Tuesday, February 17, 2026
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‘पाकिस्तान से हुआ जंग तो नहीं लड़ेगे सिख सैनिक’: खालिस्तानी आतंकी पन्नू को ‘हथियार’ बना पाकिस्तानी मीडिया कर रहा प्रोपेगेंडा, पहलगाम अटैक को बताया भारत की साजिश

गुरपतवंत सिंह पन्नू एक अमेरिकी-कनाडाई नागरिक है, जो खुद को वकील बताता है। यह सिखों के अधिकारों की आड़ में खालिस्तानी भावनाएँ भड़काता है और भारत के खिलाफ जहरीली धमकियाँ देता है।

पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल आजाद सियासत ने रविवार (27 अप्रैल 2025) को भारत-विरोधी खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का इंटरव्यू किया। इस इंटरव्यू में गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कई जहरीले, बेबुनियाद और उत्तेजक दावे किए, जो भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने की उसकी नापाक मंशा को साफ दिखाते हैं। इसने दावा किया कि पंजाब के दो करोड़ सिख भारत सरकार को कभी भी पाकिस्तान पर हमला करने की इजाजत नहीं देंगे।

साथ ही इसने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले को भारतीय खुफिया एजेंसियों की साजिश करार दिया और कहा कि इसका मकसद बिहार विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को फायदा पहुँचाना था। यह इंटरव्यू उस वक्त सामने आया, जब पहलगाम हमले में 27 मासूम हिंदू पर्यटकों की जान चली गई थी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया।

इस आतंकी ने इंटरव्यू में पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित इस्लामी आतंकवाद को बचाने की घटिया कोशिश की। पन्नू ने बेशर्मी से दावा किया कि पहलगाम हमला पाकिस्तान का काम नहीं, बल्कि भारतीय एजेंसियों की करतूत थी। इसके मुताबिक, यह हमला बीजेपी को बिहार चुनाव में वोटों का ध्रुवीकरण करने और राजनीतिक फायदा लेने के लिए करवाया गया। इस नीच ने यह भी कहा कि ऐसे हमले अक्सर तब होते हैं, जब अमेरिका के बड़े नेता भारत आते हैं, ताकि पाकिस्तान की छवि अंतरराष्ट्रीय मंच पर खराब की जा सके। इसके इन दावों का कोई सबूत नहीं है, और ये सिर्फ भारत को बदनाम करने की इसकी साजिश का हिस्सा हैं।

गुरपतवंत सिंह पन्नू नाम के इस देशद्रोही ने एक और घिनौना दावा किया कि पंजाब के लोग और भारतीय सेना में तैनात सिख सैनिक और अधिकारी इसके इशारे पर पाकिस्तान के साथ खड़े हैं। इसने भारत के उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया कि भारत अब सिंधु जल संधि का पूरी तरह पालन नहीं करेगा। इस आतंकी ने इसे भारत की आक्रामकता बताते हुए दावा किया कि भारत-पाकिस्तान का पानी रोकना चाहता है।

पन्नू ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री के उन बयानों का हवाला दिया, जिनमें पानी रोकने को युद्ध की कार्रवाई माना गया है। पन्नू ने भारतीय पंजाब में रहने वाले सिखों की आड़ लेकर सवाल उठाया कि अगर भारत-पाकिस्तान में जंग हुई, तो सिखों का क्या होगा? यह साफ दिखाता है कि यह आतंकी सिख समुदाय को भारत के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहा है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दावा किया कि सिख समुदाय पाकिस्तान के साथ खड़ा होगा और भारत को पंजाब के रास्ते हमला करने से रोकेगा। इसने कहा कि 2025 में हालात 1965 और 1971 जैसे नहीं हैं, और सिख अब इसके साथ हैं। लेकिन इसने यह शर्त रखी कि सिख तभी पाकिस्तान का साथ देंगे, अगर पाकिस्तान खुलकर खालिस्तान की माँग का समर्थन करे। इस आतंकी ने पाकिस्तानी सरकार से माँग की कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खालिस्तान का मुद्दा उठाए और खालिस्तान रेफरेंडम को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में मान्यता दे। यह साफ है कि यह भारत को तोड़ने की साजिश में पाकिस्तान को उकसा रहा है।

पन्नू ने आगे कहा कि अगर पाकिस्तान खालिस्तान का समर्थन करता है, तो दुनिया भर के सिख इसके साथ एकजुट हो जाएँगे। उसने 1971 के युद्ध का जिक्र किया, जब भारत की मदद से बांग्लादेश बना। इस नीच ने आरोप लगाया कि अब भारत बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करना चाहता है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयानों में जिक्र किया। इसने दावा किया कि खालिस्तान का समर्थन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार हो सकता है। उससे भारत के पंजाब में लाखों सिख इसके साथ आ जाएँगे। यह भारत की एकता के लिए खुला खतरा है, और इसकी मंशा साफ है कि यह सिखों को भारत के खिलाफ हथियार बनाना चाहता है।

इस खालिस्तानी आतंकी ने दावा किया कि इसने भारतीय सेना के सिख सैनिकों को भारत के प्रति वफादारी छोड़ने के लिए उकसाने की कोशिश की है। इसने कहा कि इसके इन गंदे कामों की वजह से भारत में इस पर देशद्रोह के कई मामले दर्ज हैं। इस नीच ने भारतीय सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सिखों को अब समझ आ गया है कि उनका असली दुश्मन पाकिस्तान नहीं, बल्कि भारत सरकार है। इसने 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार का जिक्र किया, जब भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके अलावा, इसने नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों और 1984 से 1995 तक पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाइयों का हवाला दिया, जिनमें हजारों सिख युवा मारे गए। यह साफ है कि यह आतंकी पुरानी घटनाओं को तोड़-मरोड़कर सिखों में भारत के खिलाफ नफरत फैलाना चाहता है।

इंटरव्यू के दौरान पन्नू ने पाकिस्तान सरकार की तारीफ की, जो सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर साहिब जाने की इजाजत देती है, लेकिन भारतीयों को वीजा नहीं देती। इसने इसे एक अच्छा कदम बताया, लेकिन कहा कि भारत की कथित आक्रामकता को रोकने के लिए यह काफी नहीं है। इसने फिर जोर दिया कि पाकिस्तान को खालिस्तान का खुलकर समर्थन करना चाहिए, ताकि सिख इसके साथ खड़े हों। यह साफ दिखाता है कि यह आतंकी भारत के खिलाफ पाकिस्तान को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने खालिस्तान रेफरेंडम का जिक्र किया और कहा कि यह सिख समुदाय के दम पर चल रहा है, भले ही किसी सरकार का समर्थन न हो। इसने बताया कि जल्द ही यह रेफरेंडम भारत के पंजाब में होगा, जिसमें हिंदू और मुस्लिम भी वोट दे सकेंगे। उसने 17 अगस्त 2025 को वाशिंगटन डीसी में होने वाले रेफरेंडम को अहम बताया और कहा कि यह ‘पंजाब वोट फॉर इंडिपेंडेंस’ कैंपेन के तहत व्हाइट हाउस और अमेरिकी कॉन्ग्रेस में लॉबिइंग कर रहा है। यह साफ है कि यह आतंकी विदेशी धरती पर बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है।

इस नीच ने भारत पर खालिस्तानी आतंकियों और समर्थकों के खिलाफ सख्ती का आरोप लगाया। इसने कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और यूके में इसके सहयोगी परमजीत सिंह पम्मा पर हुए कथित हमले का जिक्र किया। पन्नू ने दावा किया कि एक बीजेपी सांसद ने उसके सिर पर 5 लाख डॉलर का इनाम रखा है, लेकिन वो मौत से नहीं डरता। पन्नू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बेशर्मी से चुनौती दी कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और सिखों के बीच सीधा मुकाबला करें। यह इसकी हिमाकत दिखाता है कि यह भारत के नेतृत्व को खुलेआम धमकी दे रहा है।

इस आतंकी ने कश्मीर के तथाकथित आजादी आंदोलन का समर्थन किया और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को ‘आजादी का लड़ाका’ बताया। लेकिन इसने अमेरिका, यूके और कनाडा में रहने वाले कश्मीरियों पर निशाना भी साधा, जो कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के समर्थन में भारतीय दूतावासों के बाहर प्रदर्शन नहीं करते। यह दिखाता है कि यह आतंकी न सिर्फ खालिस्तान, बल्कि कश्मीर में भी अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है।

बता दें कि पहलगाम आतंकी हमला 22 फरवरी को हुआ था, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी द रेसिस्टेंस फोर्स (टीआरएफ) ने 27 मासूम हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया। हमलावरों ने पीड़ितों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी, कलमा पढ़ने को कहा और उनके कपड़े उतारकर जाँच की कि उनका खतना हुआ है या नहीं। जो इस जाँच में ‘फेल’ हुए, उन्हें बेरहमी से गोली मार दी गई।

गौरतलब है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू एक अमेरिकी-कनाडाई नागरिक है, जो खुद को वकील बताता है। यह सिखों के अधिकारों की आड़ में खालिस्तानी भावनाएँ भड़काता है और भारत के खिलाफ जहरीली धमकियाँ देता है। भारत ने इसे गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकी घोषित किया है। इसका संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस‘ भी भारत में आतंकी संगठन की सूची में है। यह भारत का कट्टर दुश्मन है, जो विदेशी धरती से भारत की एकता और शांति को भंग करने की साजिश रच रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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