ऐसी घटनाएँ, जिनमें कट्टरपंथियों के अपराधी होने की ख़बर आई और पीड़ित दलित या हिन्दू थे। लेकिन, किसी ने आवाज़ नहीं उठाई। कोई नया नैरेटिव नहीं गढ़ा गया। पढ़िए ऐसी 50 घटनाओं का विवरण, जिसे मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा प्रमुखता से नहीं उठाया गया।
"हाँ, हम छोटे हो सकते हैं, लेकिन झूठे या नकली नहीं। छल हमारी संस्कृति नहीं है। हम रोज़ चुनौतियाँ देते हैं।"- अंसिफ अशरफ़ (प्रबंध सम्पादक, ब्रिटिश हेराल्ड)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को British Herald द्वारा 'World’s Most Powerful Person' घोषित करने से जिनके (दिलों में आग) सुलगनी थी, वह सुलगी। और वे ज़हर उगले बिना रह नहीं पाए। पत्रकारिता के स्तर को गिराते हुए यह मीडिया गिरोह अब विकिपीडिया को 'भरोसेमंद सूत्र' मानने लगे हैं।
फेक न्यूज़ फ़ैलाने का स्वाति का पुराना इतिहास है। उन्होंने ऑपइंडिया को मानहानि नोटिस भेजते हुए आरोप लगाए कि हमारे चलते उन्हें पाठकों की संख्या में कमी झेलनी पड़ी है।
हम स्वीडन जैसे आर्थिक रूप से सशक्त देश नहीं हैं जहाँ पर नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा और हेल्थ चेकअप के मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। हमारे संसाधन इतने सीमित हैं कि कुल बजट का 2.5% हिस्सा स्वास्थ्य के लिए झोंकना अभी हमारा लक्ष्य ही है और वर्तमान सरकार इस लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। लेकिन हमारा देश का अभी भी एक बड़ा वर्ग कुपोषित है और यही कुपोषण चमकी बुखार जैसी बिमारियों का पहला कारण है, ना की आयुष्मान भारत योजना।
"जब 2009 में NDTV के शेयर्स 140 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से बिक रहे थे, तब रॉय ने मात्र 4 रुपए प्रति शेयर की दर से इन्हें ख़रीदा था। इसके बाद रॉय ने उसी दिन सभी ख़रीदे गए शेयर्स को RRPR होल्डिंग नामक कम्पनी को बेच दिया था। इससे रॉय को 200 करोड़ रुपए का 'Capital Gain' हुआ था।"
ये पत्रकारिता के कुछ ऐसे संस्थान हैं, जो भोजन शुरू करने से पहले अन्न का प्रथम अंश जवाहरलाल नेहरू और दूसरा अंश गाँधी परिवार के लिए रख देते हैं। कम ही लोग ये बात जानते हैं कि BBC जैसे मीडिया गिरोह राहुल गाँधी द्वारा हर चुनाव नतीजों के बाद त्याग दिए गए जनेऊ गले में धारण कर के ही कार्यक्षेत्र को रवाना होते हैं।
NDTV ने अपने शेयरों में हुए बदलाव व इंडियाबुल्स के साथ हुए समझौते के बाद समय पर सब कुछ खुलासा नहीं किया, इसीलिए उस पर 12 लाख रुपए का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया गया। इससे पहले एक मामले में NDTV के दोनों प्रमोटरों प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर कम्पनी में किसी भी प्रकार का पद लेने से 2 साल का प्रतिबन्ध लगा दिया था।
यह जानना आवश्यक है कि जिस पर आज फैसला सुनाया गया, वह अयोध्या में 2005 में हुआ आतंकी हमला था, जबकि बाबरी विध्वंस एक जगह पर विवाद के फलस्वरूप जन्मी घटना थी।
...लेकिन 2019 के चुनावों के बाद से इन नमक-हराम मीडिया गिरोहों ने नेहरू को ऐसे निकाल फेंका है जैसे लोग चाय में से मक्खी को निकाल फेंकते हैं। मीडिया अब समझ गया है कि वो नेहरू को गन्ने की तरह गन्ने की मशीन में ठूँसकर जितना निचोड़ सकते थे, निचोड़ चुके हैं।