Saturday, July 31, 2021
Homeसोशल ट्रेंडमुनव्वर फारूकी ने कोई ‘जोक क्रैक’ नहीं किया तो जैनब सच-सच बतलाना कमलेश तिवारी...

मुनव्वर फारूकी ने कोई ‘जोक क्रैक’ नहीं किया तो जैनब सच-सच बतलाना कमलेश तिवारी क्यों रेता गया

लिबरल गैंग की सदस्यता का सबसे बड़ा पैमाना यही है, खुद को ‘अल्ट्रा इंटेलेक्चुअल’ दिखाने के लिए हिन्दू शब्द के इर्द-गिर्द पूरी निर्लज्जता से नफ़रत उगलनी पड़ती है।

इस्लामपरस्त लिबरल ज़ैनब सिकंदर सिद्दीकी चर्चा में हैं और ट्विटर पर #KamleshTiwari ट्रेंड कर रहा है। स्वघोषित स्तंभकार (columnist) और पोएट्री जंकी (कविता से लगाव रखने वाली) ज़ैनब वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द प्रिंट’ के लिए भी लिखने का पूरा प्रयास करती हैं। फ़िलहाल अपने एक ट्वीट की वजह से चर्चा में हैं। ट्वीट में उन्होंने कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी का ज़िक्र किया है। 

लिबरल गैंग की प्राथमिक सदस्यों में एक जैनब ने ट्वीट में मिथ्या प्रचार करते हुए लिखा है, “मुनव्वर फारूकी अभी तक जेल में बंद है। एक ऐसे जोक (चुटकुले) के लिए जो उसने ओपन माइक में सुनाया ही नहीं।” लिबरल गैंग की सदस्यता का सबसे बड़ा पैमाना यही है, खुद को ‘अल्ट्रा इंटेलेक्चुअल’ दिखाने के लिए हिन्दू शब्द के इर्द-गिर्द पूरी निर्लज्जता से नफ़रत उगलनी पड़ती है। जब नफ़रत उगली जा चुकी हो तो उसकी वकालत में उतरना पड़ता है।

कुछ ऐसा ही किया था तथाकथित स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने। वह इंदौर में कॉमेडी के नाम पर नाबालिगों के सामने अश्लीलता परोस रहा था। हिन्दू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी कर रहा था, ऐसी टिप्पणी जो दूसरे मज़हब पर की जाएँ तो सिर तन से जुदा कर दिया जाता है और इसके कितने उदाहरण हैं, उनकी कोई गिनती नहीं।  

फिर भी ज़ैनब के मुताबिक़ मुनव्वर फारूकी ने कोई ‘जोक क्रैक’ नहीं किया। ज़ैनब सरीखे लिबरल इस्लामपरस्तों के मुताबिक़ मुनव्वर ने तो सीता-राम के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी नहीं किया और न ही मृत कारसेवकों के लिए ज़हर उगला। जिन ‘उन्मादी चुटकुलों’ से आम जनता की दूरी महज़ एक क्लिक है, ज़ैनब जैसे लिबरपंथियों के मुताबिक़ मुनव्वर ने वह चुटकुले कहे ही नहीं। 

शायद इसलिए इंटरनेट की जनता ने ज़ैनब सिकंदर सिद्दीकी को एक नाम याद दिलाया, कमलेश तिवारी। ऐसा नाम जो इस बात की नज़ीर है कि ‘शांतिप्रिय मज़हब की आस्था’ पर किसी भी तरह की टिप्पणी कितनी जानलेवा साबित हो सकती है। शांतिप्रिय मज़हब पर की गई टिप्पणी के बदले कमलेश तिवारी का गला रेत दिया गया

हिंदूफोबिक मुनव्वर के ‘पीड़ित मुसलमान’ होने वाली प्रोपेगेंडा को हवा देने वाली जैनब अकेली नहीं हैं। इस फेहरिस्त में पत्रकारिता के चोले में इस्लामी एजेंडे को बढ़ाने वाली आरफा खानम शेरवानी से लेकर नबा सकवी तथा लिबरल रोहिणी सिंह तक के नाम शामिल हैं।

तभी नेटिज़न्स ने ज़ैनब से पूछा कि कोई बता सकता है ‘कमलेश तिवारी का अपराध क्या था?’

नेटिज़न्स ने लिबरल्स को याद दिलाया कि सिर्फ ‘टिप्पणी’ के चलते ही एक व्यक्ति आज इस ग्रह पर नहीं है।

कितनी विचित्र विडंबना है, धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं और उनका विरोध होता है तो साम्प्रदायिकता! लेकिन मज़हबी जज़्बात आहत होते हैं तो…। दोनों घटनाओं की स्वभाव में कितना फासला है, कमलेश तिवारी की टिप्पणी का नतीजा और मुनव्वर फारूकी की टिप्पणी का नतीजा

भ्रम में रहने वाले आबादी को दुनिया के उदाहरणों पर गौर करना चाहिए। चाहे कार्टून दिखाने के बाद कट्टरपंथी इस्लामियों द्वारा शिक्षक (सैमुएल पैटी) का गला रेतने की घटना हो या शार्ली हेब्दो कार्यालय पर हुई अंधाधुंध गोलीबारी। ‘इतनी ज़्यादा सहिष्णुता’ पूरी दुनिया शायद मिल कर भी हज़म नहीं कर पाए। आखिर समस्याओं का इतना सरल हल किस मजहब में मिलता होगा? एक टिप्पणी और सिर का शरीर से रिश्ता खत्म।   

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

माँ का किडनी ट्रांसप्लांट, खुद की कोरोना से लड़ाई: संघर्ष से भरा लवलीना का जीवन, ₹2500/माह में पिता चलाते थे 3 बेटियों का परिवार

टोक्यो ओलंपिक में मेडल पक्का करने वाली लवलीना बोरगोहेन के पिता गाँव के ही एक चाय बागान में काम करते थे। वो मात्र 2500 रुपए प्रति महीने ही कमा पाते थे।

फ्लाईओवर के ऊपर ‘पैदा’ हो गया मज़ार, अवैध अतिक्रमण से घंटों लगता है ट्रैफिक जाम: देश की राजधानी की घटना

ताज़ा घटना दिल्ली के आज़ादपुर की है। बड़ी सब्जी मंडी होने की वजह से ये इलाका जाना जाता है। यहाँ के एक फ्लाईओवर पर अवैध मजार बना दिया गया है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
112,163FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe