अध्यादेश के पास होने के बाद बुजुर्ग माँ-बाप बच्चों की सेवा न करने वालों बच्चों को प्रॉपर्टी से ही बेदखल कर दिया जाएगा। वे किसी प्रकार का दुर्व्यवहार माँ-बाप से नहीं कर पाएँगे।
एमपी ही नहीं राजस्थान के किसान भी पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली के आसपास हो रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं हुए हैं। राजस्थान के एक किसान ने नए कृषि कानूनों को लाने के लिए पीएम मोदी को बहुत धन्यवाद दिया।
हाजीपुर स्टेशन से गुजर रही राजधानी एक्सप्रेस पर भी अभ्यर्थियों का ग़ुस्सा फूटा। इस दौरान उन्होंने ट्रेन पर जमकर पत्थरबाज़ी की। इससे ट्रेन के शीशे टूट गए और उसमें सवार यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अगर सिर्फ आरोप के आधार पर किसी को बलात्कारी कहकर गोली मारने का जोश थोड़ा कम हो गया हो तो सोचिएगा। न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित होने, और ‘बनाना रिपब्लिक’ होने में फर्क तो होता है ना?
महिला अधिकारी को बचाने के दौरान एक एसएचओ व कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। हमलावर के बारे में अभी कुछ नहीं पता चल सका है, इसकी जाँच जारी है। इस घटना को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयर पर्सन रेखा शर्मा ने जाँच की माँग की है।
यदि वकीलों ने लॉकअप को पहले तोड़ने की कोशिश की और उसमें असफ़ल रहने पर आगजनी का सहारा लिया, जैसा कि एडिशनल डीसीपी (नॉर्थ) का दावा है, तो यह निष्पक्ष और बेहद गंभीर जाँच का विषय होना चाहिए कि यह जेल तोड़ने का प्रयास महज़ गुस्से की अभिव्यक्ति था, या इसके पीछे कोई ठंडे दिमाग से बनाई गई योजना थी।
पार्किंग विवाद को लेकर दिल्ली के तीस हज़ारी कोर्ट के बाहर वकीलों और पुलिस के बीच हिंसा हुई थी। एक पुलिस कार और 20 अन्य वाहनों को आग लगा दी गई थी। 2 पुलिस वालों को दिल्ली हाई कोर्ट ने सस्पेंड कर दिया था और न्यायिक जाँच के आदेश दे दिए थे।
कटनी में एक आरएसएस प्रचारक को पुलिसकर्मियों ने जमकर पीटा और उनके कपड़े फाड़ दिए। घटना से नाराज बीजेपी के कार्यकर्ता थाने में धरने पर बैठ गए। मामले के तूल पकड़ने के बाद आरोपित थाना प्रभारी लाइन हाजिर कर दिए गए हैं।
कानून के शासन और नैतिकता, मूल्यों, आदर्शों की बातें करने वाली योगी सरकार क्या जनता के लिए अलग और अपने विधायक के लिए अलग मापदंड अपनाएगी? नेताजी के लिए “भीड़” का समर्थन आएगा, इस डर से नेताजी को छोड़ा भी जा सकता है! या फिर नेताजी भी वैसे ही जेल जाएँगे जैसे इस मामले में कोई साधारण व्यक्ति गया होता?