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पहले सोशल मीडिया पर बने ‘वोक-लिबरल’, किया फिलिस्तीन का समर्थन: अब अमेरिकी वीजा लेने को पोस्ट डिलीट कर रहे भारतीय छात्र, ट्रंप ने किया है स्टैंड में बदलाव

सोशल मीडिया पर कोई भी राजनीतिक पोस्ट, कोई मज़ाक या एक्टिविज़्म से जुड़ी सामग्री अमेरिकी वीज़ा अधिकारियों द्वारा गलत समझी जा सकती है और आपका वीज़ा रद्द हो सकता है।

अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए अब उनका सोशल मीडिया अकाउंट एक बड़ी रुकावट बन रहा है। दरअसल, अमेरिकी वीज़ा अप्लाई करने के लिए भारतीय छात्र अपने सोशल मीडिया से ऐसे पोस्ट हटा रहे हैं, जिनसे उन्हें लगता है कि उनके वीज़ा पर कोई आँच आ सकती है।

ट्रंप सरकार का सख्त रुख

ट्रंप ने सभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सोशल मीडिया की कड़ी जाँच को अनिवार्य करने पर विचार किया है। इसका सीधा और साफ मतलब है कि आपके सोशल मीडिया पर कोई भी राजनीतिक पोस्ट, कोई मज़ाक या एक्टिविज़्म से जुड़ी सामग्री अमेरिकी वीज़ा अधिकारियों द्वारा गलत समझी जा सकती है और आपका वीज़ा रद्द हो सकता है।

यह नई सख्ती 2024 में अमेरिकी कॉलेज परिसरों में हुए फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों और यहूदी विरोधी घटनाओं के बाद ट्रंप सरकार की अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर कड़ी निगरानी रखने की कोशिश का हिस्सा है।

कौन-कौन डिलीट कर रहा है पोस्ट?

  • मान्या (बदला हुआ नाम): एक छात्रा ने अपने वीज़ा काउंसलर की सलाह पर अपने इंस्टाग्राम और लिंक्डइन प्रोफाइल ही हटा दिए।
  • दिलजीत (बदला हुआ नाम): इन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को प्राइवेट कर दिया है।
  • सूरज (बदला हुआ नाम): एक आइवी लीग यूनिवर्सिटी में मास्टर्स के लिए चुने गए सूरज ने अपना लिंक्डइन अकाउंट हटा दिया है और अब वो किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होते।
  • JNU के एक पीएचडी स्कॉलर: इन्होंने भी अपने सोशल मीडिया से फिलिस्तीन समर्थक सामग्री हटाई है। इसके अलावा फेसबुक और इंस्टाग्राम से भी डिलीट करने की संभावना जताई जा रही है।

पोस्ट डिलीट करने की वजह

छात्र मुख्य रूप से वीज़ा रिजेक्ट होने के डर से ऐसा कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि ज़रा सा भी राजनीतिक या हिंसक एक्टिविज़्म उनके अमेरिकी वीज़ा के लिए खतरा बन सकता है। अमेरिकी प्रशासन फेसबुक, एक्स, लिंक्डइन और टिकटॉक जैसे सभी प्लेटफॉर्म की जाँच करने की योजना बना रहा है, और उन्हें पिछले पाँच सालों के सोशल मीडिया हैंडल की जानकारी भी देनी होती है।

एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि सिर्फ पोस्ट करना ही नहीं, बल्कि अमेरिकी कानून के तहत अवैध मानी जाने वाली गतिविधियों से संबंधित पोस्ट को लाइक करना, कमेंट करना या शेयर करना भी वीज़ा रद्द होने का कारण बन सकता है। ‘आपत्तिजनक’ सामग्री क्या मानी जाएगी, यह अभी पूरी तरह से साफ नहीं है, लेकिन फिलिस्तीन समर्थक विचार या अमेरिकी विरोधी भावनाएँ खास तौर पर कड़ी जाँच के दायरे में आ सकती हैं।

छात्र क्या करें?

वीज़ा काउंसलर यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि अचानक से ढेर सारे पोस्ट डिलीट करना भी अधिकारियों के लिए ‘रेड फ्लैग‘ बन सकता है। इससे उन्हें शक हो सकता है कि छात्र कुछ छिपा रहा है। अमेरिकी सरकार पहले से ही AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल करके उन विदेशी छात्रों के वीज़ा रद्द कर रही है जो कुछ समूहों का समर्थन करते हुए दिखाई देते हैं।

शिक्षा सलाहकार छात्रों को सलाह दे रहे हैं कि वे अपने डिजिटल फुटप्रिंट पर नज़र रखें और सोच-समझकर पोस्ट करें। उन्हें ऐसे पोस्ट करने चाहिए जिससे उनके पढ़ाई के लक्ष्य और दुनिया को समझने का नज़रिया दिखाई दे। अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत करें, लेकिन इतना भी नहीं कि आप कुछ छिपाते हुए दिखें।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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