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पत्रकारिता के नाम पर बिग BC: पूछा- कैसे करें पेशाब, ट्विटर यूजर्स ने दिए ‘क्रांतिकारी’ जवाब

देश के 'लिबरल प्रोग्रेसिव विचारक वर्ग' के बीच महिला-पुरुषों के ऐसे मुद्दे अक्सर चर्चा का विषय बनते देखे जाते हैं। यहाँ तक कि ट्विटर पर महिलाओं के भी खड़े होकर पेशाब करने के अधिकारों पर भी #peestandingup जैसे हैशटैग चलाए जा चुके हैं।

भारतीय मीडिया का एक वर्ग ऐसा भी है जिसे तैमूर के डायपर बदलने से लेकर शौच करने के तरीकों में दिलचस्पी है। कुछ लोग प्रोग्रेसिव होने का चोला पहनकर ऐसा करते हैं तो कुछ केवल प्रासंगिक बने रहने के लिए। लेकिन यदि बात मीडिया गिरोह के बीबीसी जैसे सदस्य की हो तो ऐसा दोनों कारणों से किया जाता है।

कश्मीरी आतंकी मोहम्मद मकबूल भट्ट का महिमामंडन करते हुए इसकी फाँसी पर मार्मिक साहित्य लिखना हो या फिर सेक्स जैसे मुद्दे हों, बीबीसी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटता। आज भी बीबीसी एक रिपोर्ट के जरिए बेहद क्रांतिकारी मुद्दा सामने ले कर आया है। मुद्दा है- “पुरुषों को बैठकर पेशाब करना चाहिए या खड़े होकर?”

इसके बदले में बीबीसी को जो प्रतिक्रियाएँ मिलीं, वो इस शीर्षक से भी ज्यादा ‘क्रांतिकारी’ हैं।

बीबीसी के इस सवाल की प्रतिक्रिया में ट्विटर यूज़र ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए एक से बढ़कर एक क्रिएटिव जवाब देकर बीबीसी की मदद की। @Garima1907 ने इस खबर पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह किसी पुरुषवादी महिला द्वारा लिखी गई खबर है।

@sajidrazvi8 ने बीबीसी को जवाब में लिखा- “इस्लाम ने 1400 साल पहले ही बता दिया है बैठ कर पेशाब करना चाहिए, मुझे किसी से सीखने की ज़रूरत नही।”

इस पर @I_ThakurKhem ने जवाब में लिखा – “दुनिया 1400 साल से पुरानी हैं और हमारे पुरखे हजारों सालों से बैठ कर करते आ रहे हैं।”

देश के ‘लिबरल प्रोग्रेसिव विचारक वर्ग’ के बीच महिला-पुरुषों के ऐसे मुद्दे अक्सर चर्चा का विषय बनते देखे जाते हैं। यहाँ तक कि ट्विटर पर महिलाओं के भी खड़े होकर पेशाब करने के अधिकारों पर भी #peestandingup जैसे हैशटैग चलाए जा चुके हैं।

यह पहली बार नहीं है, या फिर इस प्रकार की रिपोर्टिंग करने वालों में बीबीसी ही अकेला नहीं है। बीबीसी की ही तर्ज पर दी लल्लनटॉप एक साल पहले इस तरह की रिपोर्ट शेयर कर चुका है। वैसे लल्लनटॉप एक बार हिटलर का लिंग भी नाप चुका है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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