सीजेआई को जब पता चला कि गुजरात हाईकोर्ट द्वारा सरेंडर की बात कहे जाने के बाद तीस्ता सीतलवाड़ का मामला सुप्रीम कोर्ट आया है तो उन्होंने इस पर नजर बनाए रखी...।
"तीस्ता सीतलवाड़ ने पीड़ितों और गवाहों का सीढ़ी की तरह इस्तेमाल कर के अपना फायदा कमाया - वो न सिर्फ पद्मश्री से नवाजी गईं, बल्कि उन्हें योजना आयोग के सदस्य का पद भी मिला।"