सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वेदांत नाम के एक छात्र ने एक पोस्ट किया है। अपने ‘एक्स’ हैंडल @VEDANTSHRIV17 पर उन्होंने बताया कि वह कक्षा 12वीं के छात्र हैं और दावा किया कि उनकी फिजिक्स (Physics) विषय की आंसर शीट असल में उनकी नहीं है। हालाँकि, वेदांत के इस दावे पर कई यूजर्स ने आशंका जताई है।
पोस्ट में वेदांत ने बताया कि 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों में उन्हें फिजिक्स में काफी कम नंबर मिले, जिसके बाद उन्होंने CBSE की री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) प्रक्रिया के तहत आंसर शीट की फोटोकॉपी के लिए आवेदन किया था। 23 मई 2026 को आंसर शीट की फोटोकॉपी मिलने के बाद वेदांत ने दावा किया कि जो आंसर शीट उन्हें CBSE ने दी है, वह उनकी है ही नहीं।

वेदांत ने फिजिक्स की आंसर शीट की फोटोकॉपी की शेयर
वेदांत ने अपनी शिकायत को लेकर ‘एक्स’ पर पूरा एक थ्रेड पोस्ट किया। इस थ्रेड में वेदांत ने अपनी शिकायतों के साथ-साथ कई विषयों की आंसर शीट की फोटोकॉपी शेयर करते हुए CBSE से सवाल किए। वेदांत ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि आंसर शीट की फोटोकॉपी में जो हैंडराइटिंग है, वो उनकी नहीं है। यहाँ तक उन्होंने दावा किया कि कॉपी में वो सवाल भी नहीं थे, जिन्हें उन्होंने परीक्षा में हल किया था।
The Physics answer sheet sent by CBSE does is not my answer sheet at all.
— VEDANT (@VEDANTSHRIV17) May 23, 2026
I KNOW this is not my handwriting and it did not have the questions i attempted.
Not just me — my family, teachers, and everyone who knows my writing immediately noticed the difference.
वेदांत के मुताबिक, सिर्फ उन्होंने ही नहीं, बल्कि उनके परिवार, शिक्षकों और उनकी लिखावट को पहचानने वाले हर व्यक्ति ने तुरंत यह फर्क समझ लिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने फिजिक्स की कॉपी की तुलना अपनी इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की आंसर शीट्स के साथ-साथ अपने हाथ से लिखे नोट्स से भी की, इन्हें वेदांत ने एक्स पर पोस्ट भी किया।
वेदांत का कहना है कि इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की कॉपियाँ एक-दूसरे से साफ मेल खाती हैं, लेकिन फिजिक्स की कॉपी पूरी तरह किसी दूसरे छात्र की लगती है। उन्होंने दावा किया कि कोई भी व्यक्ति खुद इन आंसर शीट्स की तुलना करके फर्क आसानी से देख सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह सच है, तो फिर आखिर उनके रोल नंबर पर किस कॉपी का मूल्यांकन किया गया- उनकी असली कॉपी का या किसी दूसरे छात्र की कॉपी का। वेदांत का कहना है कि अब यह मामला सिर्फ ‘री-चेकिंग’ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह CBSE के OSM सिस्टम में आंसर शीट एक्सचेंज या टैगिंग में हुई किसी गंभीर गलती का मामला हो सकता है।
वेदांत ने CBSE से माँग की कि मामले की तुरंत जाँच की जाए, उनकी असली फिजिक्स आंसर शीट को सत्यापित किया जाए, OSM टैगिंग और स्कैनिंग प्रक्रिया का ऑडिट किया जाए, यह जाँच हो कि कहीं आंसर शीट्स की अदला-बदली तो नहीं हुई, और यह सुनिश्चित किया जाए कि सही कॉपी का ही मूल्यांकन हो।
तीन विषयों का री-इवैल्यूएशन करवाया, फिजिक्स में ही मिली शिकायत
मामला सामने आने के बाद ABP न्यूज ने छात्र से बातचीत की, जिसमें उन्होंने पूरी बात विस्तार से बताई। छात्र वेदांत ने दावा किया कि फिजिक्स की आंसर शीट के पहले पेज पर, जहाँ रोल नंबर और बाकी डिटेल्स लिखी हुई हैं, वहाँ उसकी हैंडराइटिंग दिखाई देती है। लेकिन जिस पेज से प्रश्नों के उत्तर लिखने शुरू होते हैं, वहाँ की लिखावट पूरी तरह अलग नजर आती है। अपने इस दावे को साबित करने के लिए वेदांत ने कई तर्क भी दिए।
एक छात्र ने CBSE पर लगाए गंभीर आरोप
— ABP News (@ABPNews) May 25, 2026
फिजिक्स की आंसर शीट बदल गई : छात्र
आंसर शीट में मेरी हैंडराइटिंग नहीं : छात्र@anchorjiya | https://t.co/smwhXUROiK #CBSE #Education #Viral @ajatikaa pic.twitter.com/HIJMlMSuvr
वेदांत का कहना है कि उन्होंने इंग्लिश, कंप्यूटर साइंस और फिजिक्स समेत तीन विषयों का री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया था। छात्र ने कहा कि इंग्लिश और बाकी विषयों की आंसर शीट में उसकी असली हैंडराइटिंग साफ दिखाई देती है, जबकि फिजिक्स की कॉपी में लिखावट उससे बिल्कुल मेल नहीं खाती। उसने कहा कि फिजिक्स की आंसर शीट में मोटी और चौड़ी हैंडराइटिंग है, जबकि वह हमेशा पतला और छोटा लिखता है। छात्र वेदांत ने यह भी बताया कि फिजिक्स की कॉपी में सबसे पहले MCQ हल किए गए हैं, जबकि वह कभी भी परीक्षा की शुरुआत MCQ से नहीं करते।
वेदांत के मुताबिक, बाकी विषयों में उसके अच्छे नंबर आए हैं और उसे फिजिक्स में भी 90 से ज्यादा अंक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन रिजल्ट में उसे सिर्फ 65 नंबर मिले। वहीं परिवार का कहना है कि अगर यह कॉपी उनके बच्चे की है ही नहीं, तो री-इवैल्यूएशन करवाने का क्या मतलब रह जाता है। परिवार ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले की वजह से उनके बच्चे का ओवरऑल स्कोर खराब हो गया, जिससे उसके भविष्य पर भी खतरा खड़ा हो गया है।
सोशल मीडिया पर वेदांत के दावे पर जताई गई आशंका
सारे सबूत दिखाने के बावजूद सोशल मीडिया पर यूजर्स वेदांत के दावे पर आशंका जता रहे हैं। इस मामले को लेकर एक्टिव एडवोकेट विनीत जिंदल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि लोग वेदांत को ‘पाकिस्तानी’ बता रहे हैं, लेकिन यह मामला असली है। विनीत जिंदल ने बताया कि उन्होंने वेदांत के भाई से बात की और सोशल मीडिया पर ऐसे कमेंट्स से परिवार दुखी है।

साथ ही उन्होंने बताया कि वेदांत और उनके परिवार लगातार CBSE के साथ संपर्क में है और अगर वह बोर्ड की कार्रवाई से संतुष्ट नही होते हैं तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे। ऐसे में एडवोकेट विनीत जिंदल ने वेदांत और उनके परिवार की सहायता के लिए निशुल्क उनका केस लड़ने का भी आश्वासन दिया है।
CBSE की री-इवैल्यूशन प्रक्रिया क्या है और कैसे होता है आवेदन?
CBSE बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट जारी होने के बाद अगर किसी छात्र को अपने अंकों को लेकर संदेह होता है, तो बोर्ड उसे री-इवैल्यूशन यानी पुनर्मूल्यांकन का मौका देता है। यह प्रक्रिया खासतौर पर उन छात्रों के लिए होती है जिन्हें लगता है कि उनकी कॉपी सही तरीके से जाँची नहीं गई, किसी उत्तर के अंक छूट गए हैं या कुल नंबर जोड़ने में गलती हुई है। CBSE हर साल रिजल्ट जारी होने के बाद इसके लिए तय समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा देता है।
री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया तीन चरणों में होती है। सबसे पहले छात्र ‘वेरिफिकेशन ऑफ मार्क्स’ के लिए आवेदन कर सकता है। इस चरण में बोर्ड यह जाँच करता है कि कहीं नंबर जोड़ने में गलती तो नहीं हुई, कोई उत्तर बिना जाँचे तो नहीं छूट गया या अंक अपलोड करने में कोई त्रुटि तो नहीं हुई। अगर छात्र इस प्रक्रिया के बाद भी संतुष्ट नहीं होता, तो वह अपनी आंसर शीट की फोटोकॉपी माँग सकता है। कॉपी मिलने के बाद छात्र यह देख सकता है कि उसकी आंसर शीट में किस तरह जाँच की गई है और किन सवालों में कितने अंक दिए गए हैं।
इसके बाद तीसरा और सबसे अहम चरण री-इवैल्यूएशन का होता है। इसमें छात्र उन सवालों को चुन सकता है जिनके मूल्यांकन पर उसे आपत्ति है। CBSE उन्हीं उत्तरों की दोबारा जाँच करवाता है। हालाँकि, बोर्ड पूरे पेपर की दोबारा जाँच नहीं करता, बल्कि केवल उन्हीं सवालों को री-इवैल्यूएट किया जाता है जिन्हें छात्र चुनकर आवेदन में शामिल करता है। इस प्रक्रिया के बाद अगर नंबर बढ़ते हैं, घटते हैं या पहले जैसे ही रहते हैं, तो वही अंतिम माने जाते हैं और उसके बाद किसी तरह की चुनौती स्वीकार नहीं की जाती।
कौन कर सकता है आवेदन?
री-इवैल्यूशन के लिए आवेदन केवल वही छात्र कर सकते हैं जिन्होंने संबंधित परीक्षा दी हो और तय समय सीमा के भीतर फीस जमा की हो। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है और छात्र CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। हर चरण के लिए अलग-अलग फीस निर्धारित होती है, जो हर विषय या हर प्रश्न के हिसाब से ली जाती है। बोर्ड आमतौर पर रिजल्ट घोषित होने के कुछ दिनों बाद आवेदन की तारीखें जारी करता है, इसलिए छात्रों को नियमित रूप से CBSE की वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जाती है।


