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CAA-NRC, किसान आंदोलन, हिजाब, पैगंबर… जैसे हिंसक विरोध-प्रदर्शन से देश को हुआ ₹5040469 करोड़ का नुकसान: GPI की रिपोर्ट में खुलासा

ग्लोबल पीस इंडेक्स के मुताबिक, करीब हिंसा के कारण देश को जो नुकसान झेलना पड़ा है वो भारत के कुल जीडीपी का 6% है। हालाँकि, ये कोई एक साल की रिपोर्ट नहीं है। जीपीआई ने अपनी रिपोर्ट में में दावा किया है कि बीते कुछ सालों में हुए आतंकी और नक्सली हमले भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।

देश में लगातार होते प्रदर्शनों और हिंसा (Violence) की घटनाओं के कारण देश को आर्थिक तौर पर कड़ी चोट पहुँची है। इसका खुलासा ग्लोबल पीस इंडेक्स (GPI) की रिपोर्ट में किया है। संस्था ने खुलासा किया है कि हिंसा की घटनाओं के कारण भारत को पिछले साल करीब $646 अरब डॉलर (करीब 50 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है।

भारत 163 देशों की सूची में 135वें स्थान है, जबकि पाकिस्तान और चीन क्रमश: 54 और 138वें स्थान पर काबिज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सीएए-एनआरसी समेत कई अन्य तरह की हिंसक घटनाओं में बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इन पैसों से देश के लिए कई तरह की कल्याणकारी योजनाओं को संचालित किया जा सकता था।

ग्लोबल पीस इंडेक्स के मुताबिक, करीब हिंसा के कारण देश को जो नुकसान झेलना पड़ा है वो भारत के कुल जीडीपी का 6% है। हालाँकि, ये कोई एक साल की रिपोर्ट नहीं है। जीपीआई ने अपनी रिपोर्ट में में दावा किया है कि बीते कुछ सालों में हुए आतंकी और नक्सली हमले भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।

वैश्विक शांति सूचकांक में भारत 72वें स्थान पर है। उल्लेखनीय है कि वैश्विक शांति सूचकांक-2022 की रिपोर्ट में आइसलैंड दुनिया का सबसे शांत देश रहा है। वहीं, शांति के मामले में दूसरे स्थान पर न्यूजीलैंड और तीसरे स्थान पर आयरलैंड हैं।

इन देशों की हालत सबसे बुरी

अगर दुनिया के सबसे अशांत देशों की बात की जाए तो जीपीआई के सूचकांक में अफगानिस्तान सबसे टॉप पर है। इसके बाद आतंकवाद ग्रस्त यमन और सीरिया हैं। खास बात है कि दुनिया के हिंसाग्रस्त देशों की संख्या भी अब बढ़कर 29 से 38 हो गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका महाद्वीप के बाद एशिया दुनिया का सबसे अशांत क्षेत्र है। वहीं, अगर हिंसा के वैश्विक नुकसान को देखें तो इसके कारण दुनिया भर में 16.5 ट्रलियन डॉलर (1,300 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान झेलना पड़ा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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