Homeसोशल ट्रेंडजिस अपर्णा यादव का उजड़ा सुहाग, उसे ही बदनाम कर रहे सपा समर्थक: किसी...

जिस अपर्णा यादव का उजड़ा सुहाग, उसे ही बदनाम कर रहे सपा समर्थक: किसी ने प्रतीक यादव की मौत को बताया ‘नीला ड्रम कांड’, कोई पूछ रहा- पति को छोड़ क्यों गई असम?

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का निधन हो गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर समाजवादी इकोसिस्टम उनकी पत्नी और BJP नेता अपर्णा यादव को बदनाम करने में लग गया है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई 38 साल के प्रतीक यादव का बुधवार (13 मई 2026) तड़के निधन हो गया। बताया जा रहा है कि प्रतीक यादव लंबे समय से बीमार चल रहे थे। एक तरफ जहाँ प्रतीक यादव के निधन के बाद उनकी पत्नी और BJP नेता अपर्णा यादव का सुहाग उजड़ गया, वहीं सोशल मीडिया पर समाजवादी इकोसिस्टम उन्हें ही बदनाम करने में लग गया है।

दरअसल, BJP नेता अपर्णा यादव अपने पति प्रतीक यादव के निधन के वक्त असम में थीं, उन्हें लखनऊ आते-आते दोपहर के 2 बज गए। इस पर समाजवादी इकोसिस्टम उन्हें घेरने में लगा हुआ है कि पति के बीमार होने के बावजूद वह असम गईं और अब निधन पर भी वे देरी से आ रही हैं। इसी के साथ कुछ समय पहले ही अपर्णा यादव और प्रतीक यादव के तलाक की भी खबरें सामने आई थीं, लेकिन बाद में प्रतीक यादव ने सबके सामने आकर बताया था कि दंपति के बीच सब कुछ ठीक चल रहा है।

सोशल मीडिया पर समाजवादी इकोसिस्टम ने फैलाया अपर्णा यादव के खिलाफ प्रोपेगेंडा

प्रतीक यादव की मौत के बाद सोशल मीडिया पर समाजवादी इकोसिस्टम ने अपर्णा यादव के खिलाफ प्रोपेगेंडा चला रखा है। लोग उन्हें प्रतीक यादव की मौत को उनकी पत्नी अपर्णा यादव के साथ पुरानी अनबन संग जोड़कर खयाली पुलाव पका रहे हैं। कोई अखिलेश यादव की फुर्ती में अस्पताल पहुँचने की तारीफ करते नहीं थक रहा है। यानी कि सोशल मीडिया पर पूरा समाजवादी नैरेटिव आगे बढ़ाया जा रहा है।

परमाननंद आजमगढ़ी नाम के ‘एक्स’ यूजर कहते हैं कि कुछ दिनों पहले ही अपर्णा यादव की सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें प्रतीक ने अपनी पत्नी BJP महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को परिवार तोड़ने वाला बताया था। उन्होंने आगे लिखा, “प्रतीक ने यह भी कहा था कि वह जल्द से जल्द अपर्णा यादव को तलाक देने जा रहे हैं। ऐसे में प्रतीक की संदिग्ध मौत की खबर आना तमाम विवादों को जन्म देता है।”

अविनाश लिखते हैं कि प्रतीक यादव की मौत मामले में उनकी पत्नी अपर्णा यादव से भी पूछताछ होनी चाहिए, पति की बीमारी के समय वो असम में क्या कर रही थी और अपर्णा यादव और प्रतीक का कई महीनों से झगड़ा चल रहा था क्या यह साजिश हो सकती है नीले ड्रम कांड की तरह।

‘गौरव’ ने भी दंपति के बीच पुराने विवाद को जड़ बनाकर कहा, “क्या कल रात प्रतीक यादव और अपर्णा बिष्ट के बीच कुछ भयानक विवाद हुआ था? ये सब पुलिस जाँच में सामने आएगा।”

डॉ. विष्णु यादव ने एंबुलेंस में प्रतीक यादव के शव का वीडियो पोस्ट कर दावा किया, “यह प्रतीक यादव का शव है। यहाँ पर कोई भी करीबी नहीं दिख रहा है। खासकर अपर्णा यादव भी नहीं।”

खुद को समाजवादी बताने वाले श्याम यादव का सवाल है कि प्रतीक यादव की तबीयत लंबे समय से ठीक नहीं थी, ऐसे में अपर्णा यादव असम क्यों गई थीं? उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तारीफ करते हुए कहा कि वे अपने छोटे भाई की खबर मिलते ही तुरंत पहुँच गए।

मनीष यादव लिखते हैं, “आखिरकार भाई भाई ही होता है… प्रतीक यादव को सबसे पहले देखने अखिलेश यादव जी ही पहुँचे हैं। जबकि अभी तक अपर्णा यादव नहीं दिखी हैं?”

रिस्की यादव लिखते हैं, “पत्नी अपर्णा यादव से कलह और अखिलेश यादव से बिछड़कर अलग रहना प्रतीक यादव को काफी दुख देता था। अपर्णा यादव की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने परिवार को खत्म कर दिया।”

प्रतीक यादव की मौत की वजह अपर्णा यादव?

सोशल मीडिया पर समाजवादी इकोसिस्टम जिस तरह अपर्णा यादव के खिलाफ प्रोपेगेंडा चला रहा है, उससे अमूमन अपर्णा यादव को प्रतीक यादव की मौत का संदिग्ध ठहराया जा चुका है। लेकिन अब तक जाँच में ऐसा कुछ सामने नहीं आया है। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वहीं उनके बड़े भाई अखिलेश यादव ने कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे के फैसले लेने की बात कही है।

उधर, प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी मौत की असली वजह अब तक पता नहीं लगी है। डॉक्टरों को प्रतीक के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान भी नहीं मिले हैं। इसीलिए डॉक्टरों ने आगे की जाँच के लिए विसरा सुरक्षित रख लिया है। साथ ही हार्ट को भी रख लिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर दोबारा जाँच की जा सके।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी, केजरीवाल-मान-सिसोदिया के साथ तस्वीरें: कौन है AAP नेता अशोक ओझा, जो अपनी ही पार्टी के नेताओं को IB के नाम...

अशोक ओझा केवल शहर स्तर का पदाधिकारी नहीं था, बल्कि पार्टी के बड़े नेताओं के साथ सीधा संपर्क रखने वाला और संगठन में पहचान रखने वाला चेहरा था।

जनगणना में मातृभाषा का एक जवाब तय करता है देश का बजट, शिक्षा नीति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व: जानिए उर्दू-अरबी से लेकर 19000 भाषाई पहचान...

लोकतंत्र में संख्या बल ही किसी भी भाषाई समूह की माँगों को मजबूती देता है। बहुभाषी भारत में यह जनगणना तय करती है कि आने वाले समय में सरकारी संसाधन और प्रशासनिक विकास किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
- विज्ञापन -