"सुनो कमलनाथजी! यदि कोलाहल नियंत्रण कानून है तो वह केवल मंदिरों के लिए नहीं हो सकता। आपके जीवन में यदि कोई पारदर्शिता बची है तो रात के 10 से सुबह के 6 बजे तक इसे सभी के ऊपर लागू कराइए, वरना न आष्टा के मंदिर से स्पीकर हटेंगे, न किसी मंदिर से।"
कॉन्ग्रेसी नेताओं के बीच मारपीट की यह दुखद घटना इंदौर में कॉन्ग्रेस कार्यालय में हुई। दरअसल, गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। तभी दो नेताओं के बीच झंडा फहराने को लेकर विवाद हो गया और वो एक-दूसरे से उलझ पड़े।
इस मामले में पुलिस और कमलनाथ सरकार पर लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि आरोपितों के समुदाय विशेष से जुड़े होने के कारण मामले को दबाने की कोशिश की गई।
“मंत्री जी ने मुझे डाँटा और जेल में बंद करने को कहा। वो सरकार का हिस्सा हैं, उनसे उम्मीद है कि वो हमारी चिंताओं और मुद्दों को सुनें। मैं किसान कॉन्ग्रेस का राज्य महासचिव हूँ, इसके बाद भी वो मेरे साथ इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं।”
“प्रदर्शनकारियों द्वारा हमला किए जाने के बाद दोनों अधिकारी खुद का बचाव कर रहे थे। महिलाओं को अपमानित करना भाजपा और आरएसएस की संस्कृति है। सरकार दोनों अधिकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं करेगी।”
प्रिया वर्मा ने तिरंगा लिए एक प्रदर्शनकारी को पकड़कर खींचने की कोशिश की तो वह जमीन पर बैठ गया। इसके बाद उन्होंने एक और प्रदर्शनकारी का कॉलर पकड़ा और उसपर थप्पड़ बरसाने लगीं। इसी बीच किसी ने पीछे से उनकी चोटी खींच ली।
आरोपित कई दिनों से धनिराम को परेशान कर रहे थे। 14 जनवरी की रात उस पर केरोसिन उड़ेल आग लगा दी। आरोपितों के समुदाय विशेष से जुड़े होने के कारण शुरुआत में मामले को दबाने की कोशिश की गई।
"खान तीन माह से पुलिस के रडार पर था। उसने पहले भी कुछ अधिकारियों को पत्र लिखे थे। इसमें दावा किया था कि उसकी मॉं और भाई के आतंकवादियों से संपर्क हैं और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।"
विधायक मुन्नालाल गोयल का कहना है कि पार्टी जिन वादों के सहारे सत्ता में आई उसे पूरा करने के लिए वे कई बार सीएम और मंत्रियों को पत्र लिख चुके हैं। बावजूद इसके कुछ नहीं हुआ। मजबूरन, उन्हें धरने पर बैठना पड़ा।
शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल के प्रिंसीपल को निलंबित करने से नाराज़ स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपने अभिवावकों के साथ एक विरोध मार्च निकाला और अधिकारियों से प्रिंसीपल का निलंबन रद्द करने की माँग की। वहीं आपको बता दें कि स्कूल के प्रिंसीपल आरएन केरावत को शतप्रतिशत परिणाम देने के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।