"इस बोट पर मुझे झाँसे में लेकर एक रात रोका गया। इसके बाद मुझे बोट पर बंधक बना लिया गया और रफीक अहमद डुंडू द्वारा मेरे साथ हाउसबोट पर बार-बार दो महीने तक बलात्कार किया गया।"
इन्हीं दोनों ट्वीट के स्क्रीनशॉट्स को शेयर करके एमनेस्टी इंडिया के पाखंड पर लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि एमनेस्टी बहुत भयानक तरह से झूठ फैलाता है।
सोशल मीडिया के जरिए एक बार फिर भारतीय सेना और सुरक्षाबलों की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से एक फर्जी नैरेटिव रचने का प्रयास किया जा रहा है कि बशीर अहमद की मृत्यु CRPF की गोली लगने से हुई।
पिछले एक महीने में आतंकवादियों ने दूसरी बार अपने नापाक ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मस्जिदों का इस्तेमाल किया है। आईजी विजय कुमार ने कहा, "मैं मस्जिद समितियों से अनुरोध करता हूँ कि आतंकवादियों को धार्मिक स्थलों का उपयोग न करने दें।"