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AXIS बैंक के विज्ञापन में नवरात्रि की धूम के बीच अचानक टपके सांता क्लॉज, फिर वही ‘सेक्युलरिज्म’ का पाठ: हिंदू त्योहारों के ‘ईसाई करण’ पर भड़के लोग

एक्सिस बैंक के इस विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया में बवाल मचा हुआ है। हिंदू त्योहार पर ईसाई करण को लेकर विरोध हो रहा है। नेटिजन्स एक्सिस बैंक से विज्ञापन हटाने की माँग कर रहे हैं। ट्विटर/एक्स पर बैंक को बॉयकाट करने का हैशटैग ट्रेंड भी चल रहा है।

हिंदू त्योहार दीवाली के मौके पर एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने अपना नया विज्ञापन कैंपेन ‘दिल से ओपन सेलिब्रेशन 2025’ लॉन्च किया है। हैरानी की बात यह है कि इस विज्ञापन में दीवाली की रोशनी और नवरात्रि की धूम के बीच अचानक सांता क्लॉज टपक पड़ते हैं।

जाहिर है, यह वही सांता है जो आमतौर पर क्रिसमस का प्रतीक है। इन्हीं सांता को हिंदू त्योहारों के बीच लाकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि त्यौहार सबका है और उत्सव धर्म की सीमाओं से परे होना चाहिए। यानि वही हिंद त्योहारों पर सेक्युलरिज्म का भाषण।

इस विज्ञापन की वीडियो में दिखाया गया कि नवरात्रि के अवसर पर ‘गरबा डांस’ चल रहा होता है तभी अचानक सांता क्लॉज की एंट्री हो जाती है। इस विज्ञापन से एक्सिस बैंक ने अपने ऑफर्स प्रोमोट करने की कोशिश की है, जो नवरात्रि से लेकर दीवाली और फिर क्रिसमस तक चलेंगे।

सोशल मीडिया पर एक्सिस बैंक के ‘ईसाई करण’ का विरोध

एक्सिस बैंक के इस विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया में बवाल मचा हुआ है। एक्सिस बैंक पर ईसाई करण को लेकर विरोध हो रहा है। नेटिजन्स एक्सिस बैंक से विज्ञापन हटाने की माँग कर रहे हैं। ट्विटर/एक्स पर बैंक को बॉयकाट करने का हैशटैग ट्रेंड भी चल रहा है।

एक्सिस बैंक के विज्ञापन पर एक्स यूजर The Jaipur Dialogues ने लिखा, “एक्सिस बैंक सांता क्लॉज के साथ नवरात्रि मना रहा है। यह हिंदू त्योहार को नीचा दिखाने की चरम सीमा है। एक्सिस बैंक इस विज्ञान को तुरंत वापस ले वरना बहिष्कार का सामना करे। एक्सिस बैंक को सबक सिखाना जरूरी है।”

एक्स पर Treeni ने लिखा, “नवरात्रि का ईसाई करण? एक्सिस बैंक नवरात्रि के दौरान सांता क्लॉज को उपहार बाँटते हुए दिखाकर हिंदू धर्म का मजाक उड़ा रहा है और आने वाले सभी हिंदू त्योहारों में भी ऐसा ही करने की योजना बना रहा है!”

एक्स यूजर अभय प्रताप सिंह ने लिखा, “Axis Bank ने किया नवरात्रि का ईसाई करण आख़िर हिंदू त्योहारों के साथ ही ऐसा खिलवाड़ क्यों होता है? क्या ईद के एड में सेंटा क्लॉज केपी दिखा सकते हैं? क्या क्रिसमस के एड में इस्लामिक प्रतीकों को दिखा सकते हैं? फिर नवरात्रि के एड में सेंटा क्लॉज क्यों?”

अदवाएता नाम की एक्स यूजर ने लिखा, “मैं अपनी बीमा योजना की जाँच करवाती हूँ, तुम्हारी बेवकूफी के चलते अपना खाता बंद करवाऊँगी। पागल आदमी.. इस bugger का हमारे नवरात्रि से क्या संबंध है??”

रितु प्रिया नाम की एक्स यूजर ने लिखा, “ये क्या मजाक है?? थोड़ा दिन में रहना सीखो, हमारे पर्व त्यौहार पर अपनी रोटी सेंकने की कोशिश न करें।”

वैशाली मिश्रा नाम की एक्स यूजर ने सवाल किया, “ईद हो या कोई अन्य मुस्लिम पर्व आप ऐसा ऐड बना सकते हैं।”

सौरव सिंह नाम के एक्स यूजर ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को टैग करते हुए एक्सिस बैंक पर कार्रवाई की माँग की। यूजर ने लिखा, “@RBI @PMOIndia कृपया कार्रवाई करें। हिंदुओं की भावनाएँ भी मायने रखती हैं।”

एक्स यूजर पारीतोष व्यास ने लिखा, “इस विज्ञापन में आप क्या बकवास दिखा रहे हैं? यह विचार किस विज्ञापन एजेंसी के दिमाग में आया है? एक्सिस बैंक हिंदुओं को क्या बताना चाह रहा है? भारतीय त्योहारों को बेचने का एक बहुत ही घटिया तरीका। कृपया इस विज्ञापन को कूड़ेदान में फेंक दो। बेवकूफ लोग।”

एक यूजर ने लिखा, “गरबा हिंदू धर्म की परंपरा है जो देवी पूजन से संबंधित है कोई साधारण नाच नहीं है फिर इसमें सांता क्लॉज का क्या काम? क्या एक्सिस बैंक ऐसा मजाक अन्य धर्मों के साथ कर सकता है?”

हिंदू त्योहारों को निशाना बनाकर ‘सेक्युलरिज्म’ का पाठ

एक्सिस बैंक ने हिंदू त्योहारों पर सेक्युलरिज्म का वही पुराना पाठ पढ़ाने की कोशिश की है, जो पहले भी कई ब्रांड्स और कंपनियाँ दे चुकी है। यानि हिंदू त्योहार को निशाना बनाकर नीचा दिखाने का यह पहला मामला नहीं है। साल 2020 में ज्वैलरी ब्रांड ‘तनिष्क’ ने दीवाली पर लव जिहाद को प्रमोट करते विज्ञापन बनाया था।

इस विज्ञापन में एक हिंदू बहू को उसकी मुस्लिम सास के साथ मिलकर गोद भराई का जश्न मनाते हुए दिखाया गया था। यह वही सेकुलर प्रोपेगेंडा है, जिसके बाद हिंदू लड़कियाँ फ्रिज और सूटकेस में मिलती हैं।

ऐसे कई ब्रांड्स और कंपनियाँ हौ जो सेकुलर विज्ञापन के नाम पर हिंदुओं का अपमान करते हैं। इसमें सभी धर्मों को एक बताते हुए हिंदुओं को कट्टर और असहिष्णु दिखाया जाता है। वहीं मुस्लिम को ‘पीड़ित’ और शांतिप्रिय दिखाते हैं और यह सब केवल हिंदू त्योहारों को निशाना बनाकर किया जाता है।

गौर करने वाली बात यह भी है कि रमजान या ईद के विज्ञापन आते हैं तो उनमें किसी और धर्म का प्रतीक या त्योहार नहीं घुसाया जाता। क्रिसमस के विज्ञापन में कभी दीवाली की झलक नहीं मिलती। लेकिन दीवाली और नवरात्रि जैसे हिंदू त्योहारों पर अक्सर बड़ी-बड़ी कंपनियाँ सेक्युलरिज्म का झंडा लेकर आ धमकती हैं।

एक्सिस बैंक का यह विज्ञापन भी उसी सोच का हिस्सा लगता है, जहाँ हिंदू त्योहारों को किसी न किसी बहाने ‘सभी के’ त्योहार में बदलने की कोशिश की जाती है। यह एक सोची-समझी मार्केटिंग रणनीति है, जिसमें कंपनियाँ जानबूझकर हिंदू पर्वों पर ही ‘सेक्युलरिज्म’ का पाठ पढ़ाती हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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