कव्वाली 'न तो कारवाँ की तलाश है, न तो हमसफर की तलाश है' का सबसे प्रसिद्ध और प्रामाणिक पहली फिल्मी रिकॉर्डिंग 1960 की हिंदी फिल्म 'बरसात की रात' से मिलती है।
भोजपुरिया स्टार्स जब राजनीति में प्रवेश करते हैं और चुनाव लड़ते हैं तो हार से उनका सामना होता है। लेकिन जैसे ही बीजेपी जैसी बड़ी पार्टियों से नाता जोड़ते हैं, जीत मिलने लगती है।