Monday, April 15, 2024
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कार्यक्रम का नाम UPSC जिहाद क्योंकि ज़कात फ़ाउंडेशन लेता है आतंकी संगठनों से फंडिंग: सुदर्शन टीवी ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चर्चा होनी चाहिए कि ज़कात फ़ाउंडेशन की फंडिंग आतंकवादियों संगठनों द्वारा की जा रही है। उन्होंने इस बात पर भी अपना पक्ष रखा कि 4 कार्यक्रमों की शृंखला में कहीं ऐसा नहीं कहा गया है कि किसी समुदाय के व्यक्ति को यूपीएससी का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।

गुरूवार को सुदर्शन टीवी के एडिटर इन चीफ़ सुरेश चव्हाणके ने सर्वोच्च न्यायालय के सामने अपना पक्ष रखा। जिसमें उन्होंने कहा बिंदाल बोल कार्यक्रम के तहत प्रसारित किए जाने वाले यूपीएससी (UPSC) जिहाद इसलिए रखा गया क्योंकि इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक़ ज़कात फ़ाउंडेशन की फंडिंग तमाम आतंकवादी संगठनों के द्वारा की जाती है। 

राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चर्चा होनी चाहिए कि ज़कात फ़ाउंडेशन की फंडिंग आतंकवादियों संगठनों द्वारा की जा रही है। उन्होंने इस बात पर भी अपना पक्ष रखा कि 4 कार्यक्रमों की शृंखला में कहीं ऐसा नहीं कहा गया है कि किसी समुदाय के व्यक्ति को यूपीएससी का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। 

सुदर्शन टीवी ने यह भी कहा ज़कात फ़ाउंडेशन को मदीना ट्रस्ट यूके से फंडिंग मिलती है। डॉक्टर ज़ाहिद अली परवेज़ इस ट्रस्ट के एक ट्रस्टी है। परवेज़ इसके अलावा इस्लामिक फ़ाउंडेशन का भी ट्रस्टी है। 

ज़कात फ़ाउंडेशन ने विदेश मंत्रालय को दी गई जानकारी में बताया कि उसे वित्तीय वर्ष 2018-2019 में यूनाइटेड किंगडम की मदीना ट्रस्ट से 13,64,694.00 रूपए मिले थे। मदीना ट्रस्ट हमेशा से भारत विरोधी गतिविधियों के लिए मशहूर रहा है। ऐसी तमाम साक्ष्य और घटनाएँ हैं जिनमें साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि यह ट्रस्ट ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है। 

सुदर्शन न्यूज़ का यह कार्यक्रम सुर्ख़ियों में तब आया जब उसने एक कार्यक्रम का प्रोमो जारी किया जिसका प्रसारण 28 अगस्त को किया जाना था। सुरेश चव्हाणके ने बताया कि उनके चैनल द्वारा इकट्ठा की गई जानकारी के अनुसार हाल फ़िलहाल में प्रशासनिक पदों पर और पुलिस विभाग में मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा मुस्लिम उम्मीदवारों को जितने अंक मिले हैं वह भी बाकी उम्मीदवारों की तुलना में कहीं ज़्यादा हैं। इसके बाद तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसके विरोध में मामला दर्ज कराया। जिससे इस कार्यक्रम का प्रसारण रुक जाए। 

इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आदेश के पालन पर सहमति जताई थी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने आज ही वकील फ़िरोज़ इकबाल द्वारा कार्यक्रम का प्रसारण किए जाने के मामले में दायर की गई याचिका पर सुनवाई थी।    

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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