक भी नहीं था और फॉलोअर्स 1000 से कम थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान इन्होंने अचानक पैसे देकर blue tick लिया और एक्टिव हुईं।

इसके बाद इन्होंने प्रोटोकॉल तोड़कर हमारे प्रधानमंत्री को टारगेट किया। इसके तुरंत बाद भारत के विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने इन्हें सोशल मीडिया पर सपोर्ट किया। देखते ही देखते उसे लेफ्ट लिबरल गैंग का समर्थन भी मिल गया।

विडंबना यह रही कि यही राहुल गाँधी असहज सवाल पूछने वाले पत्रकारों को अक्सर ‘बीजेपी प्लांटेड पत्रकार’ कहकर खारिज करते रहे हैं। 2024 में उन्होंने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान एक असहज सवाल पूछने पर एक पत्रकार की पिटाई करा कर हत्या करवा दी थी ।

राहुल गाँधी के अलावा कई विपक्षी नेताओं, प्रचारक, यूट्यूबर्स तथाकथित इतिहासकारों और फेक न्यूज फैलाने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स ने भी हेले लिंग का समर्थन किया। राणा अय्यूब ने लिखा, “नॉर्वे दौरे पर भारतीय लोकतंत्र की असल तस्वीर दिखी।”

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि नॉर्वे की मीडिया ने वह दिखाया जो ‘गोदी मीडिया’ नहीं दिखा सकती।

(साभार: X)

TMC सांसद सागरिका घोष ने पीएम मोदी का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “नो क्वेश्चन प्लीज, हम विश्वगुरु हैं।”

(साभार: X)

राजू पारुलेकर ने कहा कि यह भारत के लिए शर्मनाक बात है कि उसका प्रधानमंत्री दुनिया के सबसे स्वतंत्र प्रेस से सवाल नहीं ले सकता।

(साभार: X)

प्रोपेगैंडाबाज यूट्यूबर अर्पित शर्मा ने इसे भारत के लिए शर्मनाक बताया और कहा कि पीएम मोदी अंतरराष्ट्रीय मीडिया को जवाब भी नहीं दे सकते।

(साभार: X)

फर्जी इतिहासकार डॉ रुचिका शर्मा ने दावा किया कि पीएम मोदी ‘स्वतंत्र प्रेस से एलर्जी’ रखते हैं और जब पत्रकार ने सवाल पूछा तो उन्होंने अपनी गति तेज कर दी।

(साभार: X)

कॉन्ग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ाते लिखा, “अरे बाबू भाग क्यों रहे हो, पूरे विश्व के सामने थू-थू करा दी।”

(साभार: X)

यूट्यूबर ध्रुव राठी बनकर फर्जी खबरें फैलाने वाले एक व्यक्ति ने इसे मोदी के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती’ बताया।

(साभार: X)

खुद को फैक्ट चेकर बताने वाले प्रोपेगैंडाबाज और ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने इस घटना का मजाक उड़ाते हुए कहा कि ANI हर जगह मौजूद नहीं रहेगा।

(साभार: X)

जब हमने मूक रैक पर लिंग द्वारा लिखे गए लेखों की जाँच की, तो पाया कि जनवरी 2025 से उन्होंने अपने लेखों में भारत का जिक्र केवल एक बार किया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत को टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी थी। ट्रम्प के प्रति घृणा उनकी रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से झलकती है, वहीं चीन के प्रति उनके मन में नरमी दिखाई देती है। यह स्पष्ट है कि उनकी कवरेज कभी भी भारत के बारे में नहीं रही है।

(साभार: Muck rack)

‘द हिंदू’ के साथ कथित तालमेल पर सवाल

घटना के दौरान एक और दिलचस्प बात सामने आई। जब हेले लिंग पीएम मोदी से सवाल पूछ रही थीं, उसी समय द हिंदू की पत्रकार सुहासिनी हैदर नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर से सवाल कर रही थीं। बाद में सुहासिनी ने लिंग का वीडियो शेयर किया और लिंग ने भी सुहासिनी का वीडियो साझा किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों के बीच संभावित समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे।

भारत पर अचानक फोकस और समय को लेकर सवाल

लिंग और उनके मीडिया संस्थान की पुरानी रिपोर्ट्स देखने पर पता चलता है कि भारत उनके कवरेज के केन्द्र में कभी नहीं रहा। कुछ सामान्य खबरें जरूर थीं, जैसे भूकंप, ट्रंप के टैरिफ या अन्य वैश्विक घटनाएँ, लेकिन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था या आंतरिक राजनीति पर गहरी विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग लगभग नहीं दिखी।

ऐसे में पीएम मोदी के दौरे के दौरान अचानक भारत के लोकतंत्र और प्रेस स्वतंत्रता को लेकर उनका आक्रामक रुख कई सवाल खड़े करता है। पूरे घटनाक्रम को देखकर यह आशंका जताई गई कि यह एक योजनाबद्ध प्रयास हो सकता है, जिसका उद्देश्य विदेशी धरती पर पीएम मोदी और भारत की छवि को नुकसान पहुँचाना था।

संयुक्त बयान के बाद पीएम मोदी के बिना जवाब दिए आगे बढ़ जाने को ‘प्रेस स्वतंत्रता’ का मुद्दा बनाकर वायरल करने की कोशिश भी इसी दिशा में देखी गई। एक और रोचक तथ्य यह रहा कि हेले लिंग के X प्रोफाइल पर मई 2026 से वेरिफिकेशन दिख रहा था यानी उन्होंने हाल ही में X प्रीमियम लिया था।

(साभार: X)

आमतौर पर वेरिफाइड अकाउंट्स को सोशल मीडिया पर ज्यादा दृश्यता मिलती है। ऐसे में उनका नया वेरिफिकेशन, अचानक वायरल होना और भारतीय लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम द्वारा बड़े स्तर पर प्रमोशन इन सबने संबंध हो सकता है।

जब MEA ने हेले लिंग को दिया जवाब

नॉर्वे स्थित भारतीय दूतावास ने लिंग के हवाले से बताया कि उसी दिन बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जानी थी। दूतावास ने लिखा, “प्रधानमंत्री की यात्रा के संबंध में आज शाम 9:30 बजे रेडिसन ब्लू प्लाज़ा होटल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। आप सभी का स्वागत है, आप वहाँ आकर अपने प्रश्न पूछ सकते हैं।” लिंग उस प्रेस ब्रीफिंग में पहुँचीं और वहाँ भी उन्होंने माहौल को टकरावपूर्ण बनाने की कोशिश की।

(साभार: X)

उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से पूछा कि नॉर्वे भारत के साथ साझेदारी बढ़ाते समय भारत पर भरोसा क्यों करे। इसके साथ ही उन्होंने मानवाधिकार उल्लंघन और पीएम मोदी द्वारा ‘आलोचनात्मक सवाल’ न लेने का मुद्दा भी जोड़ा।

लेकिन इस बार विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज (Sibi George) ने बेहद शांत लेकिन सख्त तरीके से जवाब दिया। जब लिंग ने बीच में टोका और कहा कि वह सीधा जवाब चाहती हैं, तब जॉर्ज  ने कहा, “आपने सवाल पूछा है, मुझे उसका जवाब देने दीजिए।” लगातार बाधा डालने पर उन्होंने दोबारा कहा, “कृपया बीच में मत बोलिए। यह मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस है।”

जॉर्ज ने भारत की सभ्यतागत विरासत और मानवता के प्रति उसके योगदान का हवाला देते हुए, उनके पहले प्रश्न का उत्तर दिया कि दुनिया को भारत पर भरोसा क्यों करना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें गर्व है कि हम 5000 साल पुरानी सभ्यता वाला देश हैं। हमारी सभ्यता निरंतर विकसित हुई है। हमने दुनिया में बहुत बड़ा योगदान दिया है।”

उन्होंने आगे कहा कि शून्य, शतरंज और योग जैसी अवधारणाओं की उत्पत्ति भारत में हुई है। जब लिंग ने दोबारा उन्हें अपने पसंदीदा प्रारूप में जवाब देने के लिए मजबूर करने की कोशिश की, तो जॉर्ज ने अपना संयम खोए बिना इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, “कब जवाब देना है, कहाँ जवाब देना है, कैसे जवाब देना है, ये मेरे अधिकार हैं। आपने सवाल पूछा है। मुझसे किसी खास तरीके से जवाब देने के लिए मत कहिए। मुझे जवाब देने दीजिए।”

इसके बाद उन्होंने कोविड के दौरान भारत के आचरण का हवाला देते हुए कहा कि भारत ‘गुफा में नहीं छिपा’, बल्कि दुनिया की मदद के लिए आगे आया। उन्होंने कहा, “हमने 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए। इससे भरोसा बढ़ता है। हमने 150 देशों को दवाइयाँ उपलब्ध कराईं। इससे भरोसा बढ़ता है।”

जॉर्ज ने G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत की भूमिका का भी उल्लेख किया और बताया कि भारत ने एक विभाजित विश्व को एकजुट किया और दिल्ली घोषणापत्र को सुनिश्चित किया। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को मुख्य मंच पर लाने और अफ्रीकी संघ को जी20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने के भारत के प्रयासों की भी चर्चा की।

उन्होंने कहा, “इससे विश्वास का माहौल बना क्योंकि हम पूरे अफ्रीकी महाद्वीप की आकांक्षाओं और चुनौतियों को, जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा था, G20 के मुख्य मंच पर लाने में सफल रहे।” मानवाधिकार और लोकतंत्र पर बोलते हुए जॉर्ज ने कहा कि भारत एक ऐसे संविधान पर आधारित है जो अपने नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की गारंटी देता है।

उन्होंने कहा, “भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।” उन्होंने बताया कि पिछले आम चुनावों में लगभग एक अरब लोगों ने भाग लिया था। उन्होंने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार प्राप्त हैं और उन अधिकारों का उल्लंघन होने पर न्यायालयों में जाने का अधिकार है।

चुनिंदा रिपोर्टों के आधार पर भारत के बारे में राय बनाने वालों पर कटाक्ष करते हुए जॉर्ज ने कहा कि बहुत से लोगों को भारत की ‘विभिन्नता में एकता’ की समझ नहीं है। उन्होंने कहा, “लोग कुछ अज्ञानी गैर-सरकारी संगठनों द्वारा प्रकाशित एक-दो समाचार रिपोर्ट पढ़ते हैं और फिर आकर सवाल पूछते हैं। चिंता न करें। हमें लोकतंत्र पर गर्व है।”

जब तक जॉर्ज भारत के संवैधानिक ढाँचे और लोकतांत्रिक परंपराओं पर बात करने लगे, तब तक लिंग कथित तौर पर कमरे से जा चुकी थीं। अंततः भारतीय अधिकारियों को परेशान करने का उनका प्रयास विदेश मंत्रालय के सचिव के विस्तृत, दृढ़ और स्पष्ट जवाब के साथ समाप्त हुआ, जिन्होंने यह साफ कर दिया कि भारत किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रही प्रश्न को पत्रकारिता के नाम पर पेश किए जाने की अनुमति नहीं देगा।

भारत-विरोधी तमाशा रचने की कोशिश

यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे एक सामान्य राजनयिक यात्रा को एक पत्रकार द्वारा मनगढ़ंत विवाद में बदल दिया गया, जिसका हालिया काम भारत पर शायद ही कोई गंभीर ध्यान केंद्रित करता था। लिंग को प्रश्न पूछने का अवसर देने से इनकार नहीं किया गया था। उन्हें भारतीय दूतावास द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रेस ब्रीफिंग में आमंत्रित किया गया था, जहाँ उन्हें अपने मनचाहे प्रश्न पूछने का अवसर मिला।

हालाँकि उत्तरों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय, उन्होंने बार-बार भारतीय अधिकारियों को बाधित किया और उन्हें यह बताने की कोशिश की कि उन्हें कैसे जवाब देना चाहिए। इसके बाद जो कुछ हुआ, उससे वायरल आक्रोश की खोखली सच्चाई सामने आ गई। प्रधानमंत्री मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं हटे थे।

वे एक संयुक्त बयान के बाद चले गए थे, जहाँ प्रश्नोत्तर सत्र निर्धारित नहीं था। वास्तविक प्रेस वार्ता बाद में हुई और विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने भारत की लोकतांत्रिक संरचना और संवैधानिक गारंटी से लेकर कोविड काल में इसकी वैश्विक भूमिका, जी20, ग्लोबल साउथ के साथ संपर्क और अफ्रीकी संघ के समर्थन तक, सभी सवालों के विस्तृत जवाब दिए।

फिर भी भारतीय वामपंथी उदारवादी तंत्र ने इस सुनियोजित अवसर का फायदा उठाकर प्रधानमंत्री मोदी और भारत पर हमला किया। लिंग की लोकप्रियता में अचानक उछाल, हाल ही में उनका एक्स-रे सत्यापन, उनके प्रकाशन का भारत-विरोधी स्वरूप और कॉन्ग्रेस नेताओं, TMC सांसदों, प्रचारकों और फर्जी समाचार फैलाने वालों द्वारा इसका तुरंत प्रचार-प्रसार यह दर्शाता है कि यह पत्रकारिता से कहीं अधिक विदेशी धरती पर भारत-विरोधी तमाशा रचने की कोशिश थी।

मूल रुप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

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Anurag
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Anurag is a Chief Sub Editor at OpIndia with over twenty one years of professional experience, including more than five years in journalism. He is known for deep dive, research driven reporting on national security, terrorism cases, judiciary and governance, backed by RTIs, court records and on-ground evidence. He also writes hard hitting op-eds that challenge distorted narratives. Beyond investigations, he explores history, fiction and visual storytelling. Email: [email protected]

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