इन कानूनों का धरातल पर उतरने के बाद ही उनका विश्लेषण किया जा सकता है। उससे पहले, केंद्र और राज्यों के संबंधों को कमजोर करना अथवा संसद द्वारा पारित कानूनों को फाड़ना कोई लोकतांत्रिक अधिकार नही बल्कि अराजकता है।
गंभीर ने अपने कार्यालय में कहा कि वह गुरुवार को गाँधी नगर में पहले भोजनालय की शुरुआत करेंगे, जिसके बाद गणतंत्र दिवस के मौके पर ऐसा ही एक भोजनालय अशोक नगर में भी खोला जाएगा।
टीएसमी में धड़ाधड़ इस्तीफों के बीच अमित शाह बंगाल में हैं। सत्ताधारी दल भी डैमेज कंट्रोल में लगी है। बागी विधायक जितेंद्र तिवारी अपने स्टैंड से पीछे हट गए हैं।
पत्र में कहा गया है कि अल्पसंख्यक क्षेत्रों में महिला मतदाताएँ सामान्य तौर पर बुर्का पहनकर वोट देने आती हैं। ऐसे में उन्हें बूथ में प्रवेश की अनुमति देने से पहले उनकी पहचान कर पाना सीपीएफ जवानों के लिए संभव नहीं होता।
वीडियो में हम शहनवाज हुसैन को दोनों हाथ से तिरंगा फहराते देख सकते हैं। वहीं दूसरी वीडियो में हम सैंकड़ों की भीड़ को भाजपा के लिए नारे लगाते और हाथ में तिरंगा फहराते भी देख सकते हैं।