यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस को दूसरों के क्रिएटिव आइडिया को चुराते हुए और उन्हें ओरिजिनल आइडिया के रुप मे पेश करते हुए पकड़ा गया है। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस पार्टी कई बार इस तरह की हरकतें कर चुकी है। 2017 में कॉन्ग्रेस ने कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के आर्ट वर्क को चुराया था। पार्टी ने इसमें से भी लोगो को हटा दिया था।
रॉय के लेटरहेड में देखा जा सकता है कि फिलहाल वो किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं। बावजूद वह अपने लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। कानूनन किसी व्यक्ति और निजी संगठन के लिए इसका उपयोग प्रतिबंधित है।
“हमें जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में लोग आवश्यक वस्तुओं को लेने के लिए विधायक के आवास पर एकत्र हुए हैं। वहाँ पर लगभग एक हजार लोग थे। यह राज्य सरकार द्वारा लगाई गई धारा 144 का उल्लंघन है। भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 279 के तहत कार्रवाई की जाएगी।”
पुलिस के मुताबिक शनिवार देर रात हाईवे पर भारी भीड़ थी। भीड़ देख पुलिस वहाँ पर पहुँची। भीड़ हटाने की कोशिश की तो कॉन्ग्रेस नेता और उनके दोस्तों ने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस के साथ अभद्रता की।
"भारत में घर में रहना सबसे अच्छा है लेकिन घर में रहने के लिए लोगों को पैसे और खाने की जरूरत होगी। हमें न सिर्फ 21 दिनों के लिए सोचना और प्लान करना चाहिए बल्कि उसके अगले कुछ हफ्तों की भी योजना होनी चाहिए।"
स्वास्थ्य मंत्री हिमंता विश्व शर्मा ने कॉन्ग्रेस नेता हरजीत भट्टी के ट्वीट को (राजनीतिक उद्देश्यों से) अत्यधिक प्रेरित बताते हुए कहा कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पिछले तीन दिनों में PPE किट की अच्छी संख्या में आपूर्ति की है। शर्मा ने यह भी बताया कि पुलिस को भट्टी के खिलाफ FIR दर्ज करने और जाँच करने के लिए कहा गया है।
"इस दौरान मैंने ड्राइवर से पूछा कि वो यहाँ कैसे आया? तो उसने मुझे बताया कि उसे कैंसर था। कोई दवाई नहीं थी, जिससे इलाज हो सके। आखिरकार उसे इस आश्रम आना पड़ा। इस आश्रम में उसे गोमूत्र दिया गया। उसे लेने के बाद बहुत आराम मिला और उसका कैंसर का इलाज हो गया।"
“व्यक्तिगत रूप से मैं कपिल सिब्बल पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूँगा। मगर मैं यह जरूर बताना चाहूँगा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद वो मेरे आवास पर आए थे। वह तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन माँगने आए थे। मैंने उन्हें अपने घर में आने ही नहीं दिया था।”
22 विधायकों की बगावत ने ही मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार की विदाई की पटकथा लिखी थी। शुरुआत में विधानसभा स्पीकर इनका इस्तीफा स्वीकार करने से टालमटोल कर रहे थे। लेकिन, गुरुवार को फ्लोर टेस्ट के सुप्रीम कोर्ट के बाद इनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था।
बताया जाता है कि बाल सुधार गृह से निकलने के बाद उसे दक्षिण भारत के किसी स्थान पर भेज दिया गया। उसका नाम बदल दिया गया। बदली हुई पहचान के साथ वह एक एनजीओ की निगरानी में एक होटल में बावर्ची का काम करता है।